लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पारंपरिक नैतिकता के स्तर' (Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले चौथे चरण, यानी 'प्राधिकार और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने की उन्मुखता' (Authority and Social Order Maintaining Orientation) का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस चरण की तात्विक और व्यवहारपरक विशेषता को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Conventional Level) लगभग 10 से 13 वर्ष की आयु या किशोरावस्था के दौरान देखा जाता है। इस स्तर के अंतर्गत आने वाले चौथे चरण का नाम 'प्राधिकार और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने की उन्मुखता' (Authority and Social Order Maintaining Orientation) है। इस चरण की मूल विशेषता यह है कि व्यक्ति का नैतिक तर्क कानून, व्यवस्था, सामाजिक नियमों और अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा पर पूरी तरह आधारित होता है। व्यक्ति यह मानता है कि समाज में शांति, स्थिरता और सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है। अतः विकल्प (b) इस चरण की तात्विक और व्यवहारपरक विशेषता को पूर्णतः सटीक रूप से स्पष्ट करता है क्योंकि यह सामाजिक नियमों के पालन और कर्तव्यपरायणता पर बल देता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- चरण 4 की विशेषता: कानून एवं व्यवस्था उन्मुखता (Law and Order Orientation) के तहत व्यक्ति व्यवस्था बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
- विकल्प (a) का विश्लेषण: यह पांचवें चरण 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) से संबंधित है, न कि चौथे चरण से।
- विकल्प (c) का विश्लेषण: यह कोहलबर्ग के पहले चरण यानी 'आज्ञाकारिता एवं दंड उन्मुखता' (Obedience and Punishment Orientation) का वर्णन करता है जो पूर्व-पारंपरिक स्तर में आता है।
- विकल्प (d) का विश्लेषण: यह छठे और अंतिम चरण 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत उन्मुखता' (Universal Ethical Principles Orientation) को दर्शाता है, जिसमें व्यक्ति अपने आंतरिक विवेक पर निर्णय लेता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: लॉरेंस कोहलबर्ग ने जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के विचारों को आधार बनाते हुए नैतिक विकास का त्रि-स्तरीय और छह-चरणों वाला व्यापक सिद्धांत प्रतिपादित किया था। परीक्षा में अक्सर चरणों के अनुक्रम और उनकी विशेषताओं पर प्रश्न पूछे जाते हैं। अधिक जानकारी के लिए कोहलबर्ग का सिद्धांत पढ़ें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:ः
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, और BPSC TRE) में कोहलबर्ग के चरणों से संबंधित व्यावहारिक और परिस्थिति-आधारित (Scenario-based) प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं। चौथे चरण में बालक या किशोर यह सोचने लगता है कि "यदि हर व्यक्ति कानून तोड़ेगा, तो समाज बिखर जाएगा और अराजकता फैल जाएगी," इसलिए सामाजिक व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए कानूनों का आंख मूंदकर पालन करना चाहिए। अध्यापकों को कक्षा-कक्ष में विद्यार्थियों के भीतर नैतिक तर्क को विकसित करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वे केवल दंड या पुरस्कार के डर से नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और व्यवस्था के महत्व को समझकर सही आचरण करें। इस प्रकार के वैचारिक स्पष्टीकरण से परीक्षार्थी किसी भी जटिल प्रश्न को आसानी से हल कर सकते हैं।