शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से पूर्व स्थापित 'कांग्रेस की पूर्ववर्ती संस्थाएँ' (Predecessor Organizations of Congress) और उनके संस्थापकों/नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'लैंडहोल्डर सोसाइटी' (Landholders' Society) की स्थापना वर्ष 1838 में कलकत्ता में द्वारकानाथ टैगोर द्वारा की गई थी, जिसे भारत में जमींदारों और भूमिपतियों के हितों की रक्षा करने वाली पहली राजनीतिक संस्था माना जाता है।
- 2. 'ईस्ट इंडिया एसोसिएशन' की स्थापना वर्ष 1866 में लंदन में दादाभाई नौरोजी द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश जनता और संसद को भारत की वास्तविक समस्याओं से अवगत कराना था।
- 3. 'इंडियन लीग' की स्थापना वर्ष 1875 में शिशिर कुमार घोष द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य लोगों में राष्ट्रवाद की भावना जगाना और राजनीतिक शिक्षा को बढ़ावा देना था।
- 4. 'मद्रास महाजन सभा' की स्थापना वर्ष 1884 में सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस द्वारा की गई थी, जो दक्षिण भारत की एक प्रमुख राजनीतिक संस्था थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। 'लैंडहोल्डर सोसाइटी' (1838) द्वारकानाथ टैगोर द्वारा स्थापित पहली राजनीतिक संस्था थी। 'ईस्ट इंडिया एसोसिएशन' (1866) की स्थापना लंदन में दादाभाई नौरोजी ने की थी। 'इंडियन लीग' (1875) की स्थापना शिशिर कुमार घोष ने की थी। किंतु कथन 4 असत्य है क्योंकि 'मद्रास महाजन सभा' की स्थापना वर्ष 1884 में जी. सुब्रह्मण्य अय्यर, पी. आनंदर्लू और एम. वीरराघवाचार्य द्वारा की गई थी, जबकि सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस ने वर्ष 1876 में 'इंडियन एसोसिएशन' (भारतीय संघ) की स्थापना कलकत्ता में की थी। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के आधुनिक इतिहास खंड के लिए यह टॉपिक बेहद महत्वपूर्ण है।
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों तथा…
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बिहार में 1974 के छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी) की संपूर्ण क्रांति से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस आंदोलन की शुरुआत मार्च 1974 में बिहार के छात्रों द्वारा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्यान्न संकट और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के विरोध में की गई थी, जिसका नेतृत्व बाद में जयप्रकाश नारायण ने स्वीकार किया था।
2. जयप्रकाश नारायण ने गांधी मैदान, पटना में ऐतिहासिक भाषण के दौरान 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का आह्वान किया था, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और नैतिक परिवर्तन के कुल सात आयाम शामिल थे।
3. जेपी आंदोलन के दौरान ही जनता पार्टी की सरकार केंद्र में सत्ता में आई थी, और इस आंदोलन को भारतीय राजनीति में गैर-कांग्रेसवाद (Non-Congressism) की राजनीति का सबसे बड़ा और सफल प्रयोग माना जाता है, जिसने आपातकाल की पृष्ठभूमि तैयार की थी।
4. संपूर्ण क्रांति के कार्यक्रम के तहत बिहार विधानसभा के भंग करने की मांग को लेकर चलाए गए अभियान में छात्रों ने विधायकों और सांसदों से अपने त्यागपत्र देने की मांग की थी, और इस आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान में प्रदत्त 'मूल अधिकार', 'राज्य के नीतिनिदेशक तत्व (DPSP)' तथा 'मूल कर्त्तव्य' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से प्रेरित हैं और ये मुख्य रूप से राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करते हैं, जो कि न्यायोचित (Justiciable) प्रकृति के हैं, जबकि नीतिनिदेशक तत्व आयरिश संविधान से लिए गए हैं और ये सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र को बढ़ावा देते हैं तथा गैर-न्यायोज्य हैं।
2. स्वर्ण सिंह समिति (1976) की सिफारिशों पर 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए मूल कर्तव्यों की संख्या मूल रूप से 10 थी, जिसे बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से बढ़ाकर 11 कर दिया गया, जिसमें 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करना शामिल है।
3. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और संसद को अनुच्छेद 33 के तहत सशस्त्र बलों, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने या उन्हें प्रतिबंधित करने की विशेष शक्ति दी गई है।
4. नीतिनिदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता), अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतों का संगठन) और अनुच्छेद 48 (कृषि और पशुपालन का संगठन) केवल समाजवादी विचारधारा पर आधारित निर्देशक तत्व हैं, जिनका गांधीवादी दर्शन से कोई संबंध नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक सुधार आंदोलनों तथा उनके संस्थापकों के वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और ब्रह्म समाज ने पश्चिमी उदारवाद और तर्कवाद को अपनाते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, जाति व्यवस्था और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का कड़ा विरोध किया, तथा वेदों की अचूकता में पूर्ण विश्वास व्यक्त किया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' (1875) ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और प्राचीन वैदिक संस्कृति की श्रेष्ठता स्थापित करने का प्रयास किया, किंतु उन्होंने पाखंड खंडनी पताका फहराते हुए पौराणिक हिंदू धर्म के कर्मकांडों, मूर्तिपूजा और जन्मना जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया।
3. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों (निम्न जातियों) को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा उन्हें शिक्षा के माध्यम से सामाजिक न्याय दिलाना था, और इसी वैचारिक पृष्ठभूमि पर उन्होंने 'गुलामगिरी' पुस्तक की रचना की।
4. ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने विधवा पुनर्विवाह के पक्ष में प्राचीन ग्रंथों से प्रमाण प्रस्तुत करके अथक प्रयास किए, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1856 का 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया, जिसे लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में कानूनी मान्यता मिली।
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बिहार में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक अधिवेशनों और स्वतंत्रता संग्राम में यहाँ के नेतृत्वकर्ताओं के योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1912 में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 27वें बांकीपुर (पटना) अधिवेशन के स्वागत समिति के अध्यक्ष मजहरुल हक थे, जबकि इस अधिवेशन की अध्यक्षता आर. एन. मध्ोलकर द्वारा की गई थी।
2. चंपारण सत्याग्रह (1917) की सफलता के बाद महात्मा गांधी को 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित करने वाले प्रमुख व्यक्तियों में बिहार के स्थानीय नेता ब्रजकिशोर प्रसाद और राजकुमार शुक्ल शामिल थे।
3. असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रसार के लिए पटना में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई थी, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपनी सेवाएँ दी थीं।
4. वर्ष 1928 में साइमन कमीशन के पटना आगमन के दौरान विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में अनुग्रह नारायण सिंह, अली इमाम और सचिंद्रनाथ सान्याल प्रमुख रूप से शामिल थे।
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
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इनमें से किसने अपनी रिपोर्ट में 'शिक्षा के चार स्तंभों' की बात की है?
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