मापन, मूल्यांकन एवं परीक्षण: अवधारणा
Asked 2 महीने पहले · Viewed 2,336 times
शैक्षणिक मूल्यांकन की प्रक्रिया में 'मूल्यांकन' (Evaluation) और 'आकलन' (Assessment) की प्रकृति, उनके उद्देश्यों तथा उनके फीडबैक प्रणालियों का गहन तात्विक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों संकल्पनाओं के पदानुक्रमित अंतर और उनके व्यापक दायरे को सर्वाधिक सटीक रूप से परिभाषित करता है?
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Detailed Explanation
शैक्षणिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, आकलन (Assessment) और मूल्यांकन (Evaluation) में स्पष्ट पदानुक्रमित अंतर पाया जाता है। आकलन एक सतत प्रक्रिया है जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की अधिगम प्रक्रिया के दौरान साक्ष्य एकत्र करना, उनकी कमियों का निदान करना और शिक्षण विधियों में सुधार लाना है ('अधिगम के लिए आकलन')। इसके विपरीत, मूल्यांकन (Evaluation) एक व्यापक और निर्णयात्मक अवधारणा है जिसमें संकलित साक्ष्यों के आधार पर मूल्य का निर्धारण (Value Judgment), ग्रेडिंग या संपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि का निर्णय किया जाता है। मूल्यांकन के दायरे में आकलन स्वयं समाहित होता है। इस संबंध में अधिक विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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शिक्षा में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) की संकल्पना का गहन विश्लेषण करने पर…
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शैक्षणिक मूल्यांकन (Educational Evaluation) के अंतर्गत…
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क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) के क्षेत्र में स्टीफन कोरी (Stephen Corey) और डेविड हूपर (David Hopkins) द्वारा विकसित मॉडलों का शिक्षण विधियों के सुधार के संदर्भ में सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, जब एक शिक्षक अपनी कक्षा में किसी विशेष पठन अक्षमता (जैसे डिस्लेक्सिया) से जूझ रहे छात्रों के लिए 'उपचारात्मक शिक्षण विधि' (Remedial Teaching Method) के प्रभाव का मूल्यांकन करने हेतु त्वरित और व्यावहारिक शोध चक्र चलाता है, तब इस प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इसकी तात्विक और कार्यप्रणालीगत विशेषता को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों' (CWSN) के लिए 'विशेष शिक्षा' (Special Education), 'एकीकृत शिक्षा' (Integrated Education) और 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) के दार्शनिक, प्रशासनिक तथा शैक्षणिक स्वरूपों का गहन विश्लेषणात्मक अध्ययन करने पर, यदि एक सामान्य विद्यालय अपनी संरचना, पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धतियों और मूल्यांकन प्रणालियों में इस प्रकार का मूलभूत परिवर्तन करता है कि वह प्रत्येक बालक (चाहे उसकी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या भाषाई क्षमताएं कितनी भी भिन्न क्यों न हों) की व्यक्तिगत अधिगम आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ हो सके, तो समावेशी शिक्षा के इस आधुनिक और वैज्ञानिक प्रतिमान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
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शैक्षणिक अनुसंधान और कक्षा-कक्ष के व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य में, जब एक शिक्षक 'क्रियात्मक अनुसंधान' (Action Research) के अंतर्गत अपनी शिक्षण विधियों में सुधार लाने के लिए 'कार्रवाई पर विचार' (Reflection-in-Action) और 'कार्रवाई पर परावर्तन' (Reflection-on-Action) की अवधारणाओं का अनुप्रयोग करता है, तो इन दोनों चिंतन प्रक्रियाओं के मध्य तात्विक और क्रियात्मक अंतर को सबसे सटीक रूप से कौन-सा कथन स्पष्ट करता है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) के लिए 'सार्वभौमिक डिज़ाइन अधिगम' (Universal Design for Learning - UDL) के सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. UDL एक ऐसा पाठ्यक्रम और शिक्षण ढांचा है जो अधिगम की बाधाओं को दूर करने के लिए शिक्षण विधियों, सामग्रियों और मूल्यांकन के तरीकों में शुरुआत से ही लचीलापन और बहुविकल्प प्रदान करता है।
2. UDL के तीन मुख्य मनोवैज्ञानिक और तंत्रिका-वैज्ञानिक आधार हैं: सहभागिता के बहुविध साधन (Multiple Means of Engagement), प्रस्तुति के बहुविध साधन (Multiple Means of Representation), और अभिव्यक्ति के बहुविध साधन (Multiple Means of Action and Expression)।
3. यह दृष्टिकोण केवल दिव्यांग या बौद्धिक रूप से पिछड़े बच्चों के लिए ही अनुकूलित है, और सामान्य अथवा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए इसका उपयोग करने से उनके उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास में बाधा उत्पन्न होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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शैक्षणिक मूल्यांकन की प्रक्रिया में 'सतत एवं व्यापक मूल्यांकन' (CCE) के अंतर्गत 'रचनात्मक आकलन' (Formative Assessment) और 'संकल्पात्मक मूल्यांकन' (Summative Assessment) के दार्शनिक और व्यावहारिक स्वरूप का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों के मध्य के तात्विक अंतर को सर्वाधिक सटीक रूप से परिभाषित करता है?
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शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) की धारा 29 के अंतर्गत संस्तुत 'सतत एवं व्यापक मूल्यांकन' (CCE) के संदर्भ में 'आकलन' (Assessment) और 'मूल्यांकन' (Evaluation) के तात्विक और क्रियात्मक भेदों का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों अवधारणाओं के बीच के अंतर को सर्वाधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट करता है?
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सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (Continuous and Comprehensive Evaluation - CCE) के अंतर्गत 'निदानात्मक आकलन' (Diagnostic Assessment), 'रचनात्मक आकलन' (Formative Assessment) और 'संकल्नात्मक आकलन' (Summative Assessment) के तात्विक और शैक्षणिक स्वरूप का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन तीनों आकलनों के अंतर्संबंधों और उनके प्रयोजनों को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
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सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) और आकलन (Assessment vs Evaluation) के तात्विक, शैक्षणिक और मनोवैज्ञानिक स्वरूप का गहन विश्लेषण करते हुए, 'अधिगम के लिए आकलन' (Assessment for Learning), 'अधिगम का आकलन' (Assessment of Learning) और 'अधिगम के रूप में आकलन' (Assessment as Learning) के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
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