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उत्तर प्रदेश की बोलियों, उपभाषाओं और हिंदी साहित्य के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्रों में बोली जाने वाली 'ब्रजभाषा' का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बोली जाने वाली 'अवधी' और 'भोजपुरी' में से अवधी का विकास अर्धमागधी अपभ्रंश से तथा भोजपुरी का विकास मागधी अपभ्रंश से माना जाता है।
  2. 2. 'खड़ी बोली' (कौरवी) का उद्गम भी शौरसेनी अपभ्रंश के उत्तरी रूप से हुआ है, और आधुनिक हिंदी गद्य के विकास में भारतेंदु युग से पूर्व खड़ी बोली में गद्य लेखन का सूत्रपात करने वाले रचनाकारों में लल्लू लाल और सदल मिश्र का नाम प्रमुख है।
  3. 3. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बोली जाने वाली 'बुंदेली' और बघेलखंड क्षेत्र में बोली जाने वाली 'बघेली' दोनों ही बोलियाँ बिहारी उपभाषा वर्ग के अंतर्गत आती हैं, जिन्हें ग्रियर्सन के भाषाI सर्वे में पूर्वी हिंदी की शाखा माना गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि ब्रजभाषा और खड़ी बोली का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है, अवधी का विकास अर्धमागधी से तथा भोजपुरी का विकास मागधी अपभ्रंश से हुआ है। कथन 2 सही है क्योंकि आधुनिक हिंदी गद्य के प्रारंभिक निर्माताओं में फोर्ट विलियम कॉलेज से जुड़े लल्लू लाल (प्रेमसागर) और सदल मिश्र (चंद्रावली / नासिकेतोपाख्यान) का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। कथन 3 गलत है क्योंकि 'बुंदेली' और 'बघेली' दोनों बोलियाँ बिहारी उपभाषा वर्ग के अंतर्गत नहीं आती हैं, बल्कि बघेली अर्धमागधी अपभ्रंश से निकली पूर्वी हिंदी की बोली है और बुंदेली शौरसेनी अपभ्रंश से निकली पश्चिमी हिंदी की बोली है।
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