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बाल विकास की अवधारणा सभी देखें (644) वृद्धि एवं विकास: अवधारणा और अंतर61 विकास के सिद्धांत (Principles)148 विकास को प्रभावित करने वाले कारक12 वंशानुक्रम एवं वातावरण238 विकास की अवस्थाएँ32 बाल अध्ययन की विधियाँ3 मिश्रित: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र150
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वैयक्तिक भिन्नता एवं समावेशी शिक्षा सभी देखें (712) वैयक्तिक भिन्नताएँ30 समावेशी शिक्षा250 विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)63 अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया आदि)315 ADHD, ऑटिज़्म एवं न्यूरो-विकासात्मक स्थितियाँ22 प्रतिभाशाली एवं सृजनशील बालक9 वंचित, पिछड़े एवं लैंगिक समानता23
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शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
Asked 3 महीने पहले · Viewed 2,186 times
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली, गुरुकुल परंपरा और बौद्धकालीन शिक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वैदिक कालीन शिक्षा में 'प्रवज्या' (Pravrajya) संस्कार बौद्ध मठों में प्रवेश और प्राथमिक शिक्षा के आरंभ का सूचक था, जबकि 'उपनयन' संस्कार वैदिक शिक्षा प्रणाली में ब्रह्मचर्य आश्रम में प्रवेश का प्रतीक था।
  2. 2. नालंदा विश्वविद्यालय के विपरीत, वल्लभी (Vallabhi) विश्वविद्यालय मुख्य रूप से हीनयान (Theravada) बौद्ध संप्रदाय के अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र था, जहाँ धर्म-दर्शन के साथ-साथ अर्थशास्त्र, नीतिशास्त्र और व्यवसायिक शिक्षा भी दी जाती थी।
  3. 3. प्राचीन काल में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल द्वारा की गई थी, जो वज्रयान बौद्ध धर्म और तांत्रिक शिक्षा के साथ-साथ तर्कशास्त्र (Logic) के अध्ययन के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि 'प्रवज्या' संस्कार बौद्ध शिक्षा प्रणाली (मठों में प्रवेश) से संबंधित है, न कि वैदिक शिक्षा से। बौद्ध धर्म में मठवासी जीवन में प्रवेश के लिए 8 वर्ष की आयु में प्रवज्या संस्कार होता था, जबकि वैदिक शिक्षा में 'उपनयन' संस्कार होता था। कथन 2 सही है; वल्लभी विश्वविद्यालय (सौराष्ट्र, गुजरात) मुख्य रूप से हीनयान बौद्ध संप्रदाय का केंद्र था और यहाँ धर्म-दर्शन के अलावा व्यावहारिक विषयों की शिक्षा भी दी जाती थी। कथन 3 सही है; पाल वंश के प्रसिद्ध शासक धर्मपाल द्वारा स्थापित विक्रमशिला विश्वविद्यालय वज्रयान बौद्ध धर्म, तंत्रविद्या और तर्कशास्त्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र था।
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