बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner) द्वारा प्रतिपादित 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) के सिद्धांत के अंतर्गत, जब किसी वांछित व्यवहार की पुनरावृत्ति की संभावना को बढ़ाने के लिए लगातार हर सही अनुक्रिया के बाद पुनर्बलन दिया जाता है और बाद में इसे आंतरायिक (Intermittent) या आंशिक पुनर्बलन में परिवर्तित कर दिया जाता है, तो इस प्रक्रिया और स्किनर के शेड्यूल का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर निम्नलिखित में से कौन-सा कथन 'परिवर्ती अनुपात अनुसूची' (Variable Ratio Schedule) की सबसे सटीक और व्यावहारिक विशेषता को रेखांकित करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बी.एफ. स्किनर द्वारा प्रतिपादित 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) के सिद्धांत में पुनर्बलन अनुसूचियां (Schedules of Reinforcement) सीखने और व्यवहार को आकार देने में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। 'परिवर्ती अनुपात अनुसूची' (Variable Ratio Schedule - VR) के अंतर्गत, प्राणी को किसी वांछित अनुक्रिया के लिए पुनर्बलन एक अनिश्चित और बदलते हुए संख्यात्मक औसत के आधार पर प्रदान किया जाता है। चूंकि प्राणी को यह ज्ञात नहीं होता कि अगला पुनर्बलन कौन सी अनुक्रिया पर मिलेगा, इसलिए इस अनुसूची में अनुक्रिया की दर सबसे तीव्र और अत्यधिक स्थिर (Steady) होती है। इसके अलावा, यह अनुसूची विलोपन (Extinction) के प्रति सबसे अधिक प्रतिरोध (Resistance to Extinction) प्रदर्शित करती है, जिसका सर्वोत्तम उदाहरण जुए की मशीनें (Slot machines) हैं। यही कारण है कि विकल्प (c) इस अवधारणा का सबसे सटीक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- परिवर्ती अनुपात अनुसूची (VR): यह अनिश्चित प्रतिक्रियाओं की संख्या पर आधारित होती है, जैसे कि औसतन हर पाँचवीं अनुक्रिया पर, जो उच्च प्रतिक्रिया दर उत्पन्न करती है।
- विकल्प (a) 'निश्चित अंतराल अनुसूची' (Fixed Interval Schedule) का वर्णन करता है जिसमें समय अंतराल प्रधान होता है।
- विकल्प (b) 'निश्चित अनुपात अनुसूची' (Fixed Ratio Schedule) को दर्शाता है, जिसमें अनुक्रियाओं की संख्या निश्चित होती है और इसमें 'स्कैलप प्रभाव' (Scallop effect) देखा जाता है।
- विकल्प (d) नकारात्मक पुनर्बलन और निश्चित अंतराल की भ्रामक व्याख्या प्रस्तुत करता है, जो इस प्रश्न के संदर्भ में असंगत है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन थार्नडाइक के प्रभाव के नियम (Law of Effect) पर आधारित है, जहाँ परिणाम व्यवहार की आवृत्ति को निर्धारित करते हैं। विस्तृत अध्ययन के लिए देखें बी.एफ. स्किनर का सिद्धांत एवं पुनर्बलन अनुसूचियां।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, और BPSC TRE) में स्किनर के पुनर्बलन अनुसूचियों (Fixed Ratio, Variable Ratio, Fixed Interval, Variable Interval) से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। उम्मीदवारों को यह समझना आवश्यक है कि 'परिवर्ती अनुपात' (Variable Ratio) जुए या लॉटरी की तरह अप्रत्याशित होने के कारण सबसे अधिक लत या स्थायी आदत का निर्माण करता है, जबकि 'निश्चित अंतराल' (Fixed Interval) में परीक्षा के समय पढ़ाई तेज होने जैसी प्रवृत्ति (Scalloping) दिखती है। कक्षा कक्ष प्रबंधन में छात्रों को लगातार प्रेरित रखने के लिए आंतरायिक और परिवर्ती पुनर्बलन अत्यंत प्रभावी शिक्षण तकनीक माने जाते हैं।