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General Science
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धातुकर्म (Metallurgy) और मिश्रधातुओं (Alloys) के रासायनिक संघटन तथा गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कॉपर पाइराइट्स ($CuFeS_2$) के प्रगलनी (Smelting) के दौरान प्राप्त 'मैट' (Matte) मुख्य रूप से क्यूप्रस सल्फाइड ($Cu_2S$) और फेरस सल्फाइड ($FeS$) का मिश्रण होता है, जिसे प्रवर्धनी भट्टी (Bessemer converter) में सिलिका के साथ गर्म करके फेरस सल्फाइड को फेरस सिलिकेट के रूप में धातुमल (Slag) के रूप में पृथक कर लिया जाता है।
- 2. 'जर्मन सिल्वर' (German Silver) एक प्रसिद्ध मिश्रधातु है जिसमें नाममात्र के लिए भी सिल्वर (Ag) का अंश नहीं पाया जाता है, बल्कि इसका मुख्य संघटन तांबा (Cu), जस्ता (Zn) और निकल (Ni) होता है।
- 3. जिंक ब्लेंड ($ZnS$) अयस्क के सांद्रण के लिए 'फेन प्लवन प्रक्रम' (Froth Flotation Process) का उपयोग किया जाता है, जिसमें चीड़ का तेल (Pine oil) संग्राहक (Collector) के रूप में और सोडियम साइनाइड ($NaCN$) अवसादक (Depressant) के रूप में कार्य करता है जो ZnS को फेन में आने से रोकता है जबकि FeS को तैरने देता है।
- 4. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हెరॉल्ट प्रक्रम में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) में घोला जाता है, जो एलुमिना के गलनांक को कम करने के साथ-साथ उसकी विद्युत चालकता को भी सुगम बनाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: कॉपर पाइराइट्स के प्रगलन से प्राप्त 'मैट' $Cu_2S$ और $FeS$ का मिश्रण होता है, जिसे बेसेमर कन्वर्टर में फेरस सिलिकेट धातुमल के रूप में शुद्ध किया जाता है। कथन 2 सही है: जर्मन सिल्वर में तांबा (50%), जस्ता (35%) और निकल (15%) होते हैं, इसमें चांदी बिल्कुल नहीं होती। कथन 3 गलत है क्योंकि सोडियम साइनाइड ($NaCN$) अवसादक के रूप में $ZnS$ को नहीं बल्कि $FeS$ (आयरन सल्फाइड) को फेन में जाने से रोकता है और $ZnS$ को फेन के साथ ऊपर आने देता है। कथन 4 सही है: हॉल-हెరॉल्ट प्रक्रम में क्रायोलाइट एलुमिना का गलनांक घटाकर विद्युत चालकता बढ़ाता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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आनुवंशिकी और जैव विकास (Genetics and Evolution) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हार्डी-वीनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg equilibrium) के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संभोग करने वाले जनसंख्या में एलील आवृत्तियाँ (Allele frequencies) पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर रहती हैं, बशर्ते जनसंख्या में उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, आनुवंशिक विचलन (Genetic drift), जीन प्रवाह और गैर-यादृच्छिक संभोग का अभाव हो।
2. लैमार्कवाद का मूल सिद्धांत 'उपार्जित लक्षणों की वंशागति' (Inheritance of acquired characters) और अंगों के उपयोग व अनुपयोग पर आधारित था, जिसे बाद में वीज्मैन के 'जननद्रव्य की निरंतरता के सिद्धांत' (Theory of Continuity of Germplasm) द्वारा खंडित किया गया था।
3. प्राकृतिक चयन के डार्विनवादी सिद्धांत में 'योग्यतम की उत्तरजीविता' (Survival of the fittest) का तात्पर्य सबसे आक्रामक या शारीरिक रूप से सबसे बलवान जीव से है, न कि पर्यावरण के प्रति सबसे अनुकूलित जीव से।
4. आनुवंशिक अपवाह (Genetic drift) विशेष रूप से छोटी जनसंख्या में प्रभाव डालता है, जिसके कारण 'संस्थापक प्रभाव' (Founder effect) और 'बॉटलनेक प्रभाव' (Bottleneck effect) जैसी घटनाएँ उत्पन्न होती हैं जो नई जातियों के उद्भव में योगदान दे सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जो राउल्ट के नियम के अनुसार विलायक में घुले हुए अवाष्पशील विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है तथा यह विलेय की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है।
2. समांग उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक सभी एक ही भौतिक अवस्था में होते हैं, और इसकी क्रियाविधि को मुख्य रूप से 'मध्यवर्ती यौगिक निर्माण सिद्धांत' द्वारा समझाया जाता है।
3. जिग्लर-नट्टा उत्प्रेरक ($TiCl_4 + Al(C_2H_5)_3$) एक विषमांग उत्प्रेरक का प्रमुख उदाहरण है, जिसका उपयोग उच्च घनत्व वाले पॉलीइथिलीन (HDPE) के औद्योगिक उत्पादन में किया जाता है।
4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अपनी अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के लिए जाने जाते हैं, और 'ताला-कुंजी' (Lock and Key) मॉडल के अनुसार एंजाइम रासायनिक अभिक्रिया के सक्रियण ऊर्जा को कम करके अभिक्रिया की दर को बढ़ाते हैं, किंतु यह साम्यावस्था स्थिरांक ($K_{eq}$) को परिवर्तित नहीं करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न प्रोटोजोआ और कवक जनित रोगों तथा उनके संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'अमीबायोसिस' (अमीबी पेचिश) एक प्रोटोजोआ जनित रोग है जो एंटअमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) के कारण होता है, और इसके संचरण का मुख्य माध्यम दूषित जल और भोजन है, जो आंतों के संक्रमण के साथ-साथ गंभीर रक्तयुक्त दस्त (डिसेंट्री) पैदा करता है।
2. 'रिंगवर्म' (दाद) एक कवक जनित संक्रामक त्वचा रोग है जो मुख्य रूप से माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफाइटन और एपिडर्मोफाइटन जैसे कवकों द्वारा होता है, और यह रोग मिट्टी या संक्रमित व्यक्तियों के तौकिए, कपड़ों या बिस्तर के उपयोग से फैलता है जिसके लिए उष्ण और नम वातावरण सबसे अनुकूल होता है।
3. 'एस्केरिसिज़' (Aroscariasis) एक कवक जनित आंतरिक संक्रमण है जो कवक के बीजाणुओं के अंतःश्वसन के माध्यम से फेफड़ों को सीधे प्रभावित करता है और तीव्र श्वासरोध उत्पन्न करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं क्योंकि उनके आयन स्थिरवैद्युत आकर्षण बलों द्वारा क्रिस्टल जालक में दृढ़ता से बंधे होते हैं, किंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में वे विद्युत का चालन करते हैं क्योंकि आयन गति के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं।
2. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकती हैं (अर्थात इलेक्ट्रॉन-न्यून), जबकि लुईस क्षार वे हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान कर सकती हैं, जैसे कि अमोनिया ($NH_3$)।
3. जब किसी दुर्बल अम्ल ($CH_3COOH$) का उदासीनीकरण प्रबल क्षार ($NaOH$) के साथ किया जाता है, तो प्राप्त लवण का जलीय विलयन जलीय जल-अपघटन के कारण अम्लीय प्रकृति का होता है।
4. बफर विलयन वे विलयन होते हैं जो बाहरी मात्रा में प्रबल अम्ल या प्रबल क्षार मिलाने पर भी अपने pH मान में परिवर्तन का प्रभावी विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर का एक उत्कृष्ट उदाहरण एसिटिक अम्ल एवं सोडियम एसिटेट का मिश्रण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दृष्टि दोष मायोपिया को ठीक करने के लिए कौन सा लेंस उपयोग होता है?
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