जीन पियाजे — MCQ प्रश्न, व्याख्या एवं मॉक टेस्ट
Clear filterसंज्ञानात्मक विकास की चार अवस्थाएँ — संवेदी-गामक, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त, औपचारिक।
🎯 51 Mock Tests Kheleinपियाजे के अनुसार, 'मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) में बच्चे की तार्किक क्षमता मुख्य रूप से किस पर आधारित होती है?
इस अवस्था में बालक केवल उन वस्तुओं के साथ तार्किक कार्य कर सकता है जिन्हें वह देख या छू सकता है (मूर्त वस्तुएं)।
पियाजे के अनुसार, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-Operational Stage) में 'जीववाद' (Animism) का क्या अर्थ है?
जीववाद (Animism) का अर्थ है कि बच्चा निर्जीव वस्तुओं (जैसे खिलौना, कुर्सी) को भी सजीव मानकर उनसे बातें करता है।
पियाजे के अनुसार, 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक चिंतन' (Hypothetical-Deductive Reasoning) किस अवस्था का मुख्य लक्षण है?
औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (11 वर्ष से ऊपर) में किशोर परिकल्पनाएं बनाने और तार्किक रूप से उनका परीक्षण करने में सक्षम हो जाते हैं।
पियाजे के अनुसार, 'मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) का मुख्य संज्ञानात्मक गुण क्या है?
मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था में बच्चे वस्तुओं के भौतिक गुणों में बदलाव के बावजूद उनकी मात्रा स्थिर रहने (संरक्षण) को समझने लगते हैं।
पियाजे के अनुसार, 'अहंकेन्द्रित वाक' (Egocentric Speech) का क्या महत्व है?
पियाजे के अनुसार, पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में बच्चा जो स्वयं से बातें करता है (Egocentric Speech), वह उसके चिंतन के विकास का हिस्सा है।
पियाजे के अनुसार, कौन सी अवस्था में 'अमूर्त तार्किक चिंतन' (Abstract Logical Thinking) विकसित होता है?
औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (11 वर्ष से ऊपर) में बालक परिकल्पनात्मक और अमूर्त रूप से तर्क करने में सक्षम हो जाता है।
जीन पियाजे के अनुसार, 'अहंकेन्द्रित' (Egocentric) होने का गुण किस अवस्था में पाया जाता है?
पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (2-7 वर्ष) में बालक केवल अपने दृष्टिकोण से दुनिया को देखता है।
पियाजे के अनुसार, 'संवेदी-पेशीय अवस्था' (Sensory-Motor Stage) में बालक मुख्य रूप से कैसे सीखता है?
शिशु अपनी इंद्रियों (Sensory) और क्रियाओं (Motor) के माध्यम से दुनिया का अन्वेषण करता है।
पियाजे के अनुसार, 'अनुकूलन' (Adaptation) की प्रक्रिया के दो प्रमुख घटक कौन से हैं?
पियाजे के अनुसार, अनुकूलन की प्रक्रिया आत्मसात्करण (नई जानकारी को पुराने ज्ञान में जोड़ना) और समायोजन (ज्ञान में परिवर्तन करना) से पूरी होती है।