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UPTET — Free MCQ Questions & Mock Test
Clear filterउत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की तैयारी के लिए यह विशेष शिक्षण अनुभाग है। इस पेज पर आप बाल विकास, शिक्षण विधियों, हिंदी व्याकरण और अन्य अनिवार्य विषयों के मानक प्रश्नों का अभ्यास कर सकते हैं, जो नवीनतम परीक्षा पैटर्न पर आधारित हैं।
🎯 245 Mock Tests Khelein
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-गर्भीय विभाजन के अंतर्गत 'पूर्वी गंगा का मैदान' (Eastern Ganga Plain) और उसकी विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पूर्वी गंगा का मैदान मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के मध्य और पूर्वी जिलों (जैसे वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, बलिया, गोरखपुर आदि) में फैला हुआ है, जिसका निर्माण घाघरा, गंडक, राप्ती और गोमती जैसी नदियों के जलोढ़ निक्षेपों से हुआ है। 2. इस मैदानी क्षेत्र की ढाल अत्यधिक तीव्र होने के कारण यहाँ की नदियाँ भयंकर अपरदन करती हैं, जिससे इस पूरे क्षेत्र में पर्वतीय जैसी उबड़-खाबड़ और बंजर स्थलाकृति का निर्माण होता है। 3. इस क्षेत्र में प्राचीन जलोढ़ मृदा को 'बांगर' और नवीन जलोढ़ मृदा को 'खादर' कहा जाता है, तथा यहाँ अधिक वर्षा और सघन जल संसाधनों के कारण धान और गेहूँ की कृषि बड़े पैमाने पर की जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में ऊर्जा के प्रवाह और लिंडमान के 'दस प्रतिशत के नियम' (Lindeman's 10% Law) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लिंडमान के 10% नियम के अनुसार, जब ऊर्जा एक पोषण स्तर (Trophic Level) से दूसरे उच्च पोषण स्तर पर स्थानांतरित होती है, तो उसका केवल 10 प्रतिशत भाग ही अगले स्तर के जीवों के शरीर में जैव-भार के रूप में संचित होता है, जबकि शेष 90 प्रतिशत ऊर्जा श्वसन, ऊष्मा और उपापचय (Metabolism) क्रियाओं के दौरान पर्यावरण में हास हो जाती है। 2. पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा 'चक्रीय' (Cyclic) होता है, ठीक उसी प्रकार जैसे कार्बन, नाइट्रोजन और जल चक्र कार्य करते हैं, क्योंकि उत्पादकों द्वारा सूर्य से ली गई कुल सौर ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती बल्कि विभिन्न पोषी स्तरों के बीच घूमती रहती है। 3. ऊर्जा के लगातार ह्रास के कारण ही सामान्यतः एक पारिस्थितिक तंत्र में पोषण स्तरों की संख्या सीमित (अधिकतम 4 से 5) होती है, और शीर्ष उपभोक्ताओं (Top Carnivores) तक पहुँचते-पहुँचते ऊर्जा की मात्रा इतनी कम हो जाती है कि वे खाद्य श्रृंखला के अंतिम चरण के रूप में कार्य करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना और कृषि-जलवायु विशेषताओं के संदर्भ में 'लाल और सघन मृदा' (Red and Mixed Soils) तथा उनके क्षेत्रीय विस्तार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर प्रदेश के दक्षिणी पठारी और पहाड़ी क्षेत्रों (विशेषकर झाँसी, महोबा, ललितपुर, हमीरपुर और मिर्जापुर के कुछ भागों) में लाल मृदा मुख्य रूप से पाई जाती है, जिसका निर्माण प्राचीन गनीज़ और विंध्यन क्रम की लाल बलुआ पत्थरों के अपक्षय (Weathering) से हुआ है। 2. इस प्रकार की मृदा में नाइट्रोजन, ह्यूमस और फास्फोरस की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जिसके कारण यह क्षेत्र गेहूँ और धान की अत्यधिक सघन खेती के लिए राज्य में सर्वाधिक उपजाऊ माना जाता है। 3. लाल मृदा सामान्यतः हल्की, अम्लीय प्रकृति की और जल धारण क्षमता में कम होती है, जिस कारण यहाँ चने, अरहर और तिलहन जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों का उत्पादन अधिक किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-गर्भीय विभाजन के अंतर्गत 'बुंदेलखंड पठार' की स्थलाकृति, मृदा और जलवायु विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बुंदेलखंड पठार उत्तर प्रदेश के दक्षिण में स्थित प्रायद्वीपीय पठार का ही उत्तरपूर्वी विस्तार है, जो मुख्य रूप से प्राचीन गनीज़, ग्रेनाइट और विंध्यन क्रम की चट्टानों से निर्मित है। 2. इस क्षेत्र में पाई जाने वाली मृदाओं में 'मार' और 'काबर' प्रमुख हैं, जिनमें नमी धारण करने की विशेष क्षमता होती है, और यहाँ की जलवायु अर्ध-शुष्क प्रकार की होने के कारण कृषि मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर करती है। 3. बुंदेलखंड क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ जैसे बेतवा, केन, चंबल और धसान उत्तर की ओर प्रवाहित होती हुई यमुना नदी में मिलती हैं, और इन नदियों ने इस क्षेत्र में गहरे खड्डों और 'बीहड़' (Ravines) वाली उबड़-खाबड़ स्थलाकृति का निर्माण किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) और उसके संशोधनों तथा दार्शनिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्द जोड़े गए थे। 2. प्रस्तावना में उल्लिखित 'न्याय' (Justice) के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरणा लेकर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक—इन तीन रूपों में शामिल किया गया है, जबकि 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्श को अमेरिकी क्रांति से लिया गया है। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के मूल ढाँचे (Basic Structure) को प्रभावित किए बिना संशोधन किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रान्त) में घटित प्रमुख घटनाओं और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस का कानपुर अधिवेशन (1925) - सरोजिनी नायडू (प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष) 2. काकोरी ट्रेन एक्शन / षड्यंत्र कांड (1925) - रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ और राजेंद्र लाहिड़ी 3. आल इंडिया किसान सभा का प्रथम सम्मेलन (लखनऊ, 1936) - स्वामी सहजानंद सरस्वती (अध्यक्ष) और एन.जी. रंगा (महासचिव) 4. व्यक्तिगत सत्याग्रह (1940) के तहत उत्तर प्रदेश से प्रथम सत्याग्रही - आचार्य विनोबा भावे उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
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बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों के संदर्भ में 'नियोजित विकास का सिद्धांत' (Principle of Predictable Direction) और उसके स्वरूप के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस सिद्धांत के अंतर्गत विकास की दिशा सामान्यतः सिर से पैर की ओर ('मस्तकोधोमुखी' या Cephalocaudal) तथा शरीर के केंद्रीय भाग से दूरस्थ अंगों की ओर ('निकूरस्थ' या Proximodistal) होती है। 2. विकास की दर सभी बालकों में एक समान और रैखिक (Linear) गति से चलती है, अर्थात आयु के हर पड़ाव पर शारीरिक और मानसिक विकास का प्रतिशत बिल्कुल एक जैसा होता है। 3. यद्यपि विकास की गति व्यक्तिगत भिन्नताओं के कारण भिन्न हो सकती है, तथापि विकास के चरण और प्रतिमान (Patterns) दुनिया भर के सभी बच्चों में सार्वभौमिक और पूर्वानुमानित (Predictable) होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-गर्भीय विभाजन के अंतर्गत 'भाबर एवं तराई क्षेत्र' (Bhabhar and Terai Region) की विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भाबर क्षेत्र शिवालिक हिमालय की तलहटी में पश्चिम में सहारनपुर से लेकर पूर्व में कुशीनगर तक एक संकीर्ण (8 से 10 किमी चौड़ी) पट्टी के रूप में फैला है, जहाँ नदियाँ भारी मात्रा में कंकड़, पत्थर और बोल्डर निक्षेपित करती हैं और स्वयं भूमिगत (Underground) हो जाती हैं। 2. भाबर पट्टी के ठीक दक्षिण में तराई क्षेत्र स्थित है, जहाँ भूमिगत हुई नदियाँ पुनः धरातल पर प्रकट होती हैं, जिससे यह क्षेत्र अत्यधिक दलदली, नम और घने जंगलों तथा लम्बी घास से युक्त होता है। 3. तराई क्षेत्र में अत्यधिक नमी, उपजाऊ जलोढ़ मृदा और अनुकूल जलवायु के कारण गन्ने, धान और जूट की कृषि बड़े पैमाने पर की जाती है, और वर्तमान में इस क्षेत्र का अधिकांश भाग वनों को काटकर कृषि योग्य भूमि में परिवर्तित किया जा चुका है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण की निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार कीजिए: 1. इस चरण में व्यक्ति का यह मानना होता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते या अनुबंध का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसे बदला जा सकता है। 2. इस स्तर पर नैतिकता पूरी तरह से बाहरी दंड, पुरस्कार या सामाजिक प्रतिष्ठा की चाह पर आधारित होती है, जहाँ व्यक्ति केवल इसलिए नियमों का पालन करता है ताकि वह कानून और व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारियों की नजर में अच्छा बन सके। 3. यह चरण कोहलबर्ग के सिद्धांत के स्तर-III (Level III) के अंतर्गत आता है, जो सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (Universal Ethical Principles) से ठीक पहले की अवस्था है, और इसमें वैधानिक कानूनों की तुलना में सामाजिक न्याय एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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