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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में 'लॉरेंस कोहलवर्ग' (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) और इसकी विभिन्न अवस्थाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कोहलवर्ग के सिद्धांत के 'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (Pre-conventional Level) के अंतर्गत बालक का नैतिक तर्क मुख्य रूप से बाह्य दंड, पुरस्कार और आज्ञापालन पर आधारित होता है, जिसमें 'सापेक्षवादी उन्मुखीकरण' के तहत बच्चा यह समझता है कि जैसे को तैसा या व्यक्तिगत आवश्यकताएँ ही नियम तय करती हैं।
  2. 2. 'पारंपरिक स्तर' (Conventional Level) के भीतर 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की उन्मुखीकरण' (Good Boy-Good Girl Orientation) और 'कानून एवं व्यवस्था उन्मुखीकरण' (Law and Order Orientation) आते हैं, जहाँ व्यक्ति समाज की अपेक्षाओं, सामाजिक मानदंडों और नियमों को बनाए रखने को ही सर्वोच्च नैतिकता मानता है।
  3. 3. 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-conventional Level) में नैतिकता पूरी तरह से बाहरी कानूनों और सामाजिक दबावों से नियंत्रित होती है, और इस स्तर पर पहुँचने वाला व्यक्ति कभी भी व्यक्तिगत विवेक या सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों को कानून से ऊपर नहीं रख सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: कोहलवर्ग के पूर्व-पारंपरिक स्तर (लगभग 4 से 10 वर्ष) में बालक का नैतिक विकास बाहरी परिणामों (दंड और पुरस्कार) से निर्देशित होता है, और इसमें दंड-आज्ञापालन उन्मुखीकरण तथा साधनात्मक सापेक्षवादी उन्मुखीकरण (व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करना) शामिल होते हैं। कथन 2 सही है: पारंपरिक स्तर (लगभग 10 से 13 वर्ष) में सामाजिक नियमों और रिश्तों को बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है; इसमें 'अच्छा लड़का-अच्छा लड़की' (दूसरों को प्रभावित करना) और 'कानून एवं व्यवस्था' (सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना) दोनों उन्मुखीकरण आते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-conventional Level) में नैतिकता बाहरी दबावों से मुक्त होकर 'आंतरिक विवेक' और 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों' पर आधारित होती है, जहाँ व्यक्ति समाज के अन्यायपूर्ण कानूनों के खिलाफ जाकर भी अपने उच्च मानवीय मूल्यों का पालन कर सकता है।
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