शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
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'सामाजिक अध्ययन' के अंतर्गत 'भारतीय संविधान और राजव्यवस्था' के संदर्भ में, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 36 से 51 तक वर्णित 'राज्य के नीति निदेशक तत्वों' (Directive Principles of State Policy - DPSP) के संबंध में, आयरलैंड के संविधान से इनकी प्रेरणा, इन्हें 'न्याययोग्य' (Justiciable) न होने के बावजूद देश के शासन में 'मौलिक' (Fundamental) घोषित किए जाने, तथा इसके अंतर्गत आने वाले समाजवादी, गांधीवादी और उदारवादी-बौद्धिक सिद्धांतों (जैसे अनुच्छेद 40 - ग्राम पंचायतों का संगठन, अनुच्छेद 44 - समान नागरिक संहिता, और अनुच्छेद 48A - पर्यावरण का संरक्षण और संवर्द्धन) के वैधानिक, ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में वर्णित 'राज्य के नीति निदेशक तत्व' (DPSP) आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं। अनुच्छेद 37 स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि ये तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, परंतु इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा 'न्याययोग्य' (Justiciable) यानी प्रवर्तनीय नहीं बनाया गया है। विकल्प (a) गलत है क्योंकि भाग III (मौलिक अधिकार) न्याययोग्य हैं, भाग IV नहीं। विकल्प (c) गलत है क्योंकि अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों का संगठन गांधीवादी दर्शन पर आधारित है। विकल्प (d) गलत है क्योंकि अनुच्छेद 44 में वर्णित समान नागरिक संहिता DPSP का हिस्सा होने के कारण न्याययोग्य (Justiciable) नहीं है।
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सामाजिक अध्ययन शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'सविनाय अवज्ञा…
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“शारीरिक शिक्षा के उद्देश्य” के बारे में गलत कथन का चयन…
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व्यक्तित्व (Personality) के शील गुण (Trait) उपागम के संदर्भ में, गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) द्वारा वर्गीकृत शील गुणों के तीन स्तरों — कार्डिनल शील गुण (Cardinal Traits), केंद्रीय शील गुण (Central Traits), और द्वितीयक शील गुण (Secondary Traits) — के बीच निम्नलिखित में से कौन सा अंतर उनके मनोवैज्ञानिक प्रभाव और व्यापकता का सबसे सटीक विश्लेषण प्रस्तुत करता है?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सामाजिक अध्ययन शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) के स्थगन और उसके प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा (गोरखपुर, उत्तर प्रदेश) की हिंसक घटना के कारण महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को अचानक वापस ले लिया था। 2. आंदोलन के स्थगन से क्षुब्ध होकर चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस के भीतर ही रहकर विधानमंडलों में प्रवेश करने के उद्देश्य से वर्ष 1923 में 'स्वराज पार्टी' (Swaraj Party) की स्थापना की थी। 3. इस आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश (संयुक्त प्रांत) में किसानों का 'एका आंदोलन' (Eka Movement) मुख्य रूप से हरदोई, बहराइच और सीतापुर जिलों में लगान की अधिकता और बेगार के खिलाफ चलाया गया एक प्रमुख किसान आंदोलन था। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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सामाजिक अध्ययन शिक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) और वर्ष 1930-1931 के दौरान उत्तर प्रदेश (संयुक्त प्रांत) में चले 'कर-बंदी आंदोलन' (No-Tax Campaign) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश में कांग्रेस द्वारा लगान और मालगुजारी न देने के लिए 'कर-बंदी आंदोलन' चलाया गया था, जिसका नेतृत्व मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू और गोविंद वल्लभ पंत जैसे नेताओं ने किया था।
2. उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) और रायबरेली जैसे जिलों में किसानों ने जमींदारों और ब्रिटिश सरकार को भू-राजस्व (Land Revenue) देने से स्पष्ट मना कर दिया था।
3. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930) में कांग्रेस की ओर से महात्मा गांधी ने भाग लिया था, जहाँ उत्तर प्रदेश के कर-बंदी आंदोलन को वापस लेने की शर्त पर गांधी-इरविन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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शारीरिक शिक्षा के उद्देश्य क्या है?
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शिक्षा के उद्देश्यों को तैयार करने के लिए मुख्य कारक कौन-से हैं?
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