संज्ञानात्मक विकास
Asked 2 महीने पहले · Viewed 3,500 times
जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'विकेंद्रीकरण' (Decentration)—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से बच्चा किसी वस्तु, घटना या समस्या के केवल एक ही पहलू या आयाम (जैसे लंबाई या चौड़ाई) पर अपना ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण / Centration) के बजाय उसके एक से अधिक पहलुओं या आयामों पर एक साथ ध्यान केंद्रित करने और उनके बीच मानसिक समन्वय बिठाने में सक्षम होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक चिंतन, बहुआयामी दृष्टिकोण और संरक्षण (Conservation) की अवधारणा को समझने के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 7 से 11 वर्ष) का एक केंद्रीय मील का पत्थर है। इस अवस्था में बच्चे पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की 'केंद्रण' (Centration - केवल एक आयाम पर ध्यान देने की प्रवृत्ति) की सीमा से बाहर निकल आते हैं और वे एक ही समय में किसी वस्तु या समस्या के कई आयामों (जैसे ऊँचाई और चौड़ाई दोनों) पर विचार कर सकते हैं। यह क्षमता बच्चों में 'संरक्षण' (Conservation) की समझ विकसित करने के लिए नितांत आवश्यक है, जिससे वे यह समझ पाते हैं कि बर्तन का आकार बदलने पर भी तरल पदार्थ की मात्रा वही रहती है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
अगला प्रश्न →
रोबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Conditions of…
← पिछला प्रश्न
एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'संज्ञानात्मक मानचित्र…
Related Questions
→
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में प्रवेश करने वाले किशोरों में विकसित होने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी विचार' (Combinatorial Thought) की क्षमताओं का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की तात्विक एवं संज्ञानात्मक विशेषताओं को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
→
जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'विकेंद्रण या डीसेंट्रेशन' (Decentration)—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु या परिस्थिति के केवल एक ही पहलू, आयाम या विशेषता पर अपना ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण/Centration) के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं या आयामों को एक साथ देखने, समझने और मानसिक रूप से समन्वित करने में सक्षम हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, तार्किक संरक्षण (Conservation) और संज्ञानात्मक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास की किस अवस्था में बालक 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा समझ जाता है?
→
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' की आयु अवधि क्या है?
→
डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advance Organizer)—जिसे उस शैक्षणिक तकनीक या परिचयात्मक पाठन सामग्री के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे मुख्य शिक्षण सामग्री या नए पाठ को पढ़ाने से ठीक पहले विद्यार्थियों के सामने उच्च स्तर की अमूर्तता, सामान्यता और व्यापकता के साथ प्रस्तुत किया जाता है, ताकि यह शिक्षार्थी के मस्तिष्क में पहले से मौजूद प्रासंगिक ज्ञान (Inclusive Concepts) के साथ नए ज्ञान को जोड़ने के लिए एक संज्ञानात्मक 'ब्रीफिंग' या हूक का काम कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा के सुदृढ़ीकरण, तार्किक ज्ञान-संरचना और सार्थक अधिगम (Meaningful Learning) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
जॉन फ्लैवेल (John Flavell) के 'संज्ञानात्मक मनोविज्ञान और metacognition' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'मेटाकॉग्निशन या अधिविज्ञान' (Metacognition)—जिसे उस उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से शिक्षार्थी अपने स्वयं के ज्ञान, चिंतन प्रक्रियाओं, अधिगम रणनीतियों और मानसिक गतिविधियों के बारे में न केवल जागरूक रहता है, बल्कि उनका सक्रिय रूप से निरीक्षण (Monitoring), नियंत्रण (Regulation) और मूल्यांकन भी करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-नियमित अधिगम (Self-regulated Learning), आलोचनात्मक चिंतन और स्वतंत्र समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न अधिगम सिद्धांत' (Sign Learning Theory / Purposive Behaviorism) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map)—जिसे उस मानसिक प्रतिनिधित्व या आंतरिक आरेख के रूप में परिभाषित किया जाता है जो कोई जीव (या शिक्षार्थी) अपने पर्यावरण, भौतिक परिवेश और लक्ष्यों तक पहुँचने वाले विभिन्न मार्गों का अपने मस्तिष्क में निर्माण करता है, जिससे वह बाहरी पुरस्कार या प्रेरणा के बिना भी पर्यावरण में नेविगेट करने और समस्याओं को हल करने में सक्षम होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्थानिक चिंतन, स्थानिक-संबंधी समस्या-समाधान (Spatial Problem-Solving) और अमूर्त बोध के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advance Organizer)—जिसे उस pedagogical उपकरण या प्रारंभिक पाठ्यसामग्री के रूप में परिभाषित किया जाता है जो मुख्य शिक्षण विषय को प्रस्तुत करने से ठीक पहले शिक्षार्थियों को प्रदान की जाती है, ताकि यह उनके संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों और नवीन सूचनाओं के बीच एक तार्किक सेतु का निर्माण कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा विकास, ज्ञान के सुदृढ़ीकरण और सार्थक अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.