अधिगम के क्षेत्र में इवान पावलव (Ivan Pavlov) के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning) तथा बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning) के मध्य के तात्विक और सैद्धांतिक स्वरूप का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों सिद्धांतों के बीच के सबसे महत्वपूर्ण और मौलिक अंतर को रेखांकित करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
इवान पावलव का शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) सिद्धांत उद्दीपक-प्रतिक्रिया (S-R) पर आधारित है, जहाँ स्वाभाविक या कृत्रिम उद्दीपक के माध्यम से अनैच्छिक (Involuntary) और प्रत्यावर्ती अनुक्रियाएं कराई जाती हैं, जैसे कुत्ते के मुँह से लार आना। इसके विपरीत, बी.एफ. स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning) सिद्धांत प्रतिक्रिया-उद्दीपक (R-S) पर आधारित है, जिसमें जीव पर्यावरण में स्वैच्छिक (Voluntary) और सायास व्यवहार करता है तथा उसकी अनुक्रिया के परिणाम स्वरूप उसे पुनर्बलन (Reinforcement) प्राप्त होता है। इस प्रकार, अनुक्रिया की प्रकृति (अनैतिक बनाम स्वैच्छिक) और अनुबंधन का क्रम ही इन दोनों व्यवहारवादी सिद्धांतों के बीच सबसे बड़ा मौलिक अंतर है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- पावलव का S-R मॉडल: इसमें उद्दीपक (Stimulus) पहले आता है और अनुक्रिया (Response) बाद में होती है। अनुक्रिया अनैच्छिक होती है।
- स्किनर का R-S मॉडल: इसमें जीव पहले अनुक्रिया (Response) करता है और उसके बाद उद्दीपक या पुनर्बलन (Stimulus) मिलता है। अनुक्रिया स्वैच्छिक होती है।
- विकल्प 'b' का खंडन: स्किनर के सिद्धांत में पुनर्बलन हमेशा अनुक्रिया के बाद दिया जाता है, पहले नहीं।
- विकल्प 'd' का खंडन: स्किनर के सिद्धांत में जीव सक्रिय (Active) होता है और पावलव में उद्दीपक के प्रति पारंपरिक रूप से बंधा होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: व्यवहारवाद (Behaviorism) के इतिहास में पावलव और स्किनर के प्रयोग मील का पत्थर माने जाते हैं। अधिगम के सिद्धांत के अंतर्गत इन दोनों का तुलनात्मक अध्ययन शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में छात्रों के व्यवहार को नियंत्रित करने और प्रेरित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB) में अक्सर पावलव और स्किनर के सिद्धांतों के अनुप्रयोग पर प्रश्न पूछे जाते हैं। पावलव का सिद्धांत आदत निर्माण (Habit Formation) और भय निवारण जैसी क्लासिकल प्रक्रियाओं में काम आता है, जबकि स्किनर का सिद्धांत प्रोग्राम्ड लर्निंग, कक्षा प्रबंधन, और सकारात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement) के माध्यम से वांछित व्यवहार को ढालने (Shaping) में अत्यधिक प्रभावी है। छात्रों को यह समझना आवश्यक है कि पावलव में उद्दीपक प्रधान है और स्किनर में अनुक्रिया प्रधान है।