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जीन पियाजे
Asked 2 महीने पहले · Viewed 3,152 times
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) की मुख्य विशेषताओं में से एक 'जीववाद' (Animism) और 'अहंप्रतिपत्ता / अहंकेंद्रितता' (Egocentrism) का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा उदाहरण 'जीववाद' (Animism) की मनोवैज्ञानिक अवधारणा को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (लगभग 2 से 7 वर्ष) बालकों की मानसिक और वैचारिक प्रगति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। इस अवस्था की प्रमुख विशेषताओं में से एक 'जीववाद' (Animism) है, जिसका तात्पर्य बालकों की उस प्रवृत्ति से है जिसमें वे निर्जीव वस्तुओं (Non-living objects) में भी सजीवता, चेतना, भावनाएँ और प्राण होने की कल्पना करते हैं। वे यह मानते हैं कि जिस प्रकार इंसान और जानवर जीवित हैं, सांस लेते हैं, रोते या सोते हैं, उसी प्रकार गुड़िया, कार, बादल, चाँद, और सूरज जैसी निर्जीव वस्तुएं भी जीवित हैं। विकल्प (A) इस बात का सटीक उदाहरण है क्योंकि बच्चा मानता है कि सूरज और चाँद भी इंसानों की तरह थक जाते हैं और सोते हैं, जो सीधे तौर पर जीववाद की मनोवैज्ञानिक अवधारणा को स्पष्ट करता है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • जीववाद (Animism): निर्जीव वस्तुओं को सजीव मानना (जैसे- बारिश होने पर कहना कि बादल रो रहे हैं)।
  • अहंकेंद्रितता (Egocentrism): यह मानना कि दुनिया ठीक वैसे ही देखती और महसूस करती है जैसे वह बच्चा स्वयं अनुभव करता है (विकल्प c इसका उदाहरण है)।
  • विकल्प B का विश्लेषण: यह तार्किक और यांत्रिक सोच को दर्शाता है जो मूर्त या औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था से संबंधित है, न कि पूर्व-संक्रियात्मक जीववाद से।
  • विकल्प D का विश्लेषण: यह लेव वाइगोत्स्की के 'निजी भाषण' (Private Speech) से संबंधित है, जहाँ बच्चा भाषा का उपयोग स्व-नियमन के लिए करता है।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे ने बाल विकास को चार चरणों में विभाजित किया है। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में प्रतीकात्मक विचार और भाषा का विकास तेजी से होता है, लेकिन तार्किक क्षमता का अभाव होता है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, और BPSC TRE) में पियाजे के संज्ञानात्मक विकास से जुड़े उप-शब्दों (जैसे- Centration, Animism, Egocentrism, Conservation) पर आधारित अनुप्रयोग-आधारित (Application-based) प्रश्न बहुतायत से पूछे जाते हैं। परीक्षार्थियों को यह समझना आवश्यक है कि बालक जब किसी निर्जीव वस्तु से बात करता है या उसके मानवीय गुणधर्म मान लेता है, तो वह पियाजे के अनुसार 'एनिमिज़्म' या जीववाद है। शिक्षकों को कक्षा कक्ष में ऐसे बालकों की कल्पनाशीलता का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।

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→ जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'विकेंद्रण या डीसेंट्रेशन' (Decentration)—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु या परिस्थिति के केवल एक ही पहलू, आयाम या विशेषता पर अपना ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण/Centration) के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं या आयामों को एक साथ देखने, समझने और मानसिक रूप से समन्वित करने में सक्षम हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, तार्किक संरक्षण (Conservation) और संज्ञानात्मक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में प्रवेश करने वाले किशोरों में विकसित होने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी विचार' (Combinatorial Thought) की क्षमताओं का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की तात्विक एवं संज्ञानात्मक विशेषताओं को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास की किस अवस्था में बालक 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा समझ जाता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' की आयु अवधि क्या है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'साम्यावस्था' (Equilibration), 'आत्मसातीकरण' (Assimilation) और 'समंजन' (Accommodation) की गत्यात्मक प्रक्रियाओं का गहन विश्लेषण करने पर, जब एक बालक अपने पूर्व-स्थापित स्कीमा (Schema) में नए अनुभवों को पूरी तरह से फिट नहीं कर पाता और उसके सामने संज्ञानात्मक असंतुलन (Disequilibrium) उत्पन्न होता है, तब वह अपने पुराने स्कीमा में संशोधन करता है या नए स्कीमा का निर्माण करता है। पियाजे के इस संपूर्ण सिद्धांत में इस विशिष्ट 'समंजन' (Accommodation) प्रक्रिया का सबसे सटीक और वैज्ञानिक तात्विक स्वरूप निम्नलिखित में से कौन-सा है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage, लगभग 2 से 7 वर्ष) की विशिष्ट संज्ञानात्मक सीमाओं का गहन विश्लेषण करने पर, 'जीववाद' (Animism), 'अहंदर्शक' (Egocentrism), और 'केंद्रीयकरण' (Centration) जैसी अवधारणाओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन तीनों मानसिक विशेषताओं के वास्तविक और दार्शनिक स्वरूप को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage: 11 वर्ष से आगे) की मुख्य विकासात्मक विशेषताओं का गहन विश्लेषण करने पर, 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी विचार' (Combinatorial Thinking) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की वास्तविक संज्ञानात्मक परिपक्वता को सबसे सटीक रूप से स्पष्ट करता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage: 11 वर्ष से आगे) के दौरान बालकों में विकसित होने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्कणा' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोगीय विचार' (Combinatorial Thought) की प्रणालियों का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प इस अवस्था के दौरान होने वाले संज्ञानात्मक परिवर्तन की सबसे सटीक वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है?
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