लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत 'रूढ़िगत नैतिकता का स्तर' (Conventional Morality Level) के दूसरे चरण यानी 'प्राधिकार एवं सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने का अभिमुखीकरण' (Authority and Social Order-Maintaining Orientation - चरण 4) का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, इस अवस्था की कौन-सी मुख्य विशेषता इसके तात्विक स्वरूप को सर्वाधिक सटीक रूप से दर्शाती है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'रूढ़िगत नैतिकता का स्तर' (Conventional Morality Level) किशोरावस्था और वयस्कता के प्रारंभिक चरण को दर्शाता है। इस स्तर के चौथे चरण यानी 'प्राधिकार एवं सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने का अभिमुखीकरण' (Authority and Social Order-Maintaining Orientation) में व्यक्ति समाज के नियमों, कानूनों और सामाजिक व्यवस्थाओं का पूरी निष्ठा से पालन करता है। यहाँ मुख्य उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखना, कर्तव्य का पालन करना और यह मानना होता है कि यदि हर व्यक्ति नियमों को तोड़ेगा, तो समाज में अराजकता फैल जाएगी। अतः विकल्प (b) इस अवस्था के तात्विक और मनोवैज्ञानिक स्वरूप को पूर्णतः स्पष्ट करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- चरण 4 की विशेषता: कानून और व्यवस्था बनाए रखना (Law and Order Orientation) जिसमें सामाजिक नियमों का पालन परम कर्तव्य माना जाता है।
- विकल्प (a) का विश्लेषण: यह कोहलबर्ग के तीसरे चरण (अच्छा लड़का/अच्छी लड़की अभिविन्यास) को दर्शाता है जो पारस्परिक संबंधों पर आधारित है।
- विकल्प (c) का विश्लेषण: यह उत्तर-रूढ़िगत स्तर के छठे चरण (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत) को इंगित करता है।
- विकल्प (d) का विश्लेषण: यह पूर्व-रूढ़िगत स्तर के पहले चरण (दंड और आज्ञाकारिता अभिविन्यास) से संबंधित है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: लॉरेंस कोहलबर्ग ने जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के विचारों से प्रेरणा लेकर नैतिक विकास का त्रि-स्तरीय और षड्-चरणीय मॉडल प्रतिपादित किया था। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS) में कोहलबर्ग के चरणों से जुड़े प्रश्न अक्सर व्यावहारिक परिस्थितियों (Case Studies) पर आधारित होते हैं। चरण 4 पर आधारित प्रश्नों में छात्रों या व्यक्तियों द्वारा सामाजिक नियमों, यातायात संकेतों या कानूनी प्रावधानों के प्रति दिखाई गई निष्ठा का मूल्यांकन किया जाता है। शिक्षकों को कक्षा में बालकों के भीतर आंतरिक अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के लिए इस सिद्धांत के व्यावहारिक अनुप्रयोग को समझना अनिवार्य है।