जीन पियाजे
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'साम्यावस्था' (Equilibration), 'आत्मसातीकरण' (Assimilation) और 'समंजन' (Accommodation) की गत्यात्मक प्रक्रियाओं का गहन विश्लेषण करने पर, जब एक बालक अपने पूर्व-स्थापित स्कीमा (Schema) में नए अनुभवों को पूरी तरह से फिट नहीं कर पाता और उसके सामने संज्ञानात्मक असंतुलन (Disequilibrium) उत्पन्न होता है, तब वह अपने पुराने स्कीमा में संशोधन करता है या नए स्कीमा का निर्माण करता है। पियाजे के इस संपूर्ण सिद्धांत में इस विशिष्ट 'समंजन' (Accommodation) प्रक्रिया का सबसे सटीक और वैज्ञानिक तात्विक स्वरूप निम्नलिखित में से कौन-सा है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में 'समंजन' (Accommodation) वह गत्यात्मक प्रक्रिया है जिसके द्वारा बालक अपने मौजूदा स्कीमा (Schema) में परिवर्तन करता है या नए स्कीमा का निर्माण करता है, ताकि वह वातावरण से प्राप्त होने वाली नवीन और विरोधाभासी जानकारियों या अनुभवों को समायोजित कर सके। जब आत्मसातीकरण (Assimilation) के माध्यम से नए अनुभव पुराने ज्ञान में फिट नहीं बैठते हैं, तो संज्ञानात्मक असंतुलन उत्पन्न होता है, जिसे दूर करने के लिए समंजन अनिवार्य रूप से कार्य करता है। इस प्रक्रिया के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions
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बच्चों के भाषा विकास (Language Development) के संदर्भ में, नोम चॉम्स्की (Noam Chomsky) के 'भाषा अर्जन उपकरण' (Language Acquisition Device - LAD) के सिद्धांत के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चॉम्स्की का यह मानना है कि बच्चे जन्मजात रूप से भाषा सीखने की एक अंतर्भूत क्षमता के साथ पैदा होते हैं, जिसे 'सार्वभौमिक व्याकरण' (Universal Grammar) कहा जाता है, और यह क्षमता मानव मस्तिष्क की एक जैविक विशेषता है।
2. इस सिद्धांत के अनुसार, बच्चों को भाषा सीखने के लिए किसी भी प्रकार की औपचारिक शिक्षा या बाहरी परिवेशीय पुनर्बलन (Reinforcement) की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि बाहरी वातावरण केवल बच्चे के आंतरिक व्याकरण को सक्रिय करने का कार्य करता है।
3. चॉम्स्की के इस सिद्धांत को संज्ञानात्मक विकास के अंतर्गत जीन पियाजे के विचारों का पूर्ण समर्थन प्राप्त था, क्योंकि पियाजे का भी यही मानना था कि भाषा का विकास बच्चे के पूर्व-क्रियात्मक चरण के दौरान उसके अनुभव और सामाजिक अंतःक्रिया से स्वतंत्र रूप से होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) और 'व्युत्क्रमित या अनुभवजन्य अधिगम सिद्धांत' (Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अर्थपूर्ण अनुभवात्मक अधिगम' (Significant Experiential Learning) की अवधारणा—जिसके तहत अधिगम तब होता है जब छात्र की व्यक्तिगत जिज्ञासा, उसकी अपनी समस्याओं और उसके स्व-सचेतन (Self-initiated) अनुभवों के साथ विषय-वस्तु जुड़ जाती है, और शिक्षक केवल एक 'सहायक या सुविधाप्रदाता' (Facilitator) की भूमिका निभाता है न कि एक पारंपरिक ज्ञान के प्रदाता की—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-निर्देशित अधिगम, संवेगात्मक संलग्नता और व्यक्तिगत स्वायत्तता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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बच्चों के सामाजिक विकास (Social Development) के संदर्भ में, 'जीन पियाजे' और 'लेव वायगोत्स्की' के सिद्धांतों के बीच निम्नलिखित में से कौन सा मुख्य अंतर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है?
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प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) के संदर्भ में, जॉन डीवी (John Dewey) के 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत तथा जॉन पियाजे एवं लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-रचनावादी (Social Constructivist) दृष्टिकोणों का सूक्ष्म एवं तार्किक विश्लेषण करने पर, एक आदर्श बाल-केंद्रित कक्षा-कक्ष की सबसे मौलिक और वैज्ञानिक विशेषता निम्नलिखित में से कौन-सी होनी चाहिए?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage, लगभग 7 से 11 वर्ष) की तात्विक विशेषताओं का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सी प्रमुख संज्ञानात्मक क्षमताएं इस चरण के दौरान बच्चों में विकसित होती हैं?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage, लगभग 2 से 7 वर्ष) की प्रमुख तात्विक विशेषताओं तथा सीमाओं (जैसे- अहंप्रकेंद्रिता, जीववाद, और केंद्रीयकरण) का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था के बच्चों की संज्ञानात्मक वास्तविकता को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) की मुख्य विशेषताओं में से एक 'जीववाद' (Animism) और 'अहंप्रतिपत्ता / अहंकेंद्रितता' (Egocentrism) का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा उदाहरण 'जीववाद' (Animism) की मनोवैज्ञानिक अवधारणा को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Pre-operational Stage) में बच्चों के चिंतन की एक प्रमुख सीमा 'अहमकेन्द्रिता' (Egocentrism) और 'संरक्षण का अभाव' (Lack of Conservation) होती है। यदि कोई शिक्षिका तीन वर्ष के बच्चे को दो समान आकार के गिलासों से पानी एक लंबे और पतले गिलास में डालते हुए दिखाती है और बच्चा यह निष्कर्ष निकालता है कि लंबे गिलास में पानी की मात्रा अधिक है (क्योंकि वह केवल गिलास की ऊँचाई पर ध्यान केंद्रित करता है, न कि उसकी चौड़ाई पर), तो पियाजे के इस संदर्भ में 'केंद्रीकरण' (Centration) की यह अवधारणा निम्नलिखित में से किस संज्ञानात्मक प्रक्रिया या बाधा का प्रत्यक्ष परिणाम है?
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