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बुद्धिमत्ता (Intelligence) के त्रि-आयामी सिद्धांत (Tri-dimensional Theory of Intelligence) का प्रतिपादन किसने किया था, जिसके अनुसार बुद्धि को संक्रियाओं (Operations), अंतर्वस्तुओं (Contents) और उत्पादों (Products) के तीन आयामों में वर्गीकृत किया गया है?
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Detailed Explanation
बुद्धिमत्ता के त्रि-आयामी सिद्धांत या 'बुद्धि की संरचना मॉडल' (Structure of Intellect Model) का प्रतिपादन जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा किया गया था। इस सिद्धांत के अनुसार, बौद्धिक योग्यताओं को तीन स्वतंत्र आयामों के संदर्भ में व्यवस्थित किया जा सकता है: 1. संक्रियाएँ (Operations) - मानसिक प्रक्रियाएँ जैसे चिंतन, स्मरण आदि, 2. अंतर्वस्तुएँ (Contents) - जिन पर संक्रियाएँ की जाती हैं जैसे दृश्य, श्रव्य, प्रतीकात्मक आदि, और 3. उत्पाद (Products) - संक्रियाओं के परिणाम जैसे इकाइयाँ, वर्ग, संबंध आदि। मूल रूप से गिलफोर्ड ने बुद्धि के 120 कारकों की बात की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 150 और फिर 180 कर दिया गया।
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उत्तर प्रदेश की राजव्यवस्था, पंचायती राज व्यवस्था और विधानमंडल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश विधानसभा (Legislative Assembly) में कुल सदस्यों की संख्या 403 है, और यदि आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) समुदाय के मनोनयन के प्रावधान को समाप्त कर दिया जाए (104वें संविधान संशोधन के पश्चात), तो यह पूरी तरह निर्वाचित सदन है, जिसके गठन के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित है।
2. उत्तर प्रदेश विधान परिषद (Legislative Council) एक स्थायी सदन है जिसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है, और इसके कुल सदस्यों में से एक-तिहाई सदस्य स्थानीय संस्थाओं (जैसे नगर निगम, जिला पंचायत आदि) द्वारा चुने जाते हैं।
3. उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत) का विधिवत शुभारंभ उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 के तहत किया गया था, और 73वें संविधान संशोधन (1992) के माध्यम से इसे संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया जिसके तहत पंचायतों में महिलाओं के लिए न्यूनतम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की गईं।
4. उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त और उपलोकायुक्त अधिनियम के तहत नियुक्त राज्य के पहले 'लोकायुक्त' न्यायमूर्ति विशंभर दयाल थे, जिनका कार्यकाल सबसे लंबा रहा, तथा इस पद पर नियुक्त होने वाले व्यक्ति का चयन मुख्यमंत्री, विधानसभा में विपक्ष के नेता और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की संयुक्त समिति द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम स्थानांतरण' (Transfer of Learning) के संदर्भ में, मनोवैज्ञानिक ई. एल. थॉर्नडाइक (E. L. Thorndike) द्वारा प्रतिपादित 'समान तत्वों का सिद्धांत' (Theory of Identical Elements) के अनुसार, यदि किसी एक परिस्थिति में सीखा गया ज्ञान या कौशल दूसरी परिस्थिति में सीखने में पूरी तरह से बाधक बनता है और नकारात्मक प्रभाव डालता है, तो थॉर्नडाइक के इस सिद्धांत और आधुनिक संज्ञानात्मक परिप्रेक्ष्य के तहत इस प्रक्रिया की सबसे सटीक वैज्ञानिक व्याख्या निम्नलिखित में से कौन सी होगी?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अभिप्रेरणा (Motivation) और उसके सिद्धांतों' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अब्राहम मास्लो (Abraham Maslow) द्वारा प्रतिपादित 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रल स्ट्रेटम' (Ventral Striatum), 'न्यूक्लियस एक्यूम्बेंस' (Nucleus Accumbens), 'लिम्बिक सिस्टम' और 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' के बीच डोपामिनर्जिक रिवार्ड पाथवे, होमियोस्टैटिक नियमन और उच्च-स्तरीय आत्म-सिद्धि (Self-Actualization) की सक्रियण गतिकी, तथा एडवर्ड डेसी (Edward Deci) और रिचर्ड रायन (Richard Ryan) द्वारा प्रतिपादित 'आत्म-निर्णय सिद्धांत' (Self-Determination Theory: स्वायत्तता, सक्षमता और संबद्धता) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, नीड-बेस्ड मोटिवेशनल कंस्ट्रक्टिविस्ट पेडागोजी (Need-Based Motivational Constructive Pedagogy) और विद्यार्थियों में आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation), संवेगात्मक कल्याण व समग्र शैक्षणिक संलग्नता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के दौरान 'लैV विगोट्सकी' (Lev Vygotsky) के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के प्रमुख संप्रत्यय 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) और 'मचान' (Scaffolding) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक दृष्टि से सत्य है?
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'कारक' (Case) प्रकरण के संदर्भ में, 'अपादान कारक' (Abladhan Karak) और 'करण कारक' (Karan Karak) दोनों में 'से' विभक्ति चिह्न का प्रयोग होता है, किंतु दोनों के अर्थ और प्रयोग में मूल अंतर होता है। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. करण कारक में 'से' विभक्ति चिह्न साधन (Instrument) या माध्यम का बोध कराती है, जिसके द्वारा कोई क्रिया संपन्न होती है (जैसे- 'वह कलम से लिखता है')।
2. अपादान कारक में 'से' विभक्ति चिह्न किसी वस्तु या व्यक्ति के एक-दूसरे से अलग होने (Separation), डरने, शर्माने, तुलना करने या सीखने का बोध कराती है (जैसे- 'पेड़ से पत्ता गिरा')।
3. 'हिमालय से गंगा निकलती है' इस वाक्य में गंगा का हिमालय से अलग होने का भाव होने के कारण यहाँ करण कारक का प्रयोग हुआ है, न कि अपादान कारक का।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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