नैतिक एवं चारित्रिक विकास
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बच्चों के सामाजिक और नैतिक विकास के संदर्भ में, जीन पियाजे और लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांतों के बीच निम्नलिखित में से कौन सा मुख्य सैद्धांतिक अंतर सही रूप से रेखांकित करता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे ने बच्चों के नैतिक विकास का अध्ययन करते हुए बताया कि छोटे बच्चे नियमों को अपरिवर्तनीय और ईश्वर प्रदत्त मानते हैं (नैतिक यथार्थवाद - Moral Realism), जो वयस्कों के दबाव के कारण होता है। बाद में वे यह समझते हैं कि नियम आपसी सहयोग और समझौते से बनाए जाते हैं (नैतिक स्वायत्तता - Moral Autonomy)। वहीं, लॉरेंस कोहलबर्ग ने पियाजे के विचारों को आगे बढ़ाते हुए संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) को आधार बनाकर नैतिक तर्क के 3 स्तर और 6 चरण दिए, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि जैसे-जैसे बालक का संज्ञानात्मक स्तर और सामाजिक परिप्रेक्ष्य लेने की क्षमता (Social Perspective-Taking) बढ़ती है, वैसे-वैसे उसकी नैतिक तार्किकता अधिक परिपक्व और सार्वभौमिक होती जाती है। अतः विकल्प (अ) इन दोनों सिद्धांतों के बीच सबसे सटीक और सैद्धांतिक अंतर को दर्शाता है।
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पारंपरिक स्तर…
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बच्चों के नैतिक विकास (Moral Development) के सिद्धांत और…
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'नैतिक विकास के सिद्धांतों' के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के चरण' (Stages of Moral Development) के अंतर्गत तीन मुख्य स्तरों—'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (Pre-conventional Level), 'पारंपरिक स्तर' (Conventional Level), और 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-conventional Level)—के अंतर्गत वर्णित छह अवस्थाओं के न्यूरो-कॉग्निटिव और नैतिक तार्किकता स्वरूप, तथा कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) द्वारा कोहलबर्ग के सिद्धांत की आलोचना करते हुए प्रतिपादित 'देखभाल का नैतिकता सिद्धांत' (Ethics of Care) के अंतर्गत नारीवादी परिप्रेक्ष्य में 'स्वयं की देखभाल', 'दूसरों के प्रति जिम्मेदारी' और 'नैतिक तार्किकता के अंतर्संबंधों' के वैज्ञानिक स्वरूप के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके समावेशी कक्षा-कक्ष मूल्य शिक्षा में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत और लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्संबंधों तथा उनकी अवस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पियाजे के अनुसार 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage) में बालक के भीतर 'संरक्षण' (Conservation) और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) का पूर्ण विकास हो जाता है, जो कोहलबर्ग के नैतिक विकास के 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-conventional Morality) को समझने के लिए अनिवार्य है।
2. कोहलबर्ग के नैतिक विकास के 'रूढ़िगत स्तर' (Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाला 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की अभिविन्यास' (Good Boy-Good Girl Orientation) इस बात पर केंद्रित है कि व्यक्ति सामाजिक अनुमोदन, प्रशंसा और दूसरों की नजरों में अच्छा बनने के लिए नैतिक निर्णय लेता है।
3. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास में 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) अमूर्त चिंतन और तार्किक परिकल्पनाओं के निर्माण की क्षमता प्रदान करती है, जो कोहलबर्ग के सिद्धांत के सार्वभौमिक नैतिक विवेक अभिविन्यास (Universal Ethical Principle Orientation) के विकास के लिए एक आवश्यक संज्ञानात्मक पृष्ठभूमि तैयार करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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'विकास के आयाम और उनके अंतर्संबंध' के संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के अंतर्गत 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप और मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) तथा 'पैरिटल लोब' की अमूर्त तर्कणा और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक चिंतन की सक्रियण प्रक्रिया, तथा लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के सिद्धांत' के अंतर्गत 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान के उच्च-स्तरीय उपागम और विद्यार्थियों में तार्किक स्वायत्तता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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बच्चों में नैतिक विकास (Moral Development) के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के सिद्धांत की विभिन्न अवस्थाओं और स्तरों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोहलबर्ग के 'पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाले चौथे चरण (चरण 4 - कानून और व्यवस्था अभिविन्यास) में व्यक्ति का नैतिक तर्क सामाजिक नियमों, कानून के पालन और समाज में व्यवस्था बनाए रखने के कर्तव्य पर आधारित होता है।
2. 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Post-conventional Morality Level) के छठे चरण (चरण 6 - सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) में व्यक्ति बाहरी नियमों या कानूनों से परे, अपने स्वयं के अंतःकरण (Conscience) और सार्वभौमिक न्याय, मानवाधिकारों और समानता के आंतरिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है।
3. कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास के सभी स्तर और चरण एक निश्चित और सार्वभौमिक क्रम में आगे बढ़ते हैं, और कोई भी व्यक्ति किसी पूर्ववर्ती चरण को छोड़े बिना क्रमबद्ध रूप से ही आगे की अवस्थाओं में विकसित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-Conventional Level) के अंतर्गत आने वाले 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण की सबसे सटीक विश्लेषणात्मक विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के संदर्भ में, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण की सबसे सटीक और विश्लेषणात्मक विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली तथा बौद्ध और वैदिक कालीन शिक्षण संस्थाओं के तुलनात्मक अध्ययन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली में उच्च शिक्षा का केंद्र 'विहार' और 'संघ' होते थे, जहाँ शिक्षा प्राप्त करने वाले भिक्षुओं को 'सामणेर' कहा जाता था, तथा नालंदा, वल्लभी और विक्रमशिला जैसे महाविहार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के प्रसिद्ध केंद्र थे जहाँ प्रवेश के लिए कठोर द्वार-पंडित (Gatekeeper Scholars) मौखिक परीक्षा लेते थे।
2. वैदिक कालीन शिक्षा प्रणाली में गुरुकुल आधारित शिक्षा में 'ब्रह्मचर्य आश्रम' का पालन करना अनिवार्य था, और यहाँ छात्रों के चरित्र निर्माण, आत्म-संयम तथा आध्यात्मिक चेतना के विकास पर बल दिया जाता था, जहाँ शिक्षा का माध्यम संस्कृत भाषा थी।
3. मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली में प्राथमिक शिक्षा के लिए 'मक्तब' (Maktab) और उच्च शिक्षा के लिए 'मदरसा' (Madarsa) की व्यवस्था थी, तथा मक्तब में कुरान की आयतों को कंठस्थ कराने और लिखने की प्रारंभिक शिक्षा दी जाती थी, लेकिन इसमें किसी भी प्रकार की धर्मनिरपेक्ष या व्यावहारिक शिक्षा का पूर्ण अभाव था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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