मैक्स वर्दिमियर, कुर्त कोफ्का और वोल्फगैंग कोहलर द्वारा प्रतिपादित 'गेस्टाल्टवादी अधिगम सिद्धांत' या 'सूझ (अंतर्दृष्टि) का सिद्धांत' के संदर्भ में, चिम्पांजी 'सुल्तान' पर किए गए प्रसिद्ध प्रयोग तथा इस सिद्धांत के तात्विक निष्कर्षों का गहन विश्लेषण करने पर निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
गेस्टाल्टवादी अधिगम सिद्धांत (Gestalt Theory of Learning) के प्रवर्तक मैक्स वर्दिमियर, कुर्त कोफ्का और वोल्फगैंग कोहलर हैं। 'गेस्टाल्ट' एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ 'समग्र' (Whole) या 'पूर्णाकार' होता है। इस सिद्धांत के अनुसार मनुष्य या कोई भी प्राणी किसी भी परिस्थिति या समस्या को टुकड़ों में नहीं, बल्कि समग्र रूप में देखता है। कोहलर ने कैनरी द्वीप पर 'सुल्तान' नामक चिम्पांजी पर प्रयोग करके यह सिद्ध किया कि अधिगम केवल यांत्रिक प्रयास और त्रुटि से नहीं होता, बल्कि अचानक आने वाली सूझ (Insight) या अंतर्दृष्टि से होता है। विकल्प (b) पूर्णतः सत्य है क्योंकि सूझ अचानक उत्पन्न होती है जब प्राणी अपनी संपूर्ण परिस्थिति का पुनर्गठन करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- गेस्टाल्टवाद समग्रता के सिद्धांत पर बल देता है, जिसका अर्थ है 'संपूर्ण भाग उसके अंगों के योग से अधिक होता है'।
- विकल्प (a) थंडाइक के प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत का वर्णन करता है, न कि गेस्टाल्टवाद का, अतः यह गलत है।
- विकल्प (c) व्यवहारवादी S-R थ्योरी का वर्णन करता है जबकि गेस्टाल्टवादी संज्ञानात्मक और अंतर्दृष्टिवादी दृष्टिकोण रखते हैं।
- विकल्प (d) रटन विद्या और खंडित ज्ञान का समर्थन करता है जो गेस्टाल्टवादी समग्र दृष्टिकोण के बिल्कुल विपरीत है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: वोल्फगैंग कोहलर की पुस्तक 'द मेंटालिटी ऑफ़ एप्स' (1925) ने संज्ञानात्मक मनोविज्ञान की नींव रखी। यह सिद्धांत शिक्षण में सूझ, समस्या समाधान और जीन पियाजे का सिद्धांत जैसे संज्ञानात्मक विकास के मॉडलों को गहराई से प्रभावित करता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (CTET, UPTET, DSSSB) में गेस्टाल्ट मनोविज्ञान से जुड़े प्रश्न अक्सर 'सूझ', 'समग्रता', और 'पुनर्गठन' की अवधारणाओं पर आधारित होते हैं। कोहलर के प्रयोग में सुल्तान द्वारा छड़ियों को जोड़कर केला प्राप्त करना इस बात का प्रतीक है कि उच्च कोटि का अधिगम बौद्धिक परिपक्वता और सूझबूझ पर निर्भर करता है। कक्षाओं में इस सिद्धांत का प्रयोग बच्चों को केवल सूत्र रटाने के बजाय समस्याओं को समग्र रूप से समझने और रचनात्मक हल खोजने के लिए प्रेरित करने हेतु किया जाता है।