संज्ञानात्मक विकास
Asked 2 महीने पहले · Viewed 1,186 times
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की तात्विक विशेषताओं का विश्लेषण करते हुए, जब एक बालक 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी तर्क' (Combinational Reasoning) का उपयोग करना सीख जाता है, तब उसके चिंतन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से उसकी संज्ञानात्मक संरचना को स्पष्ट करता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) वह चरण है जहाँ बालक का चिंतन अमूर्त (Abstract) और तार्किक हो जाता है। इस अवस्था की मुख्य विशेषता 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) है, जिसके तहत किशोर किसी समस्या के समाधान के लिए पहले विभिन्न परिकल्पनाएँ बनाते हैं और फिर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर उनका परीक्षण करते हैं। इसके साथ ही, वे 'संयोजनवादी तर्क' का उपयोग करके जटिल चरों (Variables) के सभी संभावित संयोजनों का विश्लेषण करने में सक्षम होते हैं। इस विषय पर अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं।
अगला प्रश्न →
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था'…
← पिछला प्रश्न
डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र'…
Related Questions
→
जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'विकेंद्रण या डीसेंट्रेशन' (Decentration)—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु या परिस्थिति के केवल एक ही पहलू, आयाम या विशेषता पर अपना ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण/Centration) के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं या आयामों को एक साथ देखने, समझने और मानसिक रूप से समन्वित करने में सक्षम हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, तार्किक संरक्षण (Conservation) और संज्ञानात्मक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में प्रवेश करने वाले किशोरों में विकसित होने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी विचार' (Combinatorial Thought) की क्षमताओं का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की तात्विक एवं संज्ञानात्मक विशेषताओं को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
→
पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास की किस अवस्था में बालक 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा समझ जाता है?
→
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' की आयु अवधि क्या है?
→
लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के अंतर्गत 'संज्ञानात्मक विकास में भाषा की भूमिका' (Role of Language in Cognitive Development) और 'निजी वाक्' (Private Speech) की अवधारणा का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस बात की सबसे प्रामाणिक वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है कि बच्चे अपने व्यवहार को विनियमित (Regulate) करने के लिए भाषा का उपयोग कैसे करते हैं?
→
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) के दौरान बालकों में विकसित होने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'अमूर्त चिंतन' की योग्यताओं का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सी विशिष्ट मानसिक क्षमता इस अवस्था की सबसे प्रामाणिक एवं तात्विक विशेषता को दर्शाती है?
→
जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'संरक्षण या कंजर्वेशन' (Conservation)—जिसे उस तार्किक मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक यह समझ जाता है कि किसी वस्तु के भौतिक रूप, आकार या विन्यास (Appearance) में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन, द्रव्यमान या भार में कोई परिवर्तन नहीं होता (जैसे कि एक ही मात्रा के पानी को अलग-अलग आकार के गिलासों में डालने पर भी पानी की मात्रा समान रहना)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के मूर्त संक्रियात्मक चिंतन (Concrete Operational Thinking), तार्किक विकेंद्रीकरण (Decentration) और reversibility के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Hierarchy of Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem-Solving Learning)—जिसे उस सर्वोच्च बौद्धिक स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी अपने पूर्व-अर्जित नियमों, सिद्धांतों और संप्रत्ययों का उपयोग करते हुए किसी बिल्कुल नई, जटिल और अप्रत्याशित समस्या के समाधान के लिए आंतरिक चिंतन, तार्किक परिकल्पना निर्माण (Hypothesis Generation) और सत्यापन के माध्यम से नए उच्च-क्रम के नियमों या समाधानों की खोज करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आलोचनात्मक चिंतन, उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण (Cognitive Processing) और बौद्धिक स्वायत्तता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.