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जीन पियाजे
Asked 3 महीने पहले · Viewed 2,719 times
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास एक निरंतर (Continuous) प्रक्रिया है जो जैविक परिपक्वता (Biological Maturation) और पर्यावरण के साथ सक्रिय अंतःक्रिया (Active Interaction) के माध्यम से होती है, जिसमें 'आत्मसातीकरण' (Assimilation) और 'समायोजन' (Accommodation) मुख्य संतुलनकारी प्रक्रियाएँ हैं।
  2. 2. 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बच्चों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिसके कारण वे किसी वस्तु के आकार, रूप या रंग में परिवर्तन होने पर भी उसके द्रव्यमान, भार या आयतन के स्थिर रहने की वास्तविकता को आसानी से समझ लेते हैं।
  3. 3. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बच्चे तार्किक रूप से सोचना शुरू कर देते हैं, लेकिन उनका यह तार्किक चिंतन केवल मूर्त (Concrete) या प्रत्यक्ष वस्तुओं और घटनाओं तक ही सीमित होता है, न कि अमूर्त (Abstract) या काल्पनिक प्रस्तावों पर।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि जीन पियाजे के सिद्धांत के अनुसार संज्ञानात्मक विकास जैविक परिपक्वता और पर्यावरण के साथ सक्रिय अंतःक्रिया पर आधारित है, जहाँ आत्मसातीकरण और समायोजन के माध्यम से 'साम्यावस्था' (Equilibration) स्थापित होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में विकसित नहीं होता है, बल्कि यह 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (7 से 11 वर्ष) की एक प्रमुख विशेषता है; पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था के बच्चों में संरक्षण की कमी पाई जाती है (वे केंद्रीयकरण/Centration के शिकार होते हैं)। कथन 3 बिल्कुल सही है क्योंकि मूर्त संक्रियात्मक अवस्था में बच्चे मूर्त वस्तुओं पर आधारित तार्किक संक्रियाएँ करने में सक्षम हो जाते हैं, जबकि अमूर्त और परिकल्पित चिंतन (Hypothetical-deductive reasoning) अगली यानी 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की विशेषता है।
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→ जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'विकेंद्रण या डीसेंट्रेशन' (Decentration)—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु या परिस्थिति के केवल एक ही पहलू, आयाम या विशेषता पर अपना ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण/Centration) के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं या आयामों को एक साथ देखने, समझने और मानसिक रूप से समन्वित करने में सक्षम हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, तार्किक संरक्षण (Conservation) और संज्ञानात्मक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में प्रवेश करने वाले किशोरों में विकसित होने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी विचार' (Combinatorial Thought) की क्षमताओं का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की तात्विक एवं संज्ञानात्मक विशेषताओं को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास की किस अवस्था में बालक 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा समझ जाता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' की आयु अवधि क्या है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पियाजे के अनुसार 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बच्चों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह से विकसित हो जाता है, जिससे वे किसी वस्तु के रूप या आकार में परिवर्तन होने पर भी उसके आयतन, द्रव्यमान और संख्या को अपरिवर्तित समझ सकते हैं। 2. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर वर्गीकृत करने (Classification) तथा 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की क्षमता प्राप्त कर लेता है, जिससे वह किसी समस्या को एक से अधिक दृष्टियों से देख सकता है। 3. 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - 11 वर्ष से आगे) में किशोरों के भीतर 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) और परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning) की क्षमता का पूर्ण विकास हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के दौरान बालक में 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'आरक्षण/पलटावी गुण' (Reversibility) का विकास हो जाता है, जिससे वह किसी वस्तु या समस्या को केवल एक आयाम से देखने के बजाय उसके कई पहलुओं पर एक साथ विचार कर सकता है। 2. पियाजे के अनुसार 'स्किमा' (Schema) ज्ञान के संगठित पैटर्न या मानसिक संरचनाएँ होती हैं, जिनमें नए अनुभवों को शामिल करने की प्रक्रिया को 'समावेशन' (Assimilation) कहा जाता है, जबकि मौजूदा स्कीमा में बदलाव करके नए अनुभव के अनुकूल ढलने की प्रक्रिया को 'समायोजन' (Accommodation) कहा जाता है। 3. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरणों का क्रम संवेदी-गामक अवस्था से शुरू होकर औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था पर समाप्त होता है, और इन चरणों की विकासात्मक अनुक्रमिकता (Developmental Sequence) सार्वभौमिक होती है, जिसे बदला या टाला नहीं जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Theory of Cognitive Development) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पियाजे के अनुसार, पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बच्चों में 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है, जिससे वे यह समझ जाते हैं कि किसी वस्तु के आकार या रूप बदलने पर उसका द्रव्यमान या आयतन अपरिवर्तित रहता है। 2. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक विकेंद्रीकरण (Decentration) की योग्यता अर्जित कर लेता है और वस्तुओं के वर्गीकरण तथा श्रेणीबद्धता (Seriation) जैसे तार्किक संक्रियाओं को भली-भांति समझने लगता है। 3. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage - लगभग 11 वर्ष और उससे आगे) में किशोरों के भीतर अमूर्त चिंतन (Abstract Thinking) और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-deductive reasoning) की क्षमता का पूर्ण विकास होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? → बच्चों के भाषा विकास और संज्ञानात्मक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के अनुसार भाषा और विचार शुरुआत में जीवन के शुरुआती वर्षों में दो स्वतंत्र और अलग स्रोतों से उत्पन्न होते हैं, लेकिन लगभग दो वर्ष की आयु के बाद वे आपस में मिलकर 'मौखिक सोच' (Verbal Thought) का निर्माण करते हैं। 2. जीन पियाजे (Jean Piaget) के अनुसार भाषा का विकास मुख्य रूप से संज्ञानात्मक विकास का परिणाम है और बच्चों में देखा जाने वाला 'अहंकेन्द्रित वाक्' (Egocentric Speech) उनकी संज्ञानात्मक अपरिपक्वता को दर्शाता है, जो आयु बढ़ने के साथ स्वतः लुप्त हो जाता है। 3. नोम चोमस्की (Noam Chomsky) के 'भाषा अर्जन उपकरण' (Language Acquisition Device - LAD) सिद्धांत के अनुसार, बच्चों में भाषा सीखने की क्षमता पूरी तरह से उनके सामाजिक परिवेश और वयस्कों के साथ की गई अनुदेशात्मक अंतःक्रिया पर निर्भर करती है, न कि किसी जन्मजात जैविक संरचना पर। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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