जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) की मुख्य विशेषताओं में से एक 'जीववाद' (Animism) और 'अहंप्रतिपत्ता / अहंकेंद्रितता' (Egocentrism) का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा उदाहरण 'जीववाद' (Animism) की मनोवैज्ञानिक अवधारणा को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 2 से 7 वर्ष) बालकों की मानसिक और वैचारिक प्रगति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। इस अवस्था की प्रमुख विशेषताओं में से एक 'जीववाद' (Animism) है, जिसका तात्पर्य बालकों की उस प्रवृत्ति से है जिसमें वे निर्जीव वस्तुओं (Non-living objects) में भी सजीवता, चेतना, भावनाएँ और प्राण होने की कल्पना करते हैं। वे यह मानते हैं कि जिस प्रकार इंसान और जानवर जीवित हैं, सांस लेते हैं, रोते या सोते हैं, उसी प्रकार गुड़िया, कार, बादल, चाँद, और सूरज जैसी निर्जीव वस्तुएं भी जीवित हैं। विकल्प (A) इस बात का सटीक उदाहरण है क्योंकि बच्चा मानता है कि सूरज और चाँद भी इंसानों की तरह थक जाते हैं और सोते हैं, जो सीधे तौर पर जीववाद की मनोवैज्ञानिक अवधारणा को स्पष्ट करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- जीववाद (Animism): निर्जीव वस्तुओं को सजीव मानना (जैसे- बारिश होने पर कहना कि बादल रो रहे हैं)।
- अहंकेंद्रितता (Egocentrism): यह मानना कि दुनिया ठीक वैसे ही देखती और महसूस करती है जैसे वह बच्चा स्वयं अनुभव करता है (विकल्प c इसका उदाहरण है)।
- विकल्प B का विश्लेषण: यह तार्किक और यांत्रिक सोच को दर्शाता है जो मूर्त या औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था से संबंधित है, न कि पूर्व-संक्रियात्मक जीववाद से।
- विकल्प D का विश्लेषण: यह लेव वाइगोत्स्की के 'निजी भाषण' (Private Speech) से संबंधित है, जहाँ बच्चा भाषा का उपयोग स्व-नियमन के लिए करता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे ने बाल विकास को चार चरणों में विभाजित किया है। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में प्रतीकात्मक विचार और भाषा का विकास तेजी से होता है, लेकिन तार्किक क्षमता का अभाव होता है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, और BPSC TRE) में पियाजे के संज्ञानात्मक विकास से जुड़े उप-शब्दों (जैसे- Centration, Animism, Egocentrism, Conservation) पर आधारित अनुप्रयोग-आधारित (Application-based) प्रश्न बहुतायत से पूछे जाते हैं। परीक्षार्थियों को यह समझना आवश्यक है कि बालक जब किसी निर्जीव वस्तु से बात करता है या उसके मानवीय गुणधर्म मान लेता है, तो वह पियाजे के अनुसार 'एनिमिज़्म' या जीववाद है। शिक्षकों को कक्षा कक्ष में ऐसे बालकों की कल्पनाशीलता का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।