लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'संज्ञानात्मक विकास में भाषा और संस्कृति के अंतर्संबंध' तथा उनके द्वारा वर्णित 'अधिगम के समाज-मध्यस्थता (Socio-mediation)' के परिप्रेक्ष्य में, यदि कोई बालक अपने सांस्कृतिक परिवेश में उपलब्ध बौद्धिक और प्रतीकात्मक प्रणालियों को आंतरिकृत (Internalize) करता है, तो इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 'संज्ञानात्मक विकास के सामाजिक मूल' (Social Origins of Cognitive Development) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सबसे अधिक वैज्ञानिक और प्रामाणिक है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, बालक का संज्ञानात्मक विकास किसी एकांत या केवल जैविक प्रक्रिया का परिणाम नहीं है, बल्कि यह समाज, संस्कृति और भाषा की परस्पर अंतःक्रियाओं पर आधारित होता है। वाइगोत्स्की ने स्पष्ट रूप से यह प्रतिपादित किया है कि बच्चे के भीतर जितनी भी 'उच्च मानसिक प्रक्रियाएं' (Higher Mental Functions) जैसे कि तार्किक चिंतन, स्वैच्छिक ध्यान, और समस्या समाधान क्षमताएं विकसित होती हैं, वे मूल रूप से सामाजिक मूल (Social Origins) रखती हैं। इसका मतलब यह है कि ये प्रक्रियाएं सबसे पहले सामाजिक धरातल पर दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच अंतःक्रिया (Interpsychological) के रूप में घटित होती हैं और बाद में बालक उन्हें अपने भीतर आंतरिकृत (Internalize) करके व्यक्तिगत स्तर (Intrapsychological) पर स्थापित कर लेता है। अत: विकल्प (c) इस सिद्धांत का सबसे सटीक वैज्ञानिक और प्रामाणिक प्रतिनिधित्व करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- सामाजिक मूल (Social Origins): ज्ञान का निर्माण पहले बाहरी सामाजिक परिवेश में होता है और बाद में वह आंतरिक संज्ञान का हिस्सा बनता है।
- अंतःवैयक्तिक से अंतर्वैयक्तिक (Interpsychological to Intrapsychological): वाइगोत्स्की के अनुसार विकास हमेशा बाहर से अंदर की ओर (Inter to Intra) चलता है, जो जीन पियाजे के 'अंदर से बाहर' (Individual constructivism) के दृष्टिकोण के बिल्कुल विपरीत है।
- विकल्प (a) का खंडन: यह विकल्प जीन पियाजे के जैविक परिपक्वता (Biological Maturation) के दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसे वाइगोत्स्की ने अस्वीकार किया था।
- विकल्प (b) का खंडन: यह मानता है कि विकास पहले व्यक्तिगत स्तर पर होता है, जो कि वाइगोत्स्की के सिद्धांत के सर्वथा विपरीत है।
- विकल्प (d) का खंडन: यह जैविक नियतिवाद (Biological Determinism) का समर्थन करता है, जबकि वाइगोत्स्की सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों को सर्वोच्च महत्व देते हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: लेव वाइगोत्स्की का सिद्धांत इस बात पर बल देता है कि संस्कृति और भाषा बच्चों के संज्ञानात्मक विकास के मुख्य औजार (Tools of Intellectual Adaptation) हैं। इस विषय को विस्तार से समझने के लिए पढ़ें वाइगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB और BPSC TRE) में वाइगोत्स्की के सिद्धांत से जुड़े प्रश्न अक्सर भ्रमित करने वाले होते हैं क्योंकि परीक्षार्थी अक्सर पियाजे और वाइगोत्स्की के विचारों में उलझ जाते हैं। पियाजे का मानना था कि बालक 'नन्हा वैज्ञानिक' है जो अकेले ही पर्यावरण के साथ अंतःक्रिया करके ज्ञान का निर्माण करता है (व्यक्तिगत रचनावाद), जबकि वाइगोत्स्की मानते थे कि ज्ञान का सह-निर्माण (Co-construction of Knowledge) समाज, संस्कृति, और अधिक ज्ञानी अन्य (More Knowledgeable Other - MKO) तथा समीपस्थ विकास के क्षेत्र (Zone of Proximal Development - ZPD) के माध्यम से होता है। इस प्रश्न में 'Interpsychological' से 'Intrapsychological' की प्रक्रिया को समझना अति आवश्यक है क्योंकि यही वाइगोत्स्की के संज्ञानात्मक विकास के सामाजिक मूल का केंद्रीय स्तंभ है। कक्षा शिक्षण में इसका अनुप्रयोग यह सिखाता है कि बच्चों को सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning) और सहपाठियों के साथ समूह चर्चा के अवसर दिए जाने चाहिए ताकि वे ज्ञान को बेहतर ढंग से आंतरिकृत कर सकें।