समावेशी शिक्षा
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के तहत विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा के लिए 'विशिष्ट शिक्षा' (Special Education) और 'एकीकृत शिक्षा' (Integrated Education) से किस मुख्य दार्शनिक और संरचनात्मक बिंदु पर भिन्नता पाई जाती है?
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Detailed Explanation
समावेशी शिक्षा एक ऐसी निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य सभी बच्चों को उनकी शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक, भाषाई या अन्य स्थितियों के परवाह किए बिना सामान्य विद्यालयों की मुख्यधारा में शिक्षा प्रदान करना है। इसके तहत विद्यालय प्रणाली और पाठ्यक्रम में आवश्यक लचीलापन लाया जाता है ताकि वे बच्चों की विविध आवश्यकताओं के अनुकूल बन सकें। इसके विपरीत, 'एकीकृत शिक्षा' (Integrated Education) में बच्चों को सामान्य विद्यालयों में तो बैठाया जाता है, लेकिन व्यवस्था या पाठ्यक्रम में कोई विशेष बदलाव नहीं किया जाता, जिससे बच्चे को ही व्यवस्था के अनुसार ढलना पड़ता है। इस संदर्भ में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के मूल दर्शन और 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर…
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में…
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'समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (Inclusive Education and Children with Special Needs)' के संदर्भ में, निकोलस हॉब्स (Nicholas Hobbs) द्वारा प्रतिपादित 'पारिस्थितिकीय सिद्धांत (Ecological Systems Theory) का विशेष शिक्षा में अनुप्रयोग' के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डorsolateral प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - dlPFC), 'इंसुला' (Insula), और 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्カス' (Superior Temporal Sulcus - STS) के बीच सामाजिक संज्ञान, पर्यावरणीय अनुकूलन और न्यूरोडाइवर्सिटी (Neurodiversity) प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा उता फ्रिथ (Uta Frith) द्वारा प्रतिपादित 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार (ASD) का न्यूरो-कोग्निटिव माइंडब्लाइंडनेस मॉडल (Mindblindness Model - Theory of Mind)' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग (UDL: Universal Design for Learning) और विद्यार्थियों में संवेगात्मक नियमन, सामाजिक सहभागिता व सर्वांगीण समावेशन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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कक्षा में 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) का अर्थ क्या है?
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कक्षा में 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) का अर्थ है:
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कक्षा में 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) का मुख्य लाभ क्या है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे' (Children with Special Needs) के शिक्षण में 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा का सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक उद्देश्य निम्नलिखित में से क्या है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत 'विभेदीकृत अनुदेशन' (Differentiated Instruction) की अवधारणा का मूल शैक्षणिक उद्देश्य निम्नलिखित में से क्या है?
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बिहार आर्थिक सर्वेक्षण एवं राज्य बजट के नवीनतम आंकड़ों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए प्रस्तुत बिहार के बजट में कुल व्यय का सर्वाधिक हिस्सा 'सामान्य सेवाओं' (General Services) के बाद 'सामाजिक सेवाओं' (Social Services) पर आवंटित किया गया है, जिसमें शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
2. बिहार आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था में स्थिर मूल्यों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम दर्ज की गई है, और प्राथमिक क्षेत्र का योगदान द्वितीयक क्षेत्र की तुलना में सबसे अधिक बना हुआ है।
3. राज्य में प्रति 1 लाख जनसंख्या पर बैंक शाखाओं और वित्तीय समावेशन के विस्तार के कारण प्रति व्यक्ति आय के मामले में पटना जिला लगातार शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाला जिला शिवहर है।
4. जीविका (Jeevika) कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए गठित स्वयं सहायता समूहों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पूंजी निर्माण का एक प्रमुख स्रोत बन चुके हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समावेशी शिक्षा का अभिप्राय यह है कि विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) को सामान्य बालकों से पूर्ण रूप से पृथक करके एक विशेष आवासीय विद्यालय में रखा जाए, ताकि वे अपनी गति से सीख सकें।
2. 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009' (RTE Act 2009) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-2005) दोनों ही इस बात पर बल देते हैं कि कक्षा-कक्ष में विविधता का सम्मान किया जाना चाहिए तथा किसी भी बालक को उसकी शारीरिक या मानसिक अक्षमता के आधार पर विद्यालय में प्रवेश से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
3. सार्वभौमिक डिजाइन (Universal Design for Learning - UDL) का सिद्धांत समावेशी कक्षाओं में शिक्षण अधिगम सामग्री (TLM) और मूल्यांकन प्रणालियों में लचीलापन लाने की वकालत करता है ताकि सभी प्रकार के अधिगमकर्ताओं की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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