जीन पियाजे
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, जब एक बच्चा यह समझने लगता है कि किसी वस्तु का आकार या रूप बदल जाने पर भी उसका द्रव्यमान, भार और आयतन अपरिवर्तित (समान) रहता है, तो पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की यह अवस्था निम्नलिखित में से किस नाम से जानी जाती है और यह किस बौद्धिक क्षमता को दर्शाती है?
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Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 7 से 11 वर्ष) की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता का विकास है। इस अवस्था में बच्चा यह समझ जाता है कि किसी पदार्थ का रूप या आकार बदलने पर भी उसकी मात्रा (द्रव्यमान, भार और आयतन) में कोई परिवर्तन नहीं होता है। इसके साथ ही इस अवस्था में बच्चे 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की क्षमता भी हासिल कर लेते हैं, यानी वे किसी वस्तु या समस्या को केवल एक दृष्टिकोण से न देखकर कई पहलुओं से देख सकते हैं।
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, जब एक बालक प्रतीकात्मक…
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, जब एक बच्चा नई जानकारी को अपनी मौजूदा स्कीमा (Schema) में फिट करने के लिए उसमें बदलाव या संशोधन करता है, तो इस प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, जब एक बच्चा यह समझने लगता है कि किसी वस्तु का आकार या रूप बदलने पर भी उसकी मात्रा या द्रव्यमान (जैसे पानी की मात्रा या मिट्टी का गोला) अपरिवर्तित रहता है, तो पियाजे के इस संज्ञानात्मक कौशल को क्या कहा जाता है और यह किस अवस्था की मुख्य विशेषता है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा का विकास किस अवस्था के दौरान पूर्ण रूप से होता है, तथा इस अवस्था की मुख्य मानसिक विशेषता क्या है?
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