पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के ऊर्जा प्रवाह और जैव-रासायनिक चक्रों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदशकीय (Unidirectional) होता है, और लिंडमैन के 'दस प्रतिशत नियम' (10% Law) के अनुसार, एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर केवल 10 प्रतिशत ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है, जबकि शेष 90 प्रतिशत ऊर्जा श्वसन, ताप और उपापचय क्रियाओं के दौरान ह्रासित हो जाती है।
- 2. 'पारिस्थितिक पिरामिड' (Ecological Pyramid) में संख्या का पिरामिड और ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा (Upright) बनता है, किंतु एक बड़े वृक्ष के पारिस्थितिकी तंत्र में पक्षियों के लिए 'संख्या का पिरामिड' उल्टा (Inverted) हो सकता है, और महासागरीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में 'बायोमास का पिरामिड' भी सदैव उल्टा होता है।
- 3. वायुमंडल में नाइट्रोजन गैस की प्रचुरता के बावजूद पौधे इसे सीधे वायुमंडल से ग्रहण नहीं कर पाते हैं, अतः राइजोबियम और एजोटोबैक्टर जैसे सूक्ष्मजीव इसे नाइट्रेट्स या अमोनिया में बदलकर 'नाइट्रोजन स्थिरीकरण' (Nitrogen Fixation) का कार्य करते हैं, जो जैव-रासायनिक चक्र का एक प्रमुख हिस्सा है।
- 4. पारिस्थितिक अनुक्रमण (Ecological Succession) की प्रक्रिया में किसी नग्न चट्टान पर उगने वाले सबसे पहले पौधे 'लाइकेन' (Lichens) होते हैं, जिन्हें 'पायनियर कम्युनिटी' (Pioneer Community) कहा जाता है, जो चट्टानों को विघटित करके मृदा निर्माण की प्रक्रिया को शुरू करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
इस प्रश्न के सभी कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है: कथन 1 सत्य है क्योंकि पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदशकीय होता है और लिंडमैन के 10 प्रतिशत नियम के अनुसार केवल 10% ऊर्जा ही अगले पोषण स्तर पर स्थानांतरित होती है। कथन 2 असत्य है क्योंकि महासागरीय (जलीय) पारिस्थितिकी तंत्र में बायोमास का पिरामिड उल्टा होता है, न कि संख्या का पिरामिड (संख्या का पिरामिड जलीय तंत्र में सीधा भी हो सकता है, जबकि फाइटोप्लैankton का बायोमास कम होने से जलीय बायोमास पिरामिड उल्टा बनता है)। कथन 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं; नाइट्रोजन स्थिरीकरण सूक्ष्मजीवों द्वारा होता है और लाइकेन पायनियर कम्युनिटी होते हैं। अधिक अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।