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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'उत्तर प्रदेश की प्राचीन सभ्यता और इतिहास' के संदर्भ में, ताम्र पाषाण कालीन (Chalcolithic) और उत्तर वैदिक कालीन पुरास्थलों (जैसे सोती संस्कृति, अतरंजीखेड़ा, हस्तिनापुर और लाल किला-गाजियाबाद) से प्राप्त साक्ष्यों, मृद्भाण्ड संस्कृतियों (जैसे गेरुवर्ण मृद्भाण्ड संस्कृति - OCP और चित्रित धूसर मृद्भाण्ड संस्कृति - PGW), तथा लौह युग के आरंभ से जुड़े पुरातात्विक अवशेषों के वैज्ञानिक विश्लेषण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उत्तर प्रदेश के पुरातात्विक इतिहास में गंगा-यमुना दोआब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र (जैसे अतरंजीखेड़ा, हस्तिनापुर, आलमगीरपुर) प्राचीन सभ्यताओं के विकास के प्रमुख केंद्र रहे हैं। 'गेरुवर्ण मृद्भाण्ड संस्कृति' (Ochre Coloured Pottery - OCP) ताम्र पाषाण काल (लगभग 2000 ईसा पूर्व से 1500 ईसा पूर्व) का प्रतिनिधित्व करती है। इसके बाद उत्तर वैदिक काल में (लगभग 1200 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व) 'चित्रित धूसर मृद्भाण्ड संस्कृति' (Painted Grey Ware - PGW) का विकास हुआ, जो भारत में लौह युग के आरंभ और लोहे के व्यापक प्रयोग (जैसे कृषि उपकरण और हथियार) से जुड़ी हुई है। अतरंजीखेड़ा से शुरुआती लौह साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। अतः विकल्प (ए) इस संदर्भ में सर्वाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक रूप से सत्य है।
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