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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 359' के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) के दौरान मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के निलंबन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के दौरान आदेश द्वारा भाग III द्वाराप्रदत्त किसी भी मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन के लिए उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालयों में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है।
  2. 2. अनुच्छेद 359 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया ऐसा कोई भी आदेश संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक सीमित हो सकता है, तथा इस आदेश को संसद के दोनों सदनों के समक्ष अनुमोदन के लिए रखना अनिवार्य होता है।
  3. 3. वर्ष 1978 के 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) के प्रवर्तन को निलंबित नहीं किया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 359 के अनुसार, राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के समय राष्ट्रपति आदेश जारी करके भाग III द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के न्यायालयों द्वारा प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है। 44वें संशोधन के बाद इसमें अनुच्छेद 20 और 21 को छूट दी गई है। कथन 2 असत्य है: अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी आदेश को संसद के दोनों सदनों के समक्ष अनुमोदन के लिए रखना अनिवार्य नहीं है (जबकि अनुच्छेद 352 के तहत उद्घोषणा को रखना आवश्यक होता है)। इसके अलावा, यह आदेश पूरे देश या उसके किसी हिस्से तक हो सकता है। कथन 3 सही है: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम (1978) द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि अनुच्छेद 20 और 21 के अंतर्गत मिलने वाले संरक्षण आपातकाल के दौरान भी निलंबित नहीं किए जा सकते हैं, ताकि नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा की जा सके।
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