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जीन पियाजे
Asked 2 महीने पहले · Viewed 2,926 times
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage - लगभग 2 से 7 वर्ष) की विशिष्ट संज्ञानात्मक सीमाओं का गहन विश्लेषण करने पर, 'जीववाद' (Animism), 'अहंप्रतिबद्धता' (Egocentrism), और 'संरक्षण का अभाव' (Lack of Conservation) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था के बालकों की मानसिक प्रक्रिया को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की दूसरी अवस्था 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage - 2 से 7 वर्ष) में बालकों की सोच में कुछ विशिष्ट संज्ञानात्मक सीमाएं (Cognitive Limitations) पाई जाती हैं। विकल्प (क) में दिया गया 'जीववाद' (Animism) इसका सबसे सटीक उदाहरण है। इस अवस्था में बालक निर्जीव वस्तुओं (जैसे गुड़िया, कार, बादल, चाँद) को भी सजीव, चेतनायुक्त और मनुष्यों की तरह भावनाएं रखने वाला मानते हैं। पियाजे के अनुसार, बच्चे अपने अनुभवों के आधार पर संपूर्ण ब्रह्मांड की वस्तुओं में प्राण होने की कल्पना करते हैं। यह उनकी बच्चों जैसी अज्ञानता और प्रतीकात्मक चिंतन का एक मुख्य लक्षण है, जो उनके मानसिक विकास के स्तर को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • जीववाद (Animism): निर्जीव वस्तुओं में जीवन और भावनाओं का होना मानना।
  • अहंप्रतिबद्धता (Egocentrism - गलत विकल्प विश्लेषण 'ब'): इसमें बालक दूसरों के दृष्टिकोण को नहीं समझ पाता, वह यह सोचता है कि जैसा वह देखता और महसूस करता है, वही सब देखते हैं (जबकि विकल्प 'ब' इसके विपरीत कहता है)।
  • संरक्षण का अभाव (Lack of Conservation - गलत विकल्प विश्लेषण 'स'): पूर्व संक्रियात्मक बालक यह नहीं समझ पाते कि आकार बदलने पर मात्रा अपरिवर्तित रहती है (जैसे चौड़े गिलास से लंबे गिलास में पानी डालने पर मात्रा बढ़ना मानना)।
  • केंद्रीयकरण (Centration - गलत विकल्प विश्लेषण 'द'): बालक एक समय में किसी वस्तु के केवल एक ही पहलू पर ध्यान केंद्रित कर पाता है और 'अपलटनशीलता' (Irreversibility) के कारण वह मानसिक क्रिया को उल्टे क्रम में नहीं सोच सकता।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे ने बाल विकास को चार अवस्थाओं में बांटा है जिसमें पूर्व संक्रियात्मक अवस्था भाषा और प्रतीकात्मक खेल का काल है। बाल मनोविज्ञान और शिक्षाशास्त्र में इस सिद्धांत से सीटेट और राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं। विस्तृत अध्ययन के लिए जीन पियाजे का सिद्धांत का संदर्भ लें।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET, और BPSC TRE) में पियाजे के संज्ञानात्मक विकास से जुड़े अनुप्रयोग आधारित प्रश्न सबसे अधिक आते हैं। 'जीववाद', 'अहंप्रतिबद्धता', 'केंद्रीयकरण' और 'संरक्षण' जैसी शब्दावलियां बार-बार दोहराई जाती हैं। शिक्षकों के लिए यह समझना अनिवार्य है कि पूर्व संक्रियात्मक स्तर का बालक मूर्त अनुभवों के माध्यम से सीखता है। प्रश्नपत्र हल करते समय नकारात्मक विकल्पों (जैसे संरक्षण को समझना या दूसरों का दृष्टिकोण समझना जो मूर्त या औपचारिक अवस्था से संबंधित हैं) को आसानी से एलिमिनेट किया जा सकता है। इस प्रकार के विश्लेषणात्मक प्रश्न वैचारिक स्पष्टता को परखने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं।

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→ जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'विकेंद्रण या डीसेंट्रेशन' (Decentration)—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु या परिस्थिति के केवल एक ही पहलू, आयाम या विशेषता पर अपना ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण/Centration) के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं या आयामों को एक साथ देखने, समझने और मानसिक रूप से समन्वित करने में सक्षम हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, तार्किक संरक्षण (Conservation) और संज्ञानात्मक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में प्रवेश करने वाले किशोरों में विकसित होने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी विचार' (Combinatorial Thought) की क्षमताओं का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की तात्विक एवं संज्ञानात्मक विशेषताओं को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास की किस अवस्था में बालक 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा समझ जाता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' की आयु अवधि क्या है? → जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage - लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) की सबसे प्रमुख और उन्नत संज्ञानात्मक विशेषता—'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) तथा 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking)—का गहन विश्लेषण करने पर, इस अवस्था के बालकों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उनके तार्किक कौशल की वास्तविक प्रकृति को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) से 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की ओर संक्रमण के दौरान बालक के चिंतन में होने वाले गुणात्मक परिवर्तनों का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों अवस्थाओं के बीच के सबसे मौलिक तात्विक अंतर को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की सबसे तात्विक और विशिष्ट विशेषता निम्नलिखित में से किसे माना जाता है, जो इसे 'पूर्व-संक्रियात्मक' और 'मूर्त संक्रियात्मक' अवस्थाओं से स्पष्ट रूप से भिन्न करती है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'अनुकूलन' (Adaptation) की प्रक्रिया में 'आत्मसातीकरण' (Assimilation) और 'समायोजन' (Accommodation) के मध्य पाई जाने वाली गत्यात्मक अंतःक्रिया तथा 'साम्यधारण' (Equilibration) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक वैज्ञानिक और प्रामाणिक व्याख्या प्रस्तुत करता है?
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