जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage) में बच्चों के चिंतन की एक प्रमुख सीमा 'अहमकेन्द्रिता' (Egocentrism) और 'संरक्षण का अभाव' (Lack of Conservation) होती है। यदि कोई शिक्षिका तीन वर्ष के बच्चे को दो समान आकार के गिलासों से पानी एक लंबे और पतले गिलास में डालते हुए दिखाती है और बच्चा यह निष्कर्ष निकालता है कि लंबे गिलास में पानी की मात्रा अधिक है (क्योंकि वह केवल गिलास की ऊँचाई पर ध्यान केंद्रित करता है, न कि उसकी चौड़ाई पर), तो पियाजे के इस संदर्भ में 'केंद्रीकरण' (Centration) की यह अवधारणा निम्नलिखित में से किस संज्ञानात्मक प्रक्रिया या बाधा का प्रत्यक्ष परिणाम है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 2 से 7 वर्ष) में बच्चों के भीतर 'केंद्रीकरण' (Centration) की प्रवृत्ति पाई जाती है। इसका अर्थ है कि बच्चा किसी भी वस्तु या घटना के केवल एक ही आयाम (जैसे- केवल ऊँचाई या केवल लंबाई) पर अपना ध्यान केंद्रित कर पाता है और दूसरे महत्वपूर्ण आयामों (जैसे- चौड़ाई या मोटाई) को अनदेखा कर देता है। इस अवस्था में बालकों में 'संरक्षण' (Conservation) और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) का अभाव होता है। उपर्युक्त स्थिति में बच्चा पानी के आयतन को न समझकर केवल लंबे गिलास की ऊँचाई को देखता है, जो स्पष्ट रूप से केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण की कमी को दर्शाता है। अतः विकल्प (b) इस मनोवैज्ञानिक अवधारणा की सबसे सटीक और वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- केंद्रीकरण (Centration): एक समय में स्थिति के केवल एक पहलू पर ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति।
- विकेंद्रीकरण का अभाव (Lack of Decentration): बच्चे एक साथ कई आयामों पर विचार करने में असमर्थ होते हैं।
- विकल्प (a) का विश्लेषण: पलटावी गुण (Reversibility) का अभाव होता है, पूर्ण विकास नहीं; अतः यह गलत है।
- विकल्प (c) का विश्लेषण: निगमनात्मक तर्क और औपचारिक संक्रियात्मक चिंतन (11+ वर्ष) से संबंधित है, जबकि यह पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की घटना है।
- विकल्प (d) का विश्लेषण: जीववाद (Animism) का अर्थ निर्जीव वस्तुओं में सजीवता मानना है, जो यहाँ प्रासंगिक नहीं है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत बच्चों को 'नन्हे वैज्ञानिक' के रूप में देखता है जो सक्रिय रूप से अपने ज्ञान का निर्माण करते हैं। अधिक जानकारी के लिए जीन पियाजे का सिद्धांत पढ़ें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB और BPSC TRE) में पियाजे की अवस्थाओं और उनकी सीमाओं (जैसे- Egocentrism, Centration, Conservation, Reversibility) से संबंधित प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं। जब परीक्षार्थी से ऐसे परिदृश्य आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं, तो उसे यह पहचानना होता है कि बालक अपनी आयु के किस संज्ञानात्मक स्तर पर है। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था के बच्चों में मानसिक संचालन (Mental Operations) का अभाव होता है, जिससे वे संरक्षण के नियम को नहीं समझ पाते। कक्षा-कक्ष शिक्षण के दौरान शिक्षकों को ऐसे बालकों को मूर्त अनुभव (Concrete Experiences) प्रदान करने चाहिए ताकि वे केंद्रीकरण से ऊपर उठकर विकेंद्रीकरण (Decentration) की क्षमता विकसित कर सकें।