BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
15 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) और उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मूल संविधान में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की घोषणा के आधार के रूप में किया गया था, जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा प्रतिस्थापित करके 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) किया गया।
  2. 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक सीमित हो सकती है, तथा राष्ट्रपति को पूरे देश में एक साथ आपातकाल लागू करने की बाध्यता से मुक्त कर दिया गया।
  3. 3. अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए किसी भी न्यायालय में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है, किंतु 44वें संशोधन के पश्चात अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करने का आदेश किसी भी स्थिति में नहीं दिया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: मूल संविधान के अनुच्छेद 352 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के लिए 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' और 'आंतरिक अशांति' आधार थे। 'आंतरिक अशांति' शब्द की अस्पष्टता और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इसे बदलकर 'सशस्त्र विद्रोह' कर दिया गया।

कथन 2 गलत है: राष्ट्रीय आपातकाल को संपूर्ण देश या उसके किसी भाग तक सीमित रखने का प्रावधान 42वें संविधान संशोधन द्वारा नहीं, बल्कि 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा जोड़ा गया था (इसके विपरीत 42वें संशोधन ने प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की शक्तियों को अत्यधिक केंद्रित किया था)।

कथन 3 सही है: अनुच्छेद 359 के अंतर्गत राष्ट्रपति आदेश द्वारा मूल अधिकारों के निलंबन की घोषणा कर सकता है, लेकिन 44वें संशोधन 1978 के बाद से अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) के निलंबन का आदेश कभी नहीं दिया जा सकता।

भारतीय संविधान के इन महत्वपूर्ण अनुच्छेदों और संशोधनों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट कर सकते हैं।
Share:

Related Questions

भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की संरचना, वित्तीय स्वायत्तता और उनके क्रियान्वयन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-B के अनुसार सभी राज्यों में त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली की स्थापना करना अनिवार्य है, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती (ब्लॉक) स्तर पर पंचायत के गठन न करने का विकल्प प्रदान किया गया है। 2. अनुच्छेद 243-H के अंतर्गत राज्य के विधानमंडल को यह शक्ति दी गई है कि वह विधि द्वारा पंचायतों को कुछ कर, शुल्क, टोल और फीस आरोपित करने, वसूलने और उन्हें अपने उपयोग के लिए विनियमित करने का अधिकार प्रदान कर सके, जिसका अर्थ यह है कि कराधान की शक्तियां पंचायतों को संविधान द्वारा स्वतः प्रदत्त (Self-executing) नहीं हैं बल्कि राज्य विधानमंडल के विवेक पर निर्भर करती हैं। 3. प्रत्येक राज्य में पंचायतों के लिए निर्वाचक नामावली तैयार करने और उनके सभी चुनावों के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करने की शक्ति केंद्रीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) में निहित होती है, जैसा कि अनुच्छेद 243-K में उपबंधित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के माध्यम से एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश प्रांतों की सीटों का आबंटन प्रमुख रूप से कुल जनसंख्या के अनुपात में लगभग दस लाख की आबादी पर एक सीट के आधार पर किया गया था। 2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसमें मुस्लिम लीग के सदस्यों ने भाग लिया था और सभा के स्थायी अध्यक्ष के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का निर्वाचन किया गया था, जबकि अस्थायी अध्यक्ष के रूप में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को चुना गया था। 3. संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को हुई थी, जिस दिन संविधान सभा द्वारा संविधान पर हस्ताक्षर किए गए और इसे अंगीकृत तथा अधिनियमित किया गया, तथा इसी दिन सभा का अस्तित्व स्वतः समाप्त हो गया और यह अंतरिम संसद में परिवर्तित हो गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के अंतर्गत विभिन्न अधिनियमों (Acts) और उनके प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के माध्यम से बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और वॉरेन हेस्टिंग्स इस पद पर आसीन होने वाले प्रथम व्यक्ति थे, तथा कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना का प्रावधान किया गया जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे। 2. 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक कर दिया गया, जिसके तहत व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और राजनीतिक मामलों के अधीक्षण के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की स्थापना की गई थी। 3. 1793 के चार्टर अधिनियम द्वारा यह प्रावधान किया गया कि बोर्ड ऑफ कंट्रोल के सदस्यों तथा उनके कर्मचारियों का वेतन भारतीय राजस्व (Indian Revenues) से ही दिया जाएगा, जो कि ब्रिटिश संसद द्वारा भारत में कंपनी के वित्तीय नियंत्रण को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा और राजनीतिक दलों से संबंधित संवैधानिक उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, राजनीतिक दलों के दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निर्योग्यता के बारे में उपबंध करती है, और इसके अंतर्गत पीठासीन अधिकारी द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होता है तथा उसकी न्यायिक समीक्षा पूर्णतः वर्जित है। 2. संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 348 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयाँ अंग्रेजी भाषा में होंगी, जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, तथा किसी राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस राज्य के उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी या अन्य राजभाषा के प्रयोग को अधिकृत कर सकता है। 3. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें विभिन्न संशोधनों के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली भाषाओं को 71वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया था। 4. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत किसी राजनीतिक दल को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम चार राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और साथ ही कम से कम चार राज्यों से लोकसभा में कुल 11 सीटें जीते। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) के प्रावधानों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243-Q के अनुसार प्रत्येक राज्य में सभी शहरी क्षेत्रों के लिए एकरूपता स्थापित करते हुए अनिवार्य रूप से तीन प्रकार की नगरपालिकाओं—संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगर परिषद और बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम—का गठन किया जाना आवश्यक है, किंतु यदि किसी राज्यपाल द्वारा किसी बड़े औद्योगिक नगरीय क्षेत्र को विशिष्ट औद्योगिक नगरी घोषित किया जाता है, तो वहाँ नगरपालिका का गठन करना अनिवार्य नहीं होता है। 2. अनुच्छेद 243-S के अंतर्गत प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र में वार्डों के भीतर स्थानीय प्रतिनिधित्व को सुदृढ़ करने के लिए 'वार्ड समितियों' (Ward Committees) के गठन का प्रावधान किया गया है, और यह व्यवस्था उन सभी राज्यों में अनिवार्य रूप से लागू होती है जिनकी कुल जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है। 3. अनुच्छेद 243-ZE के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक महानगरीय क्षेत्र (Metropolitan Area) में जिला स्तर पर विकास योजनाओं को तैयार करने और उन्हें एकीकृत रूप से संयोजित करने के लिए एक 'जिला योजना समिति' (District Planning Committee) का गठन किया जाता है, जिसके कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्य संबंधित जिले की पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से ही चुने जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.