बिहार के इतिहास और विविध सांस्कृतिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्रसिद्ध यूनानी राजदूत मेगास्थनीज, जो मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था, ने अपनी पुस्तक 'इंडिका' में पाटलिपुत्र नगर प्रशासन का विस्तृत वर्णन किया है, जिसके अनुसार नगर का प्रशासन 30 सदस्यों की एक सभा द्वारा संचालित होता था जो छह समितियों में विभाजित थी।
- 2. प्राचीन बिहार में स्थित तक्षशिला विश्वविद्यालय मौर्य साम्राज्य के पतन के पश्चात गुप्त काल में भी उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना रहा, जहाँ आर्यभट्ट और चाणक्य जैसे महान विद्वानों ने अध्ययन और अध्यापन कार्य किया था।
- 3. मध्यकालीन बिहार के संदर्भ में, सूफी संत मखैरूम-उल-मुल्क (या हज़रत शरफुद्दीन अहमद मनेरी) का फिरदौसी सिलसिला बिहार में सर्वाधिक लोकप्रिय रहा, और उनका मुख्य केंद्र मनेर तथा बिहार शरीफ (खानकाह) था।
- 4. ब्रिटिश काल में 1921 में स्थापित 'बिहार विद्यापीठ' के प्रथम कुलपति (चांसलर) महात्मा गांधी थे, जबकि इसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र का प्रशासन 30 सदस्यों की समिति द्वारा 6 उप-समितियों के माध्यम से चलाया जाता था। कथन 2 असत्य है क्योंकि तक्षशिला विश्वविद्यालय वर्तमान पाकिस्तान के रावलपिंडी के पास स्थित था, बिहार में नहीं (हालाँकि नालंदा और विक्रमशिला बिहार में थे)। कथन 3 सत्य है कि बिहार में सूफी संतों का फिरदौसी सिलसिला मनेर और बिहार शरीफ के माध्यम से बहुत प्रसिद्ध हुआ। कथन 4 आंशिक रूप से भ्रामक है क्योंकि बिहार विद्यापीठ के कुलाधिपति (चांसलर) मजहरुल हक या अन्य थे और गांधीजी इसके प्रेरणास्रोत थे, साथ ही तक्षशिला का तथ्य पूरी तरह गलत है। इस प्रकार केवल कथन 1 और 3 सही हैं। अधिक अभ्यास और अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।