शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चंपारण सत्याग्रह के समय महात्मा गांधी को चंपारण आने का औपचारिक और लिखित निमंत्रण राजकुमार शुक्ल ने दिया था, जो कि एक स्थानीय कृषक थे, तथा इस आंदोलन में गांधीजी के प्रमुख सहयोगियों में डॉ. राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, जे.बी. कृपलानी और महादेव देसाई शामिल थे।
- 2. 'चंपारण कृषि अधिनियम' (Champaran Agrarian Act, 1918) के पारित होने के उपरांत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से अवैध रूप से वसूले गए 'तियकठिया' और अन्य गैर-कानूनी शुल्कों को समाप्त कर दिया गया तथा अवैध वसूली का कुल 25 प्रतिशत हिस्सा किसानों को वापस कराया गया।
- 3. वर्ष 1922 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गया अधिवेशन आयोजित हुआ था, जिसकी अध्यक्षता चित्तरंजन दास (C.R. Das) ने की थी, और इसी अधिवेशन के दौरान विधानमंडलों में प्रवेश के मुद्दे पर 'स्वराज पार्टी' के गठन की रूपरेखा और वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आए थे।
- 4. असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में शाह मुहम्मद जुबेर, मज़हरुल हक और स्वामी विद्यानंद ने किसान आंदोलनों और राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा दिया, तथा सदाकत आश्रम और बिहार नेशनल कॉलेज की स्थापना स्वतंत्रता गतिविधियों के प्रमुख केंद्रों के रूप में की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। चंपारण सत्याग्रह (1917) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी का पहला सफल सविनय अवज्ञा आंदोलन था। राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर गांधीजी चंपारण गए और 'तीनकठिया' प्रथा के विरुद्ध संघर्ष किया। जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1918' पारित किया गया, जिसमें किसानों की अवैध वसूली का 25% हिस्सा वापस करने का प्रावधान था। 1922 का गया कांग्रेस अधिवेशन सी.आर. दास की अध्यक्षता में हुआ था, जहाँ स्वराज पार्टी की नींव पड़ी। असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में सदाकत आश्रम और मज़हरुल हक जैसे नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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जयप्रकाश नारायण (जेपी) के नेतृत्व में वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन और 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) के ऐतिहासिक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस आंदोलन की शुरुआत जनवरी 1974 में गुजरात के छात्रों द्वारा बढ़ती कीमतों और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू किए गए 'नवनिर्माण आंदोलन' के बाद बिहार में हुई, जहाँ मार्च 1974 में 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' का गठन किया गया और छात्रों ने जयप्रकाश नारायण से इस आंदोलन का नेतृत्व संभालने का अनुरोध किया था।
2. जयप्रकाश नारायण ने 5 जून 1974 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा प्रणाली में सुधार के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन के लिए 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया था।
3. जेपी आंदोलन के दौरान ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल (Emergency) की घोषणा किए जाने के बाद जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार कर लिया गया था, और उनके नेतृत्व में गठित जनता पार्टी ने वर्ष 1977 के आम चुनावों में भारी जीत हासिल कर केंद्र में पहली बार गैर-कांग्रेस सरकार बनाई थी।
4. इस आंदोलन में केवल छात्र और युवा ही शामिल थे, और इसमें समाजवादी, कम्युनिस्ट (CPI) तथा उस समय की सभी वामपंथी पार्टियों ने इस छात्र आंदोलन और जेपी के नेतृत्व का पूर्ण और एकीकृत समर्थन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी का ध्यान बिहार के चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अमानवीय अत्याचार और 'तीनकथा प्रणाली' (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी) की ओर आकर्षित हुआ था।
2. चंपारण पहुँचने के बाद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा महात्मा गांधी को जिला छोड़ने का आदेश दिए जाने पर उन्होंने सविनय अवज्ञा का सफल प्रयोग किया, जिसके फलस्वरूप सरकार को विवश होकर 'चंपारण कृषि समिति' (Champaran Agrarian Enquiry Committee) का गठन करना पड़ा और गांधीजी इसके एकमात्र अशासकीय भारतीय सदस्य के रूप में शामिल किए गए थे।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान ही देश के प्रख्यात नेताओं जैसे डॉ. राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा, आचार्य जे.बी. कृपलानी और महादेव देसाई ने गांधीजी के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर गहरी प्रशासनिक और कानूनी जाँच-पड़ताल की थी, जिससे बिहार राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख केंद्र बन गया था।
4. इस सत्याग्रह की समाप्ति और 'तीनकथा प्रणाली' के पूर्ण उन्मूलन के बाद रवीन्द्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी की राजनीतिक और नैतिक सफलता से प्रभावित होकर उन्हें पहली बार 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था, जो आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
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19वीं शताब्दी के सामाजिक एवं सांस्कृतिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' और 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का खंडन, एकेश्वरवाद का प्रचार तथा हिंदू समाज में व्याप्त कुरीतियों (जैसे सती प्रथा और बहुविवाह) का विरोध करना था।
2. वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से मुंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा स्थापित 'प्रार्थना समाज' का मुख्य ध्यान अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिलाओं की शिक्षा पर था, तथा इसके प्रमुख विचारकों में महादेव गोविंद रानाडे भी शामिल थे।
3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और इन्होंने रूढ़िवादी पौराणिक हिंदू धर्म की आलोचना करते हुए पाखंड खंडनी पताका फहराई तथा शुद्धि आंदोलन की शुरुआत की।
4. यंग बंगाल आंदोलन के प्रणेता हेनरी विवियन डेरोज़ियो ने पारंपरिक हिंदू कॉलेज की शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत सामाजिक रूढ़ियों का समर्थन किया और ब्रिटिश शासन की नीतियों की खुली प्रशंसा करते हुए राजनीतिक सुधारों का पुरजोर विरोध किया।
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बिहार के इतिहास और विविध सांस्कृतिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रसिद्ध यूनानी राजदूत मेगास्थनीज, जो मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था, ने अपनी पुस्तक 'इंडिका' में पाटलिपुत्र नगर प्रशासन का विस्तृत वर्णन किया है, जिसके अनुसार नगर का प्रशासन 30 सदस्यों की एक सभा द्वारा संचालित होता था जो छह समितियों में विभाजित थी।
2. प्राचीन बिहार में स्थित तक्षशिला विश्वविद्यालय मौर्य साम्राज्य के पतन के पश्चात गुप्त काल में भी उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना रहा, जहाँ आर्यभट्ट और चाणक्य जैसे महान विद्वानों ने अध्ययन और अध्यापन कार्य किया था।
3. मध्यकालीन बिहार के संदर्भ में, सूफी संत मखैरूम-उल-मुल्क (या हज़रत शरफुद्दीन अहमद मनेरी) का फिरदौसी सिलसिला बिहार में सर्वाधिक लोकप्रिय रहा, और उनका मुख्य केंद्र मनेर तथा बिहार शरीफ (खानकाह) था।
4. ब्रिटिश काल में 1921 में स्थापित 'बिहार विद्यापीठ' के प्रथम कुलपति (चांसलर) महात्मा गांधी थे, जबकि इसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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