क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)
Asked 2 महीने पहले · Viewed 18 times
बुरुस फ्रेडरिक स्किनर (B.F. Skinner) के 'क्रियापूत या नैमित्तिक अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'नकारात्मक सुदृढ़ीकरण' (Negative Reinforcement)—जिसे उस प्रेरक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से किसी अवांछित, कष्टदायक या प्रतिकूल उद्दीपक (Aversive Stimulus) को हटाकर या उसकी उपस्थिति से मुक्ति दिलाकर किसी वांछित अनुक्रिया (Desirable Response) की आवृत्ति, संभावना या शक्ति को बढ़ाया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुकूली व्यवहार, तनाव मुक्ति और सकारात्मक आदतों के निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सही उत्तर विकल्प (b) है। मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, बुरुस फ्रेडरिक स्किनर के क्रियापूत अनुबंधन (Operant Conditioning) में 'नकारात्मक सुदृढ़ीकरण' (Negative Reinforcement) और 'सजा' (Punishment) के बीच का अंतर समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। नकारात्मक सुदृढ़ीकरण का अर्थ किसी कष्टदायक या अप्रिय उद्दीपक (Aversive Stimulus) को हटाना (Remove) या उससे बचना (Avoid) है, जिससे उस विशिष्ट अनुक्रिया (Response) के दोबारा होने की संभावना बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई शिक्षक गृहकार्य समय पर पूरा करने पर अप्रिय ताने या अतिरिक्त बोझ से छात्र को मुक्त कर देता है, तो यह नकारात्मक सुदृढ़ीकरण है जो छात्र को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है (जबकि सजा व्यवहार को घटाती है और नकारात्मक सुदृढ़ीकरण वांछित व्यवहार को बढ़ाता है)। इसलिए विकल्प (b) वैज्ञानिक रूप से सबसे अधिक प्रामाणिक है।
अगला प्रश्न →
बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंध सिद्धांत' (Operant…
← पिछला प्रश्न
अधिगम के मनोविज्ञान के अंतर्गत एडवर्ड थार्नडाइक के 'प्रभाव…
Related Questions
→
एडवर्ड थार्नडाइक द्वारा प्रतिपादित अधिगम के मुख्य नियमों (Primary Laws of Learning) में से 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect) इस बात पर जोर देता है कि संतोषजनक परिणाम किसी अनुक्रिया को मजबूत करते हैं और असंतोषजनक परिणाम उसे कमजोर करते हैं। इस नियम की प्रत्यक्ष रूप से मनोवैज्ञानिक व सैद्धांतिक आलोचना करते हुए स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) और पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) के परिप्रेक्ष्य में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे अधिक विश्लेषणात्मक रूप से सही है?
→
अधिगम के 'पुनर्बलन सिद्धांत' (Reinforcement Theory) के मुख्य प्रतिपादक कौन थे?
→
अधिगम के किस सिद्धांत में 'पुनर्बलन' (Reinforcement) को सीखने का आधार माना गया है?
→
एडवर्ड थार्नडाइक के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) के प्रमुख नियमों—विशेषकर 'अभ्यास का नियम' (Law of Use and Disuse) तथा 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)—का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, बी.एफ. स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) और इवान पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) से इसकी तात्विक भिन्नता को दर्शाने वाला सर्वाधिक सटीक कथन कौन-सा है?
→
बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंध सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'शेपिंग या आकृतीकरण' (Shaping)—जिसे उस क्रमिक सन्निकटन विधि (Method of Successive Approximations) के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से किसी जटिल या नवीन वांछित व्यवहार को सीधे एक बार में प्रदर्शित करने की अपेक्षा, उस अंतिम लक्ष्य की ओर ले जाने वाले छोटे-छोटे क्रमिक चरणों और व्यवहारों को सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) प्रदान करके धीरे-धीरे ढाला या विकसित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नए कौशल अर्जन, जटिल व्यवहार संशोधन और सकारात्मक सुदृढ़ीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंध सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'रूप देना या शेपिंग' (Shaping)—जिसे उस क्रमिक सन्निकटन (Successive Approximations) की जटिल व्यवहारवादी तकनीक के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से किसी जीव या शिक्षार्थी द्वारा एक वांछित और जटिल नवीन अंतिम व्यवहार को तब तक छोटे-छोटे क्रमिक चरणों में सुदृढ़ीकरण (Reinforcement) प्रदान करके स्थापित किया जाता है जब तक कि वह पूर्ण और जटिल अनुक्रिया को पूरी तरह से सीख नहीं लेता—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के जटिल कौशलों के विकास, सकारात्मक व्यवहार-परिवर्तन और अनुशासित अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
अधिगम मनोविज्ञान के अंतर्गत एडवर्ड थार्नडाइक द्वारा प्रतिपादित 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory), इवान पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning) तथा बी.एफ. स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning) के तुलनात्मक एवं तात्विक स्वरूप का गहन विश्लेषण करने पर, इन तीनों अधिगम सिद्धांतों की अंतर्निहित क्रियाप्रणाली और उनके उद्दीपक-अनुक्रिया संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
→
अधिगम (Learning) के मनोविज्ञान के अंतर्गत, जब हम एडवर्ड थार्नडाइक के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory), इवान पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning) तथा बी.एफ. स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning) के मध्य अंतर्निहित तात्विक और दार्शनिक अंतर का गहन विश्लेषण करते हैं, तो उद्दीपक-अनुक्रिया (S-R) और अनुक्रिया-उद्दीपक (R-S) के परिप्रेक्ष्य में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.