अहमद (Ahmad) अपने विद्यालयों में कठिन विषयों को पढ़ने के लिए आंतरिक रूप से प्रेरित रहता है, जबकि सोहन (Sohan) केवल अच्छे अंक प्राप्त करने, पुरस्कार जीतने और माता-पिता व शिक्षकों की प्रशंसा पाने के लिए कार्य करता है। एडवर्ड डेसी (Edward Deci) और रिचर्ड रायन (Richard Ryan) द्वारा प्रतिपादित 'आत्म-निर्णय सिद्धांत' (Self-Determination Theory) तथा अभिप्रेरणा के द्वि-घटक स्वरूप (आंतरिक एवं बाह्य अभिप्रेरणा) के संदर्भ में, इन दोनों बालकों की प्रेरणा प्रणालियों का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
यहाँ एडवर्ड डेसी (Edward Deci) और रिचर्ड रायन (Richard Ryan) द्वारा प्रतिपादित प्रसिद्ध 'आत्म-निर्णय सिद्धांत' (Self-Determination Theory - SDT) की बात की जा रही है। इस सिद्धांत के अनुसार मानव अभिप्रेरणा मुख्य रूप से तीन मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं पर आधारित होती है: स्वायत्तता (Autonomy), सक्षमता (Competence), और संबद्धता (Relatedness)। आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation) वह है जो व्यक्ति के भीतर से उत्पन्न होती है, जहाँ वह किसी कार्य को उसके अपने आनंद, संतुष्टि और आंतरिक जिज्ञासा के लिए करता है। इसके विपरीत, बाह्य अभिप्रेरणा (Extrinsic Motivation) बाहरी कारकों जैसे ग्रेड, पुरस्कार, प्रशंसा या दंड द्वारा संचालित होती है। अहमद का व्यवहार आंतरिक अभिप्रेरणा का उत्कृष्ट उदाहरण है जो उसे गहरे स्तर की समझ, स्वायत्तता और लंबे समय तक ज्ञान बनाए रखने में मदद करता है। दूसरी ओर, सोहन का व्यवहार बाह्य अभिप्रेरणा पर आधारित है, जिससे 'ओवरजस्टिफिकेशन इफेक्ट' (Overjustification Effect) के कारण उसकी आंतरिक रुचि धीरे-धीरे कम हो सकती है और वह बाहरी पुरस्कारों पर अत्यधिक निर्भर हो जाता है। अतः विकल्प (ए) इस मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य का सबसे प्रामाणिक और वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation): यह दीर्घकालिक, गहरी समझ, संज्ञानात्मक विकास और स्वायत्तता को बढ़ावा देती है।
- बाह्य अभिप्रेरणा (Extrinsic Motivation): यह अल्पकालिक होती है और बाहरी पुरस्कारों के हटने पर समाप्त हो सकती है।
- विकल्प (b) का खंडन: बाह्य पुरस्कार हमेशा दीर्घकालिक संज्ञानात्मक विकास को बढ़ावा नहीं देते; कभी-कभी यह रचनात्मकता को बाधित करते हैं।
- विकल्प (c) का खंडन: दोनों की प्रेरणा प्रणालियों के संज्ञानात्मक और भावनात्मक प्रभाव पूरी तरह भिन्न होते हैं।
- विकल्प (d) का खंडन: सोहन का व्यवहार 'नियंत्रित नियमन' (Controlled Regulation) का उदाहरण है, न कि स्वायत्त नियमन का।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान में अभिप्रेरणा का अध्ययन अधिगम की अभिप्रेरणा (Motivation in Learning) और आत्म-निर्णय सिद्धांत (Self-Determination Theory) के अंतर्गत किया जाता है, जो विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक और भावनात्मक विकास को समझने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, KVS, DSSSB) में अभिप्रेरणा से जुड़े प्रश्न व्यावहारिक परिदृश्यों पर आधारित होते हैं। इस प्रश्न में डेसी और रायन के आत्म-निर्णय सिद्धांत के मूल तत्त्वों को परखा गया है। अध्यापन के दौरान शिक्षकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि छात्रों में केवल बाहरी पुरस्कारों (जैसे ग्रेड या टॉफ़ी) पर निर्भरता बढ़ाने के बजाय उनकी आंतरिक जिज्ञासा (Curiosity) और स्वायत्तता (Autonomy) को पोषित किया जाए। जब छात्र किसी विषय को समझने के लिए आंतरिक रूप से प्रेरित होते हैं, तो वे उच्च-क्रम के संज्ञानात्मक कौशल (Higher-order thinking skills) का प्रदर्शन करते हैं। परीक्षा के दृष्टिकोण से याद रखें कि आंतरिक रूप से प्रेरित छात्र अधिक लचीले और आत्म-नियमित (Self-regulated learners) होते हैं।