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Child Development
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage: 11 वर्ष से आगे) के दौरान बालकों में विकसित होने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्कणा' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोगीय विचार' (Combinatorial Thought) की प्रणालियों का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प इस अवस्था के दौरान होने वाले संज्ञानात्मक परिवर्तन की सबसे सटीक वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है?

Detailed Explanation

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) अमूर्त चिंतन का काल है। इस चरण में 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्कणा' (Hypothetico-Deductive Reasoning) का विकास होता है, जिसके माध्यम से बालक किसी समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिक पद्धति की तरह पहले विभिन्न संभावित परिकल्पनाएँ (Hypotheses) गढ़ते हैं और फिर तार्किक रूप से उनका परीक्षण करके सही निष्कर्ष पर पहुँचते हैं। इसके साथ ही 'संयोगीय विचार' (Combinatorial Thought) के द्वारा वे किसी समस्या के सभी संभावित चरों (Variables) को व्यवस्थित रूप से जोड़कर देखने में सक्षम होते हैं। इस विषय पर विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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बाल विकास के अध्ययन के दौरान 'विकास की दिशा का सिद्धांत' (Principle of Directional Sequence) के अंतर्गत आने वाले 'मस्तकोधोमुखी क्रम' (Cephalocaudal Sequence) और 'निकट-दूर क्रम' (Proximodistal Sequence) का गहन विश्लेषण करने पर, इन दोनों प्रवृत्तियों के तात्विक, शारीरिक और जैविक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है? अधिगम अक्षमताओं (Learning Disabilities) के नैदानिक एवं न्यूरोलॉजिकल परिप्रेक्ष्य का गहन विश्लेषण करने पर, जब किसी छात्र को लिखित भाषा को संकलित करने, विचारों को कागज़ पर उतारने में अत्यधिक शारीरिक व मानसिक कठिनाई होती है, तथा उसकी लिखावट अत्यधिक खराब, अनियमित और वर्तनी-दोषयुक्त होती है—भले ही उसकी बौद्धिक क्षमता सामान्य हो—तो इस विशिष्ट न्यूरोलॉजिकल विकार की पहचान के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा नैदानिक पद सर्वाधिक उपयुक्त होगा और इसके मुख्य कारण के रूप में किसे रेखांकित किया जाएगा? एक 8 वर्षीय छात्र गणित की अवधारणाओं को समझने में सक्षम है और मौखिक रूप से भी अच्छा प्रदर्शन करता है, परंतु जब वह संख्याओं और गणितीय प्रतीकों (जैसे '+' और '-') को कागज़ पर लिखता है या अंकों को आपस में मिला देता है, तो उसे अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है। साथ ही उसकी लिखावट भी बेहद अस्पष्ट और अव्यवस्थित है। मनोवैज्ञानिक और चिकित्सीय भाषा में इस विशिष्ट अधिगम अक्षमता (Learning Disability) को क्या कहा जाएगा? अधिगम अक्षमताओं (Learning Disabilities) के अंतर्गत 'डिस्लेक्सिया' (Dyslexia), 'डिसग्राफिया' (Dysgraphia), 'डिसकैलकुलिया' (Dyscalculia) और 'डिसप्रैक्सिया' (Dyspraxia) के तात्विक, न्यूरोलॉजिकल तथा कक्षा-कक्षीय लक्षणों का गहन विश्लेषण करने पर, यदि एक शिक्षार्थी को लिखित शब्दों को पढ़ने, वर्णमाला या अक्षरों को उलटा देखने (जैसे 'b' को 'd' पढ़ना या 'saw' को 'was' पढ़ना), ध्वन्यात्मक प्रसंस्करण (Phonological Processing) में गंभीर कठिनाई होती है, किंतु उसकी बौद्धिक लब्धि (IQ) सामान्य या उससे अधिक होती है; तो इस विशिष्ट अधिगम विकार की वैज्ञानिक पहचान और इसके उपचारात्मक उपायों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं सत्य है? क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) के तात्विक, सैद्धांतिक तथा कक्षा-कक्षीय अनुप्रयोगों का गहन विश्लेषण करने पर, यदि एक शिक्षक अपनी शिक्षण विधियों में आ रही विशिष्ट समस्याओं (जैसे कक्षा में विद्यार्थियों की कम रुचि या बोधगम्यता का अभाव) का तात्कालिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए स्वयं अनुसंधान करता है, और इस प्रक्रिया में 'समस्या की पहचान, परिकल्पना निर्माण, डेटा संग्रह, हस्तक्षेप (Intervention) तथा परिणामों के मूल्यांकन' के चक्रीय प्रतिमान (Cyclical Model) का उपयोग करता है; तो क्रियात्मक अनुसंधान के इस स्वरूप और अन्य शोध पद्धतियों के साथ इसके अंतरसंबंध के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक एवं सत्य है?
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