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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-आकृतिक स्वरूप के संदर्भ में, राज्य का कौन सा भौतिक प्रदेश प्राचीनतम 'गोंडवाना लैंड' (Gondwana Land) का भू-भाग माना जाता है, जहाँ कैमूर और सोनभद्र की पहाड़ियों के साथ-साथ विंध्यन क्रम की चट्टानें पाई जाती हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उत्तर प्रदेश के भौगोलिक विभाजन के अंतर्गत, राज्य का दक्षिण का पठारी क्षेत्र (जो मुख्य रूप से बुंदेलखंड और बघेलखंड के कुछ हिस्सों में फैला है) प्रायद्वीपीय पठार का उत्तरward विस्तार है और यह प्राचीनतम 'गोंडवाना लैंड' का हिस्सा माना जाता है। यहाँ विंध्यन क्रम की चट्टानें, सोनभद्र, मिर्ज़ापुर, चित्रकूट और ललितपुर जिलों में पाई जाती हैं, जहाँ लाल मृदा और पथरीली भूमि की प्रधानता होती है।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'व्यक्तित्व के शील गुण सिद्धांत' (Trait Theory of Personality) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक रेमंड कैटल (Raymond Cattell) द्वारा विकसित किए गए 'सोलह शील गुण प्रश्नावली' (16PF) और उनके द्वारा प्रतिपादित 'सतह शील गुण' (Surface Traits) तथा 'मूल शील गुण' (Source Traits) के बीच के मुख्य अंतर के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा वैज्ञानिक कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'कारक' (Case) प्रकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'अपादान कारक' का विभक्ति चिह्न 'से' (अलग होने के अर्थ में) होता है, लेकिन इसका प्रयोग तुलना करने, डरने, शरमाने (लज्जित होने), सीखने और दूरी प्रकट करने के संदर्भ में भी किया जाता है (जैसे- 'बिल्ली छत से कूदी' या 'पेड़ से पत्ते गिरे')।
2. 'संप्रदान कारक' और 'कर्म कारक' दोनों का विभक्ति चिह्न 'को' होता है, लेकिन दोनों में मुख्य अंतर यह है कि जहाँ कर्म कारक में क्रिया का फल सीधे कर्म पर पड़ता है, वहीं संप्रदान कारक में 'जिसके लिए कुछ किया जाए' या 'जिसे कुछ दिया जाए' (दान या सदा के लिए देना) का भाव होता है।
3. 'करण कारक' का विभक्ति चिह्न 'से' या 'के द्वारा' होता है, और यदि वाक्य में 'साधन' या 'माध्यम' का बोध हो (जैसे- 'वह कलम से पत्र लिखता है'), तो वहाँ हमेशा अपादान कारक माना जाता है क्योंकि कलम हाथ से अलग हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमता और उपचारात्मक शिक्षण' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, 'डिसकैल्कुलिया' (Dyscalculia - गणितीय विकार) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'इंट्रापेरिएटल सर्कस' (Intraparietal Sulcus - IPS), 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), और 'वेंट्रल ऑसिपिटोटेपोरल कॉर्टेक्स' (Ventral Occipitotemporal Cortex) के बीच संख्यात्मक परिमाण प्रसंस्करण (Numerical Magnitude Processing), स्थानिक संख्या रेखा प्रतिनिधित्व (Spatial Number Line Representation), और कार्य स्मृति (Working Memory) की सक्रियण गतिकी, तथा स्टैनिस्लास दहाएने (Stanislas Dehaene) के 'ट्रिपल-कोड मॉडल' (Triple-Code Model: विजुअल अरेबिक नंबर फॉर्म, वर्बल ऑडिटरी वर्ड फॉर्म, और एनालॉग मैग्नीट्यूड रिप्रेजेंटेशन) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-डिसकैल्कुलिया ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Dyscalculia Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी संख्यात्मक रणनीतियों, कंक्रीट-पिक्टोरियल-एब्स्ट्रैक्ट (CPA) दृष्टिकोण व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भू-गर्भीय विभाजन तथा इसकी जलवायु एवं मिट्टियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'भाट' (Bhat) मृदाएँ यहाँ की प्रमुख विशेष स्थानीय मिट्टियाँ हैं, जिसमें 'मार' मृदा मुख्य रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र की एक चिकनी, काले रंग की अत्यधिक उपजाऊ उपजाऊ मृदा है जो नमी पाकर बहुत चिपचिपी हो जाती है।
2. उत्तर प्रदेश में ग्रीष्म ऋतु के दौरान पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली अत्यधिक गर्म, शुष्क और धूल भरी हवाओं को 'लू' कहा जाता है, और इस राज्य में सबसे अधिक तापमान वाला जिला आगरा और झाँसी क्षेत्र माना जाता है।
3. उत्तर प्रदेश के गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में पाई जाने वाली नवीन जलोढ़ मृदा को 'खादर' कहा जाता है, जिसमें पोटेशियम और चूने की प्रचुरता होती है, और यह मृदा प्रतिवर्ष बाढ़ के पानी द्वारा नवीकृत होने के कारण कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना, कृषि जलवायु क्षेत्रों और फसल प्रारूप (Crop Pattern) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कृषि जलवायु की दृष्टि से कुल 9 (नौ) विशिष्ट जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो यहाँ की वर्षा, तापमान, भू-आकृति और मृदा भिन्नताओं पर आधारित हैं।
2. राज्य के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में मुख्य रूप से बलुई-दोमट और जलोढ़ मृदा पाई जाती है, जो गन्ने और गेहूँ की सघन खेती के लिए अत्यधिक उपयुक्त है, जबकि बुंदेलखंड क्षेत्र में मिलने वाली 'मार' और 'काबर' मृदाएँ चिकनी और काली प्रकृति की होती हैं जो नमी को लंबे समय तक बनाए रखती हैं।
3. उत्तर प्रदेश के पूर्वी और तराई क्षेत्रों में पाई जाने वाली 'भूर' (Bhoor) मृदा अत्यधिक उपजाऊ और महीन कणों वाली चिकनी मिट्टी होती है, जिसमें नाइट्रोजन और फास्फोरस की प्रचुरता के कारण धान की खेती बिना किसी रासायनिक उर्वरक के बंपर मात्रा में होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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