सिगमंड फ्रायड
Asked 2 महीने पहले · Viewed 26 times
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के विभिन्न चरणों—विशेष रूप से 'गुदा अवस्था' (Anal Stage) और 'फैलिस अवस्था' (Phallic Stage)—के तात्विक एवं विश्लेषणात्मक स्वरूप का गहन अध्ययन करने पर, यदि कोई वयस्क व्यक्ति अत्यधिक अनुशासनप्रियता, जिद, कंजूसी, अत्यधिक साफ-सफाई या इसके विपरीत अव्यवस्था और असावधानी जैसे विशिष्ट व्यक्तित्व गुणों (Anal Personality Traits) का प्रदर्शन करता है, तथा एडिपस ग्रंथि (Oedipus Complex) या इलेक्ट्रा ग्रंथि (Electra Complex) के समाधान के दौरान लिंग पहचान (Gender Identification) और सुपरइगो के विकास में अंतर्द्वंद्व का सामना करता है; तो फ्रायड के मनोविश्लेषण और विकासात्मक गतिकी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत के अनुसार, विकास विभिन्न चरणों में होता है जहाँ लिबिडो शरीर के विशिष्ट क्षेत्रों पर केंद्रित होता है। गुदा अवस्था (लगभग 1.5 से 3 वर्ष) में शौचालय प्रशिक्षण के दौरान माता-पिता का रवैया बच्चे के वयस्क व्यक्तित्व (जैसे कंजूसी, जिद्दीपन या अत्यधिक व्यवस्था) को गहराई से प्रभावित करता है। इसके अतिरिक्त, फैलिस अवस्था (लगभग 3 से 6 वर्ष) में एडिपस और इलेक्ट्रा ग्रंथियों का समाधान लिंग पहचान और 'सुपरइगो' के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाता है। इस सिद्धांत के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
अगला प्रश्न →
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory)…
← पिछला प्रश्न
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual…
Related Questions
→
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के विभिन्न चरणों तथा व्यक्तित्व की संरचना (इदम, अहम् और पराअहम्) का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, यदि कोई बालक लगभग 3 से 6 वर्ष की आयु के दौरान विपरीत लिंगी माता-पिता के प्रति अचेतन आकर्षण और समलैंगिक माता-पिता के प्रति प्रतिद्वंद्विता या भय (जैसे लड़कों में ओडिपस ग्रंथि और लड़कियों में इलेक्ट्रा ग्रंथि) का अनुभव करता है, तथा इस चरण के सफलतापूर्वक समाधान के फलस्वरुप नैतिक मूल्यों और अंतःकरण का विकास होता है, तो फ्रायड के इस सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
→
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के अंतर्गत, जब कोई बालक लगभग 3 से 6 वर्ष की आयु के 'फालिक अवस्था' (Phallic Stage) से गुजरता है, तो इस चरण में उत्पन्न होने वाली 'ईडिपस ग्रंथि' (Oedipus Complex) और 'इलेक्ट्रा ग्रंथि' (Electra Complex) के समाधान के रूप में बालक अपनी समान लिंगी माता-पिता के साथ तादात्म्य (Identification) स्थापित करता है। यह मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया फ्रायड के व्यक्तित्व के किस संरचनात्मक तंत्र के अत्यधिक सक्रिय होने का प्रत्यक्ष परिणाम होती है?
→
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के संदर्भ में, 'गुदा अवस्था' (Anal Stage) के दौरान यदि माता-पिता द्वारा बच्चे को शौच-प्रशिक्षण (Toilet Training) अत्यधिक कठोरता या अत्यधिक अनुग्रह के साथ दिया जाता है, तो फ्रायड के अनुसार वयस्क व्यक्तित्व में किस प्रकार के विपरीत लक्षण (Character Traits) उत्पन्न हो सकते हैं?
→
सिग्मंड फ्रायड (Sigmund Freud) के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत व्यक्तित्व की संरचना को स्पष्ट करने वाले तीन घटकों—'इदम' (Id), 'अहम' (Ego), और 'पराअहम' (Superego)—के पारस्परिक संघर्ष और संचालन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन 'अहम' (Ego) की तात्विक और मनोवैज्ञानिक भूमिका का सबसे सटीक वर्णन करता है?
→
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के अंतर्गत 'फैलिस अवस्था' (Phallic Stage) के दौरान उत्पन्न होने वाले 'एडिपस ग्रंथि' (Oedipus Complex) और 'इलेक्ट्रा ग्रंथि' (Electra Complex) के मनोवैज्ञानिक, तार्किक तथा विकासात्मक प्रभावों का गहन विश्लेषण करने पर, इस अवस्था के सफल समाधान और लिंग पहचान (Gender Identification) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
→
सिग्मंड फ्रायड के मनोविश्लेषण और मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के अंतर्गत 'मौखिक अवस्था' (Oral Stage) से लेकर 'जननांगी अवस्था' (Genital Stage) तक की विकासात्मक गतिकी का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई व्यक्ति अपनी किसी भी मनो-लैंगिक अवस्था में अत्यधिक तृप्ति (Over-gratification) या अत्यधिक कुंठा (Frustration) का सामना करता है, जिससे फ्रायड के अनुसार 'स्थिरीकरण' (Fixation) की स्थिति उत्पन्न होती है; तो इस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया और फ्रायडियन संकल्पना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन तात्विक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सर्वाधिक प्रामाणिक एवं सत्य है?
→
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के विभिन्न चरणों और उनकी विशेषताओं का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई बालक अपने विकास की उस अवस्था में है जहाँ उसका अधिकांश कामुक और मानसिक ऊर्जा का केंद्र 'गुदा क्षेत्र' (Anal Region) पर केंद्रित होता है, तथा माता-पिता द्वारा टॉयलेट ट्रेनिंग (शौचालय प्रशिक्षण) के दौरान अत्यधिक कठोरता या अत्यधिक अनुदारता बरतने के कारण उस बालक के व्यक्तित्व में अत्यधिक व्यवस्थाप्रियता, जिद्दीपन, कंजूसी या इसके विपरीत अत्यधिक अव्यवस्था और फूहड़पन जैसे लक्षण स्थायी रूप से विकसित हो जाते हैं, तो फ्रायड के इस सिद्धांत के अनुसार यह विकासात्मक अवस्था और इससे उत्पन्न होने वाला व्यवहारिक स्वरूप निम्नलिखित में से किस विकल्प के साथ सर्वाधिक सटीकता से मेल खाता है?
→
सिगमंड फ्रायड द्वारा प्रतिपादित मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत (Psychoanalytic Theory) में व्यक्तित्व की संरचना को समझाने के लिए चेतना के स्तरों (Levels of Consciousness) और व्यक्तित्व के तीन मूलभूत घटकों—इदम (Id), अहम् (Ego) और पराअहम् (Superego)—की संकल्पना की गई है। यदि कोई व्यक्ति अपने सामाजिक जीवन में नैतिक मानकों, अंतरात्मा की आवाज़ और आदर्शवादी नियमों से अत्यधिक नियंत्रित रहता है तथा अपने किसी भी मूल आवेग या इच्छा को अवचेतन में दबा लेता है, जिससे वह अत्यधिक अपराधबोध (Guilt) का अनुभव करता है; तो फ्रायड के इस संरचनात्मक और गत्यात्मक प्रतिमान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.