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History of India
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उन्नीसवीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. तत्त्वबोधिनी सभा - देवेंद्रनाथ ठाकुर
- 2. साधारण ब्रह्म समाज - आनंद मोहन बोस और शिवनाथ शास्त्री
- 3. सेवा सदन - रामाबाई रानाडे
- 4.
देव समाज - शिव नारायण अग्निहोत्री उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सुमेलित है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों में विभिन्न सुधारकों ने समाज सुधार के लिए कई संस्थाओं की स्थापना की थी। देवेंद्रनाथ ठाकुर ने 1839 में 'तत्त्वबोधिनी सभा' की स्थापना की थी जिसका उद्देश्य उपनिषदों के विचारों का प्रचार करना था। वर्ष 1878 में केशव चंद्र सेन द्वारा अपनी पुत्री के अल्पायु विवाह के पश्चात 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना आनंद मोहन बोस, शिवनाथ शास्त्री और द्वारकानाथ गांगुली द्वारा की गई थी। रामाबाई रानाडे ने 1908 में महिलाओं के कल्याण के लिए 'सेवा सदन' की स्थापना की थी, तथा शिव नारायण अग्निहोत्री ने 1887 में लाहौर में 'देव समाज' की स्थापना की थी। अतः सभी युग्म सही सुमेलित हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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वैदिक साहित्य और उसके संकलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वेद के दो सबसे प्राचीन मंडल (द्वितीय और सप्तम मंडल) हैं, जिन्हें 'वंश मंडल' भी कहा जाता है क्योंकि इनकी रचना विभिन्न ऋषियों के वंशजों द्वारा की गई थी।
2. सामवेद में मुख्य रूप से यज्ञों के अवसर पर गाए जाने वाले मंत्रों (स्तोत्रों) का संकलन है, और इसे भारतीय संगीत का जनक माना जाता है।
3. यजुर्वेद एक ऐसा वेद है जो गद्य और पद्य दोनों में लिखा गया है, और इसके दो प्रमुख भाग 'कृष्ण यजुर्वेद' और 'शुक्ल यजुर्वेद' हैं।
4. अथर्ववेद में जादू-टोना, वशीकरण, औषधियाँ और रोगों के निवारण से संबंधित मंत्रों का उल्लेख है, तथा इसमें वैदिक सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां कहा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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खिज्र खाँ ने सुल्तान की उपाधि न धारण कर स्वयं को किस पदवी से संतुष्ट रखा?
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1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके स्वरूप के विश्लेषण के संदर्भ में निम्नलिखित इतिहासकारों तथा उनके प्रसिद्ध कथनों एवं मतों पर विचार कीजिए:
1. बेंजामिन डिजराइल ने ब्रिटिश संसद में दिए अपने भाषण में 1857 के विद्रोह को केवल एक 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) मानने से इनकार करते हुए इसे एक 'राष्ट्रीय विद्रोह' (National Revolt) की संज्ञा दी थी।
2. इतिहासकार डॉ. आर.सी. मजूमदार ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द सिपाही म्यूटिनी एंड द रिवोल्ट ऑफ़ 1857' में यह निष्कर्ष दिया था कि तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो पहला, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।
3. वी.डी. सावरकर ने अपनी ऐतिहासिक कृति 'द इंडियन वॉर ऑफ़ इंडिपेंडेंस 1857' में इस घटना को सुनियोजित और सुनियंत्रित प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के रूप में चित्रित किया था।
4. सर जॉन सीले और लॉयर्स ने 1857 के विद्रोह को एक पूर्णतः देशभक्तिपूर्ण राष्ट्रीय आंदोलन बताते हुए इसे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीयों का सुनियोजित स्वतंत्रता संघर्ष माना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके वैचारिक तथा संस्थागत विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पैतृक पुरोहितवाद का कड़ा विरोध करते हुए एकेश्वरवाद पर बल दिया, तथा देवेंद्रनाथ ठाकुर के नेतृत्व में इसे और अधिक संगठित रूप प्रदान करते हुए 'तत्वबोधिनी सभा' का इसमें विलय कर दिया गया।
2. प्रार्थना समाज (1867) की स्थापना आत्माराम पांडुरंग ने बॉम्बे में की थी, जिसे महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर जैसे विद्वानों का समर्थन प्राप्त हुआ, और इसने मुख्य रूप से अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह तथा महिला शिक्षा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया।
3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया तथा पाखंड खंडनी पताका के माध्यम से रूढ़िवादी हिंदू मान्यताओं का खंडन करते हुए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की, जिससे धर्मान्तरित हिंदुओं की स्वधर्म में वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ।
4. साधारण ब्रह्म समाज की स्थापना 1878 में आनंदमोहन बोस, शिवनाथ शास्त्री और द्विजनाथ गांगुली द्वारा केशव चंद्र सेन की अल्पायु पुत्री के कूचबिहार के राजा के साथ विवाह जैसे मुद्दों और ब्रह्म समाज में बढ़ती निरंकुशता के विरोधस्वरूप की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के प्रवेश और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा सत्ता स्थापना के प्रारंभिक चरणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) को वर्ष 1600 में महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा एक शाही चार्टर (राजकीय अधिकार पत्र) प्रदान किया गया था, जिसके तहत उसे पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने का एकाधिकार मिला, और कैप्टन विलियम हॉकिन्स वर्ष 1608 में 'हेक्टर' नामक जहाज लेकर मुगल सम्राट जहांगीर के दरबार में सूरत में फैक्ट्री स्थापित करने की अनुमति मांगने पहुँचा था।
2. जहाँ शुरुआती दौर में पुर्तगालियों के कड़े विरोध के कारण अंग्रेजों को सूरत में स्थायी फैक्ट्री स्थापित करने में कठिनाई हुई, वहीं 1612 के 'स्वाली के नौसैनिक युद्ध' (Battle of Swally) में थॉमस बेस्ट के नेतृत्व में अंग्रेजी नौसेना ने पुर्तगाली बेड़े को पराजित कर दिया, जिससे प्रभावित होकर जहांगीर ने अंग्रेजों को सूरत में स्थायी कारखाना स्थापित करने की शाही अनुमति प्रदान कर दी थी।
3. वर्ष 1615 में किंग जेम्स प्रथम के आधिकारिक राजदूत के रूप में सर थॉमस रो भारत आए और उन्होंने मुगल दरबार में तीन वर्षों तक रहकर सम्राट जहांगीर एवं राजकुमार खुर्रम से ऐसे व्यापारिक अधिकार और रियायतें प्राप्त कीं, जिनके बल पर अंग्रेजों ने भारत के विभिन्न हिस्सों में अपनी व्यावसायिक बस्तियों (फैक्ट्रियों) का तेजी से विस्तार किया।
4. बंगाल के क्षेत्र में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को अपनी पहली महत्वपूर्ण व्यावसायिक सफलता वर्ष 1651 में हुगली नदी के तट पर फैक्ट्री स्थापित करने के साथ मिली, और बंगाल के सूबेदार शाह शुजा द्वारा 'निशान' (शाही आदेश) जारी किए जाने के बाद अंग्रेजों को एक निश्चित वार्षिक कर के बदले बंगाल, बिहार और उड़ीसा में कर-मुक्त व्यापार करने का असीमित अधिकार तुरंत प्राप्त हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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