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जीन पियाजे
Asked 3 महीने पहले · Viewed 1,511 times
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत और लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्संबंधों तथा उनकी अवस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पियाजे के अनुसार 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage) में बालक के भीतर 'संरक्षण' (Conservation) और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) का पूर्ण विकास हो जाता है, जो कोहलबर्ग के नैतिक विकास के 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-conventional Morality) को समझने के लिए अनिवार्य है।
  2. 2. कोहलबर्ग के नैतिक विकास के 'रूढ़िगत स्तर' (Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाला 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की अभिविन्यास' (Good Boy-Good Girl Orientation) इस बात पर केंद्रित है कि व्यक्ति सामाजिक अनुमोदन, प्रशंसा और दूसरों की नजरों में अच्छा बनने के लिए नैतिक निर्णय लेता है।
  3. 3. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास में 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) अमूर्त चिंतन और तार्किक परिकल्पनाओं के निर्माण की क्षमता प्रदान करती है, जो कोहलबर्ग के सिद्धांत के सार्वभौमिक नैतिक विवेक अभिविन्यास (Universal Ethical Principle Orientation) के विकास के लिए एक आवश्यक संज्ञानात्मक पृष्ठभूमि तैयार करती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 'संरक्षण' (Conservation) और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) का विकास पियाजे की 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) में होता है, न कि पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में बालक में इन गुणों का अभाव होता है (इसे 'अनुत्क्रमणीयता' या Irreversibility कहा जाता है)।
कथन 2 सत्य है, क्योंकि कोहलबर्ग के पारंपरिक या रूढ़िगत स्तर (Conventional Level, जो लगभग 10 से 13 वर्ष की आयु का होता है) के अंतर्गत 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की अभिविन्यास' (Stage 3) आता है, जहाँ किशोर समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और दूसरों से अनुमोदन या प्रशंसा प्राप्त करने के लिए नैतिकता का पालन करता है।
कथन 3 सत्य है, क्योंकि पियाजे की औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (11 वर्ष से आगे) में अमूर्त चिंतन, परिकल्पनात्मक तर्क और उच्च-स्तरीय बौद्धिक क्षमता विकसित होती है, जो कोहलबर्ग के उत्तर-रूढ़िगत स्तर के अंतिम चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक विवेक अभिविन्यास' (Stage 6) को समझने के लिए आवश्यक संज्ञानात्मक आधार प्रदान करती है।

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→ 'नैतिक विकास और संज्ञानात्मक निर्णय के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलवर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के चरण' (Stages of Moral Development) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Ventromedial Prefrontal Cortex - vmPFC), 'एंटीरियर इंसुला' (Anterior Insula) और 'एपिडर्मल लिम्बिक सिस्टम' के बीच नैतिक दुविधाओं (Moral Dilemmas), सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंडों और भावनात्मक सहानुभूति के प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक यथार्थवाद बनाम नैतिक स्वायत्तता' (Moral Realism vs. Moral Autonomy) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, मूल्य-आधारित शिक्षा और विद्यार्थियों में न्याय, परोपकार व तार्किक निर्णय क्षमता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? → बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के अंतर्गत 'लॉरेंस कोहलबर्ग' (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनके स्तरों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कोहलबर्ग के सिद्धांत के 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता' (Pre-conventional Morality) स्तर के अंतर्गत आने वाली पहली अवस्था 'ज्ञानेन्द्रिय-प्रेरक अवस्था' (Sensory-Motor Stage) कहलाती है, जिसमें बालक दूसरों के तर्कों को सुने बिना केवल अपनी शारीरिक इच्छाओं के अनुसार नैतिक निर्णय लेता है। 2. 'पारंपरिक नैतिकता' (Conventional Morality) स्तर के अंतर्गत 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की' (Good Boy-Good Girl) अभिविन्यास और 'कानून एवं व्यवस्था' (Law and Order) अभिविन्यास शामिल हैं, जहाँ व्यक्ति सामाजिक नियमों, अधिकार और समाज की स्वीकृत परंपराओं को बनाए रखने को ही सर्वोच्च नैतिकता मानता है। 3. 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) स्तर की अंतिम अवस्था 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःचेतना अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) है, जिसमें व्यक्ति व्यक्तिगत विवेक और आंतरिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है, भले ही वे नियम या कानून समाज के मौजूदा प्रावधानों या कानूनों के विरुद्ध क्यों न हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → 'विकास के आयाम और उनके अंतर्संबंध' के संदर्भ में, जीन पियाजे (Jean Piaget) द्वारा प्रतिपादित 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' के अंतर्गत 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप और मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex) तथा 'पैरिटल लोब' की अमूर्त तर्कणा और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक चिंतन की सक्रियण प्रक्रिया, तथा लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के सिद्धांत' के अंतर्गत 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता स्तर' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान के उच्च-स्तरीय उपागम और विद्यार्थियों में तार्किक स्वायत्तता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? → बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों और उनकी मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) लगभग 7 से 11 वर्ष की आयु तक होती है, जिसमें बच्चा संरक्षण (Conservation), वर्गीकरण (Classification) और उत्क्रमणीयता (Reversibility) जैसी मानसिक योग्यताओं को भली-भांति सीख जाता है। 2. लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Conventional Morality Level) के दूसरे चरण में व्यक्ति 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) के नैतिकता के सिद्धांतों पर कार्य करता है। 3. लेव वायगोत्สกী (Lev Vygotsky) के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत में 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) उस अंतर को दर्शाता है जो एक बच्चे द्वारा स्वतंत्र रूप से किए जाने वाले कार्य और किसी वयस्क या अधिक ज्ञानी अन्य (MKO) के मार्गदर्शन में किए जाने वाले कार्य के बीच होता है। 4. सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत में 'ईगो' (Ego) पूर्णतः आनंद के सिद्धांत (Pleasure Principle) पर कार्य करता है, जबकि 'इड' (Id) वास्तविकता के सिद्धांत (Reality Principle) का प्रतिनिधित्व करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, जब एक बच्चा अपनी मौजूदा स्कीमा में जानकारी को फिट करने के लिए उसमें संशोधन करता है या नए अनुभवों के आधार पर नए मानसिक ढांचे का निर्माण करता है, तो इस प्रक्रिया को क्या कहा जाता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की सबसे महत्वपूर्ण और विशिष्ट मनोवैज्ञानिक विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) के दौरान बालक में 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'आरक्षण/पलटावी गुण' (Reversibility) का विकास हो जाता है, जिससे वह किसी वस्तु या समस्या को केवल एक आयाम से देखने के बजाय उसके कई पहलुओं पर एक साथ विचार कर सकता है। 2. पियाजे के अनुसार 'स्किमा' (Schema) ज्ञान के संगठित पैटर्न या मानसिक संरचनाएँ होती हैं, जिनमें नए अनुभवों को शामिल करने की प्रक्रिया को 'समावेशन' (Assimilation) कहा जाता है, जबकि मौजूदा स्कीमा में बदलाव करके नए अनुभव के अनुकूल ढलने की प्रक्रिया को 'समायोजन' (Accommodation) कहा जाता है। 3. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के चरणों का क्रम संवेदी-गामक अवस्था से शुरू होकर औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था पर समाप्त होता है, और इन चरणों की विकासात्मक अनुक्रमिकता (Developmental Sequence) सार्वभौमिक होती है, जिसे बदला या टाला नहीं जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पियाजे के अनुसार 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) के दौरान बच्चों में 'संरक्षण' (Conservation) का गुण पूरी तरह से विकसित हो जाता है, जिससे वे किसी वस्तु के रूप या आकार में परिवर्तन होने पर भी उसके आयतन, द्रव्यमान और संख्या को अपरिवर्तित समझ सकते हैं। 2. 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage - लगभग 7 से 11 वर्ष) में बालक वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर वर्गीकृत करने (Classification) तथा 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की क्षमता प्राप्त कर लेता है, जिससे वह किसी समस्या को एक से अधिक दृष्टियों से देख सकता है। 3. 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - 11 वर्ष से आगे) में किशोरों के भीतर 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) और परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क (Hypothetico-Deductive Reasoning) की क्षमता का पूर्ण विकास हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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