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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के प्रारंभिक इतिहास, उसके विभिन्न अधिवेशनों और नरमपंथी दौर की राजनीतिक कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला अधिवेशन दिसंबर 1885 में बॉम्बे के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में आयोजित होना तय था, किंतु पुणे में हैजा फैल जाने के कारण इसे बॉम्बे स्थानांतरित कर दिया गया था, जिसकी अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की थी और इसमें कुल 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
  2. 2. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए दादाभाई नौरोजी ने पहली बार आधिकारिक रूप से 'स्वराज' (Self-Government) शब्द का मंच से प्रयोग किया था, तथा इसी अधिवेशन में स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा से संबंधित चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए थे।
  3. 3. कांग्रेस के शुरुआती नेता 'याचिका, स्मरणपत्र और प्रतिनिधिमंडल' (Prayer, Petition, and Protest) की राजनीतिक पद्धति में विश्वास रखते थे, जिसे अतिवादी (गरमपंथी) नेताओं द्वारा 'राजनीतिक भिक्षावृत्ति' (Political Mendicancy) की संज्ञा दी गई थी।
  4. 4. लॉर्ड कर्जन ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर में ही कांग्रेस की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यह बयान दिया था कि "कांग्रेस अपनी मौत के कगार पर है और मेरी यह बड़ी इच्छा है कि मैं इसके शांतिपूर्ण निधन में मदद कर सकूं।

" उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संबंधित सभी चारों कथन पूर्णतः सत्य हैं। कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई थी। इसके पहले अधिवेशन की शुरुआत बॉम्बे में हुई क्योंकि पुणे में प्लेग/हैजा फैल गया था। दादाभाई नौरोजी ने 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में स्वराज की मांग रखी थी। नरमपंथियों की प्रार्थना और याचिका की नीति की आलोचना गरमपंथियों ने 'राजनीतिक भिक्षावृत्ति' कहकर की थी। वायसराय लॉर्ड कर्जन ने कांग्रेस के पतन को लेकर वह प्रसिद्ध कथन कहा था। इस तरह के अति महत्वपूर्ण प्रश्नों और संपूर्ण तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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