शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
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भारतीय संविधान में प्रदत्त 'मूल अधिकार', 'राज्य के नीतिनिदेशक तत्व (DPSP)' तथा 'मूल कर्त्तव्य' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से प्रेरित हैं और ये मुख्य रूप से राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करते हैं, जो कि न्यायोचित (Justiciable) प्रकृति के हैं, जबकि नीतिनिदेशक तत्व आयरिश संविधान से लिए गए हैं और ये सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र को बढ़ावा देते हैं तथा गैर-न्यायोज्य हैं।
- 2. स्वर्ण सिंह समिति (1976) की सिफारिशों पर 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए मूल कर्तव्यों की संख्या मूल रूप से 10 थी, जिसे बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से बढ़ाकर 11 कर दिया गया, जिसमें 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करना शामिल है।
- 3. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और संसद को अनुच्छेद 33 के तहत सशस्त्र बलों, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने या उन्हें प्रतिबंधित करने की विशेष शक्ति दी गई है।
- 4. नीतिनिदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता), अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतों का संगठन) और अनुच्छेद 48 (कृषि और पशुपालन का संगठन) केवल समाजवादी विचारधारा पर आधारित निर्देशक तत्व हैं, जिनका गांधीवादी दर्शन से कोई संबंध नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के विश्लेषण के अनुसार, कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका से लिए गए हैं और न्यायोचित हैं, जबकि DPSP आयरिश संविधान से प्रेरित हैं और गैर-न्यायोज्य हैं। 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा 10 मूल कर्तव्य जोड़े गए थे और 86वें संशोधन 2002 द्वारा 11वां कर्तव्य जोड़ा गया। अनुच्छेद 33 संसद को सशस्त्र बलों के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित करने का अधिकार देता है। वहीं, कथन 4 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायत) और अनुच्छेद 48 (गोहत्या निषेध) गांधीवादी विचारधारा पर आधारित हैं, न कि केवल समाजवादी विचारधारा पर। अधिक तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में प्रारंभ किए गए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ…
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बिहार में 1974 के छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी)…
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व्यक्तित्व (Personality) के शील गुण (Trait) उपागम के संदर्भ में, गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) द्वारा वर्गीकृत शील गुणों के तीन स्तरों — कार्डिनल शील गुण (Cardinal Traits), केंद्रीय शील गुण (Central Traits), और द्वितीयक शील गुण (Secondary Traits) — के बीच निम्नलिखित में से कौन सा अंतर उनके मनोवैज्ञानिक प्रभाव और व्यापकता का सबसे सटीक विश्लेषण प्रस्तुत करता है?
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गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) के शील गुण (Trait) सिद्धांत के संदर्भ में, व्यक्तित्व के निर्धारण में 'प्रमुख शील गुण' (Cardinal Traits), 'केंद्रीय शील गुण' (Central Traits), और 'गौण शील गुण' (Secondary Traits) के बीच निम्नलिखित में से कौन सा विश्लेषणात्मक वर्गीकरण और अंतर सबसे अधिक सटीक है?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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गॉर्डन ऑलपोर्ट (Gordon Allport) द्वारा प्रतिपादित शील गुण (Trait) सिद्धांत के संदर्भ में, व्यक्तित्व के शील गुणों को उन्होंने किन तीन श्रेणियों—कार्डिनल (Cardinal), सेंट्रल (Central), और सेकेंडरी (Secondary)—में वर्गीकृत किया है? इनमें से 'कार्डिनल शील गुण' की सबसे मुख्य विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है?
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बंगाल विभाजन (1905) और इसके परिणामस्वरूप शुरू किए गए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन का निर्णय लॉर्ड कर्ज़न द्वारा 20 जुलाई 1905 को घोषित किया गया था, और इसका मुख्य उद्देश्य तत्कालीन बंगाल के बढ़ते हुए राष्ट्रीय प्रभाव को कमजोर करना तथा संप्रदाय के आधार पर बंगाल को विभाजित करना था।
2. 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित एक ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई और 'बॉयकॉट' (बहिष्कार) प्रस्ताव पारित किया गया।
3. बंगाल विभाजन के प्रभावी होने की तिथि (16 अक्टूबर 1905) को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, नंगे पाँव जुलूस निकाले और रविंद्रनाथ टैगोर के आह्वान पर एक-दूसरे की कलाई पर 'रक्षा बंधन' बांधकर एकता का प्रदर्शन किया।
4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा की दिशा में कदम उठाते हुए कलकत्ता में 'नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन' की स्थापना की गई, और अश्विनी कुमार दत्त ने बंगाल के दक्षिणी जिलों में स्वदेशी आंदोलन को लोकप्रिय बनाने के लिए 'स्वावलंबन समिति' की स्थापना की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के इतिहास में 'जयप्रकाश नारायण (जेपी आंदोलन)' और 'छात्र आंदोलन' (1974) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1974 में पटना विश्वविद्यालय के छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुए इस छात्र आंदोलन की मुख्य मांगें बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्यान्न संकट और शैक्षणिक सुधार थीं, जो बाद में एक व्यापक राजनीतिक और सामाजिक क्रांति में परिवर्तित हो गई।
2. जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का आह्वान किया था, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, वैचारिक और नैतिक परिवर्तन के कुल सात आयाम शामिल थे।
3. पटना के गांधी मैदान में 5 जून 1974 को आयोजित ऐतिहासिक रैली में जयप्रकाश नारायण ने 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है' का नारा देते हुए इंदिरा गांधी सरकार के विरुद्ध देशव्यापी सत्याग्रह और संपूर्ण क्रांति का संकल्प दिलाया था।
4. जेपी आंदोलन के दौरान ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में आंतरिक आपातकाल (Emergency) की घोषणा की गई थी, जिसके तहत जयप्रकाश नारायण सहित देश के सभी प्रमुख विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था, और बिहार इस आंदोलन का मुख्य केंद्र बिंदु बना था।
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों तथा उनके संस्थापकों/नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का खंडन करते हुए उपनिषदों के अद्वैतवादी दर्शन पर आधारित एकेश्वरवाद की स्थापना करना था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया था, तथा उन्होंने पाखंड खंडिनी पताका फहराते हुए हिंदू समाज को शुद्ध करने के लिए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की थी, ताकि धर्मांतरित हिंदुओं को पुनः हिंदू धर्म में वापस लाया जा सके।
3. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य निचली जातियों (शूद्रों और अतिशूद्रों) को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा उन्हें सामाजिक न्याय दिलाना था।
4. आत्माराम पांडुरंग द्वारा वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने मुख्य रूप से अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह, स्त्री शिक्षा और दलितोद्धार जैसे सामाजिक सुधारों पर विशेष बल दिया, तथा इसने रूढ़िवादी हिंदू धर्म से पूर्णतः अलग होने का कभी प्रयास नहीं किया।
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से पूर्व स्थापित 'कांग्रेस की पूर्ववर्ती संस्थाएँ' (Predecessor Organizations of Congress) और उनके संस्थापकों/नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'लैंडहोल्डर सोसाइटी' (Landholders' Society) की स्थापना वर्ष 1838 में कलकत्ता में द्वारकानाथ टैगोर द्वारा की गई थी, जिसे भारत में जमींदारों और भूमिपतियों के हितों की रक्षा करने वाली पहली राजनीतिक संस्था माना जाता है।
2. 'ईस्ट इंडिया एसोसिएशन' की स्थापना वर्ष 1866 में लंदन में दादाभाई नौरोजी द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश जनता और संसद को भारत की वास्तविक समस्याओं से अवगत कराना था।
3. 'इंडियन लीग' की स्थापना वर्ष 1875 में शिशिर कुमार घोष द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य लोगों में राष्ट्रवाद की भावना जगाना और राजनीतिक शिक्षा को बढ़ावा देना था।
4. 'मद्रास महाजन सभा' की स्थापना वर्ष 1884 में सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस द्वारा की गई थी, जो दक्षिण भारत की एक प्रमुख राजनीतिक संस्था थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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