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History of India
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हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़े क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में हुई बैठक में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में HRA का नाम बदलकर 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया और इसमें समाजवाद को मुख्य वैचारिक आधार बनाया गया।
- 2. वर्ष 1925 में घटित 'काकोरी ट्रेन एक्शन' के दौरान डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन को लूटने की योजना रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और राजेंद्र लाहिरी के नेतृत्व में बनाई गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए ब्रिटिश खजाने का धन प्राप्त करना था।
- 3. साइमन कमीशन के विरोध प्रदर्शन के दौरान लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज का बदला लेने के लिए भगत सिंह, सुखदेव और चंद्रशेखर आजाद ने दिसंबर 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सांडर्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
- 4. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने जन-विरोधी 'पब्लिक सेफ्टी बिल' और 'ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल' के विरोध में 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधानसभा में बम फेंके, और अपनी गिरफ्तारी के समय 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा देते हुए न्यायालय को अपने प्रचार का मंच बनाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का पुनर्गठन 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) के रूप में किया गया था। इस संगठन के इतिहास और विचारधारा के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। 9 अगस्त 1925 को काकोरी ट्रेन एक्शन को अंजाम दिया गया, जिसमें रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान आदि प्रमुख क्रांतिकारी शामिल थे। साइमन कमीशन के विरोध में लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने हेतु जॉन सांडर्स की हत्या दिसंबर 1928 में की गई, तथा 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका।
Related Questions
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इल्तुतमिश ने सल्तनत काल में पहली बार शुद्ध अरबी के सिक्के—चांदी का 'टका' और तांबे का 'जीतल'—प्रचलित किए, तथा प्रशासनिक सुदृढ़ता के लिए 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीस गुलाम सरदारों का दल) का गठन किया।
2. अलाउद्दीन खिलजी ने साम्राज्य की आर्थिक स्थिति पर नियंत्रण रखने और बड़ी स्थायी सेना के रखरखाव के लिए बाजार नियंत्रण प्रणाली लागू की, जिसके तहत 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' जैसे अधिकारियों की नियुक्ति की गई तथा नगद वेतन के स्थान पर भूमि अनुदान (इकता) प्रथा को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया गया।
3. फिरोजशाह तुगलक ने किसानों के आर्थिक कल्याण के लिए कृषि विभाग 'दीवान-ए-कोही' की स्थापना की और सिंचाई की सुविधा के लिए अनेक नहरों का निर्माण कराया, साथ ही शरियत के विरुद्ध वसूले जाने वाले 24 प्रकार के कष्टदायक करों को समाप्त कर केवल चार प्रकार के वैध कर—खराज, जकात, जिजिया और खुम्स—ही रखे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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उन्नीसवीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके संस्थापकों तथा वैचारिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केशव चंद्र सेन के प्रभाव से मद्रास में वर्ष 1864 में 'वेद समाज' (जिसे बाद में 'ब्रह्म समाज ऑफ सदर्न इंडिया' कहा गया) की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य जाति व्यवस्था का उन्मूलन और विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा देना था।
2. गोपाल हरि देशमुख (जिन्हें 'लोकहितवादी' कहा जाता है) ने महाराष्ट्र में रूढ़िवादी ब्राह्मणवाद और सामाजिक असमानता पर कड़ा प्रहार करते हुए तर्क दिया कि यदि धर्म सामाजिक सुधारों की अनुमति नहीं देता है, तो ऐसे धर्म को बदल देना चाहिए।
3. ज्योतिराव फुले द्वारा स्थापित 'सत्यशोधक समाज' (1873) ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक ग्रंथों की प्रामाणिकता को चुनौती देते हुए शूद्रों और अति-शूद्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा एक विशिष्ट गैर-ब्राह्मण आंदोलन की नींव रखी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन से संबंधित क्षेत्रों के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली - जॉन निकलसन
2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और जेम्स आउट्राम
3. कानपुर - मेजर जनरल हैवलॉक
4. झांसी और ग्वालियर - सर ह्यूरोज
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34) और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान दांडी मार्च के पश्चात देश के विभिन्न हिस्सों में नमक कानून तोड़ने के अलावा वन कानूनों की अवहेलना, चौकीदारी कर अदायगी का बहिष्कार और विदेशी कपड़ों का पूर्ण बहिष्कार जैसे कार्यक्रम व्यापक स्तर पर चलाए गए।
2. 5 मार्च 1931 को महात्मा गांधी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच हुए समझौते के तहत सरकार ने उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति दी जिन पर हिंसा के आरोप थे, तथा जब्त की गई सभी संपत्तियों को बिना शर्त वापस कर दिया।
3. गांधी-इरविन समझौते के उपरांत कांग्रेस ने कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते का अनुमोदन किया और महात्मा गांधी को आगामी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में लंदन जाने के लिए अधिकृत किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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गुप्तकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, प्रांतीय विभाजन तथा अधिकारियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त साम्राज्य में प्रशासन की सबसे बड़ी प्रांतीय इकाई को 'भुक्ति' या 'देश' कहा जाता था, जिसके प्रमुख को 'उपर्युक्त' या 'गोप्तृ' कहा जाता था और इनकी नियुक्ति सीधे सम्राट द्वारा की जाती थी।
2. 'भुक्ति' के नीचे का प्रशासनिक प्रांतीय भाग 'विषय' (जिला) कहलाता था, जिसका प्रमुख अधिकारी 'विषयपति' होता था, और वह स्थानीय प्रशासन के संचालन के लिए नगर श्रेष्ठियों और व्यापारियों की एक परिषद (अधिकरण) के साथ कार्य करता था।
3. गुप्त प्रशासनिक शब्दावली में 'महादंडनायक' मुख्य न्यायाधीश या न्यायिक अधिकारी होता था, जबकि 'संधिविग्रहिक' युद्ध और शांति मामलों का सर्वोच्च मंत्री होता था, जो विदेश नीति का भी संचालन करता था।
4. गुप्त प्रशासन में 'कुमारामात्य' सबसे महत्वपूर्ण उच्च प्रशासनिक अधिकारी वर्ग था, और गुप्त सम्राटों के राजकुमारों को हीन पदों पर नियुक्त करने के लिए 'कुमार' की उपाधि दी जाती थी, जिनका प्रशासनिक कार्यों में कोई स्वतंत्र हस्तक्षेप नहीं था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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