विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)
Asked 3 महीने पहले · Viewed 18 times
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) और बाल-केन्द्रित शिक्षा प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य सामान्य विद्यालयों में सभी बालकों, चाहे उनकी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या आर्थिक क्षमताएँ कैसी भी हों, को एक साथ बिना किसी भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।
- 2. भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) अधिनियम के अनुसार, विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) की शिक्षा के लिए केवल पृथक्करण (Segregation) की नीति ही सबसे प्रभावी और एकमात्र वैज्ञानिक उपाय है।
- 3. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) यह मानती है कि शिक्षण विधियों और मूल्यांकन प्रणालियों को लचीला होना चाहिए ताकि वे प्रत्येक शिक्षार्थी की व्यक्तिगत विविधताओं और सीखने की गति के अनुकूल बन सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि समावेशी शिक्षा का मूल आधार सामान्य विद्यालयों में सभी बच्चों को एक साथ बिना किसी भेदभाव के समान अवसर देना है। कथन 2 गलत है क्योंकि समावेशी शिक्षा 'पृथक्करण' (Segregation) का क,रड़ा विरोध करती है और 'एकीकरण व समावेशन' (Mainstreaming & Inclusion) पर जोर देती है; विशेष आवश्यकता वाले बालकों को सामान्य बालकों से अलग रखना समावेशी दृष्टिकोण के विरुद्ध है। कथन 3 सही है, NCF-2005 के अनुसार शिक्षा प्रणाली और मूल्यांकन को लचीला होना चाहिए ताकि प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे' (Children with Special Needs) के शिक्षण में 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) और 'राष्ट्रीय विकलांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPWD Act, 2016) के वैधानिक तथा शैक्षणिक प्रावधानों का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय दृश्य, श्रवण, और बौद्धिक रूप से बाधित बालकों को मुख्यधारा की कक्षाओं में समान अवसर प्रदान करने के लिए पाठ्यचर्या, मूल्यांकन विधियों और भौतिक परिवेश में आवश्यक अनुकूलन (Accommodations and Modifications) करता है, तो इस प्रक्रिया के वैज्ञानिक और विधिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के संकलित प्रावधानों और दार्शनिक संस्तुतियों का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय बाल-केंद्रित शिक्षा प्रणाली को अपनाते हुए ज्ञान के निर्माण में बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करता है, रटने की प्रवृत्ति (Rote Learning) का पूर्णतः निषेध करता है, तथा प्रारंभिक शिक्षा के स्तर पर किसी भी प्रकार की प्रवेश परीक्षा या साक्षात्कार को प्रतिबंधित करते हुए गुणवत्तापूर्ण समावेशी शिक्षा का प्रावधान करता है, तो इन दोनों वैधानिक एवं शैक्षणिक दस्तावेजों के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में 'विभेदीकृत अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा का मुख्य उद्देश्य सामान्य और विशेष आवश्यकता वाले बालकों की विविध अधिगम शैलियों को समायोजित करना है। इस संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सी कक्षा-कक्षीय रणनीति 'विभेदीकृत अनुदेशन' के मूल सिद्धांतों के सबसे अधिक अनुकूल है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों' (Children with Special Needs) के प्रभावी शिक्षण हेतु 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा का गहन विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा उपागम इस शिक्षण पद्धति के वास्तविक तात्विक और व्यावहारिक स्वरूप को सर्वाधिक सटीक रूप से रेखांकित करता है?
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बिहार सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में चलाई जा रही प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' के तहत बालिकाओं के जन्म से लेकर स्नातक की डिग्री प्राप्त करने तक कुल विभिन्न चरणों में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने पर अविवाहित लड़कियों को ₹25,000 और स्नातक उत्तीर्ण करने पर सभी लड़कियों को ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
2. 'मुख्यमंत्री बाल बालिका साइकिल योजना' और 'पोशाक योजना' के माध्यम से विद्यालयों में छात्राओं के नामांकन और ठहराव (Retention) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसे बाद में लड़कों के लिए भी विस्तारित कर दिया गया।
3. राज्य के सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए 'जननी सुरक्षा योजना' के साथ-साथ 'मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना' को एकीकृत रूप से प्रभावी बनाया गया है, जिसके तहत प्रसव के पश्चात तत्काल नकद प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
4. 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट योजना' के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को ₹4 लाख तक का शिक्षा ऋण 4% साधारण ब्याज पर उपलब्ध कराया जाता है, जबकि महिलाओं, दिव्यांगजन और ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए यह ब्याज दर मात्र 1% होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में चलाई जा रही प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' के तहत बालिकाओं के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने तक कुल 50,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता विभिन्न चरणों में प्रदान की जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या रोकना और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना है।
2. 'सात निश्चय पार्ट-2' (2020-2025) के अंतर्गत 'युवक सशक्तिकरण' और 'महिला सशक्तिकरण' को प्राथमिकता देते हुए 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के तहत उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण 4% साधारण ब्याज पर, जबकि महिलाओं, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडरों के लिए यह ब्याज दर मात्र 1% है।
3. राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 'मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना' के तहत सभी सरकारी अस्पतालों को डिजिटाइज्ड करने और मरीजों का इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करने का प्रावधान किया गया है।
4. 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के अंतर्गत मिलने वाले ऋण का पुनर्भुगतान नौकरी मिलने के तुरंत बाद अनिवार्य रूप से शुरू हो जाता है, भले ही छात्र की मासिक आय निर्धारित सीमा से कम क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विभेदित अनुदेशन एक ऐसा अध्यागम दृष्टिकोण है जहाँ शिक्षक विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं (जैसे उनकी अधिगम शैली, तत्परता स्तर और रुचियों) को ध्यान में रखते हुए शिक्षण सामग्री, प्रक्रियाओं और उत्पादों में लचीलापन अपनाता है।
2. यह दृष्टिकोण केवल विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) के लिए अनुकूलित है और सामान्य कक्षाओं में प्रतिभाशाली या औसत बालकों के शिक्षण परिणामों पर इसका कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
3. विभेदित अनुदेशन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक छात्र को उसकी क्षमता के अनुरूप अधिकतम प्रगति करने के अवसर प्रदान करना और सहयोगात्मक अधिगम वातावरण का निर्माण करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के लिए 'सार्वभौमिक डिजाइन' (Universal Design for Learning - UDL) के सिद्धांतों और उसके अनुप्रयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग (UDL) एक ऐसा पाठ्यक्रम ढांचा है जो अधिगम की बाधाओं को कम करने और सभी विद्यार्थियों को समान रूप से सीखने के अवसर प्रदान करने के लिए तीन मुख्य सिद्धांतों—अभिप्रेरणा के बहुविध साधन, प्रस्तुति के बहुविध साधन, और अभिव्यक्ति के बहुविध साधन—पर आधारित है।
2. UDL का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल शारीरिक रूप से अक्षम बालकों को ही विशेष शिक्षण सामग्रियाँ मिल सकें, जबकि सामान्य बालकों के लिए पारंपरिक पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षण प्रणाली ही सर्वोत्तम और एकमात्र विकल्प बनी रहे।
3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और निःशक्तजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act, 2016) दोनों ही इस बात पर बल देते हैं कि कक्षा का भौतिक और शैक्षणिक वातावरण ऐसा होना चाहिए जो बिना किसी अनुकूलन के केवल प्रतिभाशाली बालकों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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