मानव शरीर के विभिन्न अंगों, ऊतकों और उनके सूक्ष्म अध्ययन (Histology & Organ Systems) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मानव यकृत (Liver) की कार्यात्मक इकाई 'हेपेटिक लोब्यूल' (Hepatic Lobule) होती है, जिसके चारों ओर कूपर कोशिकाएँ (Kupffer cells) पाई जाती हैं, जो भक्षकाणु (Phagocytic) प्रकृति की होती हैं और रक्त से मरे हुए लाल रुधिराणुओं एवं बैक्टीरिया का भक्षण करती हैं।
- 2. वृक्क (Kidney) के वल्कल (Cortex) क्षेत्र में मैल्पीघियन कॉर्पसल (Malpighian corpuscle) स्थित होते हैं, जिसमें बोमन कैप्सूल और ग्लोमेरुलस शामिल होते हैं, तथा हेनले का लूप (Loop of Henle) अधिकांशतः मज्जा (Medulla) क्षेत्र में गहराई तक फैला होता है।
- 3. मानव नेत्र में प्रकाश के प्रवेश को नियंत्रित करने वाली 'आइरिस' (Iris) पुतली (Pupil) के आकार को समायोजित करती है, तथा दृष्टि पटल (Retina) पर पाई जाने वाली 'शंकु कोशिकाएँ' (Cone cells) मंद प्रकाश या रात के समय देखने के लिए उत्तरदायी होती हैं, जबकि 'शलाका कोशिकाएँ' (Rod cells) रंगीन और तीव्र प्रकाश में देखने में सहायता करती हैं।
- 4. फेफड़ों के भीतर गैसीय विनिमय सूक्ष्म वायुकोषों (Alveoli) की पतली उपकला (Squamous epithelium) के माध्यम से विसरण (Diffusion) द्वारा होता है, जिनकी आंतरिक सतह पर 'पल्मोनरी सरफेक्टेंट' नामक फॉस्फोलिपिड का लेप होता है, जो सतह तनाव (Surface Tension) को कम करके वायुकोषों को सिकुड़ने से बचाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
इस प्रश्न के कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:
1. कथन 1 सत्य है: यकृत की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई हेपेटिक लोब्यूल होती है, जिसमें मैक्रोफेज प्रकृति की कूपर कोशिकाएँ उपस्थित होती हैं जो हानिकारक जीवाणुओं और मृत कोशिकाओं का भक्षण करती हैं।
2. कथन 2 सत्य है: वृक्क का वल्कल भाग मैल्पीघियन कॉर्पसल को धारण करता है, जबकि हेनले का लूप रीनल मेडुला में गहराई तक जाता है जो मूत्र के सांद्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3. कथन 3 असत्य है: मानव नेत्र में 'शलाका कोशिकाएँ' (Rod cells) मंद प्रकाश (Scotopic vision) के लिए और 'शंकु कोशिकाएँ' (Cone cells) तीव्र प्रकाश तथा रंगों की पहचान (Photopic vision) के लिए उत्तरदायी होती हैं, जो कथन में विपरीत दिया गया है।
4. कथन 4 सत्य है: वायुकोषों में सरफेक्टेंट का होना आवश्यक है जो पृष्ठीय तनाव को कम करता है जिससे श्वसन के समय फेफड़े आसानी से फैल और सिकुड़ सकें।
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