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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Moral Development Theory) और इसके 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाले दोनों चरणों (चरण 5 और चरण 6) की प्रमुख विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस स्तर के पाँचवें चरण ('सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' - Social Contract and Individual Rights) में व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसमें विवेकपूर्ण तरीके से बदलाव किया जा सकता है।
- 2. छठे चरण ('सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' - Universal Ethical Principles) में व्यक्ति किसी बाहरी सामाजिक दबाव या कानूनी दंड के भय से नहीं, बल्कि अपने स्वयं के चुने हुए उन अंतरात्मा के सार्वभौमिक सिद्धांतों (जैसे न्याय, मानवाधिकार, और मानव जीवन की गरिमा) के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है, भले ही वे नियम मौजूदा कानूनों के विरुद्ध क्यों न हों।
- 3. कोहलवर्ग के अनुसार नैतिक विकास के इस सर्वोच्च उत्तर-रूढ़िगत स्तर पर अधिकांश किशोर और वयस्क अपने जीवन के व्यावहारिक अनुभवों के कारण स्वतः पहुँच जाते हैं, और इस अवस्था की मुख्य विशेषता यह होती है कि इसमें नैतिक तर्क पूरी तरह से पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और अधिकार बनाए रखने पर केंद्रित हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि कोहलवर्ग के नैतिक विकास के पाँचवें चरण (सामाजिक अनुबंध अभिविन्यास) में व्यक्ति यह समझता है कि कानून लचीले होते हैं और यदि वे मानवाधिकारों या समाज की भलाई के अनुकूल न हों, तो उनमें बदलाव किया जा सकता है। कथन 2 सही है क्योंकि छठे चरण (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) में व्यक्ति अपनी अंतरात्मा के सार्वभौमिक सिद्धांतों, न्याय और मानवाधिकारों के आधार पर निर्णय लेता है, भले ही इसके लिए उसे कानून के विरुद्ध ही क्यों न जाना पड़े। कथन 3 गलत है क्योंकि कोहलवर्ग के अनुसार, समाज के बहुत ही कम वयस्क (कुल जनसंख्या का एक छोटा हिस्सा) अपने नैतिक विकास के इस सर्वोच्च 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' तक पहुँच पाते हैं; अधिकांश लोग पारंपरिक स्तर (Level 2) तक ही सीमित रहते हैं। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
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