उत्तर प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और मेलों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. शाकंभरी देवी मेला - सहारनपुर जिला (प्रतिवर्ष माँ शाकंभरी देवी के मंदिर में आयोजित, जहाँ उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के श्रद्धालु भी आते हैं)
- 2. बटेश्वर मेला - आगरा जिला (यमुना नदी के तट पर आयोजित एक प्रसिद्ध पशु मेला, जो ऊँटों और अन्य पशुओं की खरीद-फरोख्त के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है)
- 3. हरिदास जयंती मेला - मथुरा जिला (निधिवन, वृंदावन में संगीत सम्राट स्वामी हरिदास की स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित ध्रुपद गायन और शास्त्रीय संगीत का प्रसिद्ध उत्सव)
- 4.
सैयद सलार मसूद गाजी का मेला - बहराइच जिला (यह मेला हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की साझा संस्कृति का प्रतीक है, जिसे 'बहराइच का मेला' भी कहा जाता है) उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, उत्सव और मेलों का राज्य की ऐतिहासिक व सामाजिक पहचान में विशेष योगदान है। प्रश्न में दिए गए सभी चारों युग्म पूर्ण रूप से सत्य और सही सुमेलित हैं। शाकंभरी देवी मेला सहारनपुर में शक्तिपीठ पर लगता है, बटेश्वर मेला आगरा का ऐतिहासिक ऊँट व पशु मेला है, हरिदास जयंती मेला वृंदावन (मथुरा) में संगीत साधक स्वामी हरिदास की स्मृति में आयोजित होता है, और बहराइच का सैयद सलार मसूद गाजी मेला सांप्रदायिक सद्भाव व साझा संस्कृति (गंगा-जमुनी तहज़ीब) का अनूठा प्रतीक है। इसलिए विकल्प (d) सभी सही हैं, एकदम सटीक उत्तर है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- शाकंभरी देवी मेला: सहारनपुर जिले में आयोजित होने वाला यह प्रसिद्ध मेला नवरात्रि के दौरान भारी भीड़ आकर्षित करता है।
- बटेश्वर मेला: आगरा के पास यमुना और चंबल नदी के संगम क्षेत्र के समीप आयोजित यह मेला भारत का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है।
- हरिदास जयंती मेला: वृंदावन में ध्रुपद संगीत और शास्त्रीय कला के संरक्षण हेतु यह उत्सव राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।
- सैयद सलार मसूद गाजी मेला: बहराइच में लगने वाला यह मेला हिंदू-मुस्लिम एकता और समरसता का प्रतीक है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: उत्तर प्रदेश की संस्कृति और मेलों का यह अध्ययन सामाजिक विज्ञान और बाल विकास के पर्यावरणीय अध्ययन (EVS) खंड के अंतर्गत प्रादेशिक ज्ञान को मजबूत करता है। अधिक जानकारी के लिए समावेशी शिक्षा और सांस्कृतिक विविधता के पाठ्यक्रम का संदर्भ लें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
राज्य स्तरीय परीक्षाओं (जैसे UPTET, Super TET, BPSC) में उत्तर प्रदेश के मेलों, उत्सवों और कला-संस्कृति से जुड़े प्रश्न अक्सर सीधे तथ्यात्मक रूप में पूछे जाते हैं। शिक्षार्थियों को गंगा-जमुनी तहज़ीब, लोक परंपराओं और क्षेत्रीय विशेषताओं की गहरी समझ होनी चाहिए ताकि वे बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही चुनाव कर सकें। इन मेलों का शैक्षणिक महत्व यह है कि ये छात्रों को सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराते हैं।