त्वरित लिंक्स
History of India
17 views
तालिकोटा के युद्ध (1565) के बाद विजयनगर साम्राज्य का केंद्र हम्पी से बदलकर कहाँ चला गया?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
तालिकोटा के युद्ध में हार के बाद विजयनगर की राजधानी पेनुकोण्डा स्थानांतरित हो गई थी।
Related Questions
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह से पूर्व ब्रिटिश नीतियों के कारण उत्पन्न हुए राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड डलहौजी द्वारा लागू की गई 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) के अंतर्गत सतारा, नागपुर और झाँसी का विलय किया गया, किंतु वर्ष 1856 में अवध का विलय इस सिद्धांत के तहत न करके 'कुशासन' के आधार पर किया गया, जिससे पारंपरिक भारतीय रियासतों में तीव्र असुरक्षा और आक्रोश फैल गया।
2. वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) के तहत पुश्तैनी संपत्ति में उत्तराधिकार के अधिकार को धर्म परिवर्तन से अलग कर दिया गया और यह प्रावधान किया गया कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अपने पूर्वजों की संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाईकरण का षड्यंत्र माना।
3. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों और मुक्त व्यापार (Free Trade) के एकतरफा प्रसार के कारण भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का तेजी से पतन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में बेरोजगार हुए कारीगर और शिल्पकार कृषि पर निर्भर होने के लिए बाध्य हो गए और ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा गई।
4. सेना के भीतर नस्लीय भेदभाव और कम वेतन की समस्या तो थी ही, किंतु वर्ष 1856 में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पारित 'सामान्य सेवा अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत नए भारतीय सैनिकों के लिए समुद्र पार सेवा (Overseas Service) अनिवार्य किए जाने से सैनिकों की धार्मिक मान्यताओं को गहरी ठेस पहुँची।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और तदुपरांत चले 'स्वदेशी आंदोलन' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन की योजना का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक रूप से जागरूक बंगाली राष्ट्रवाद की गति को मंद करना और प्रशासनिक सुविधा के नाम पर हिंदू-मुस्लिम संप्रदायों के आधार पर प्रांत का प्रांतीय विभाजन करना था।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जब विभाजन प्रभावी हुआ, तब संपूर्ण बंगाल में शोक दिवस मनाया गया, लोगों ने उपवास रखा, और रवींद्रनाथ टैगोर के सुझाव पर बंगालियों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर सांप्रदायिक सौहार्द व एकता का प्रदर्शन किया।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और आत्मनिर्भरता के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में स्वदेशी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 1906 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी।
4. इस आंदोलन के दौरान मुस्लिम बहुसंख्यक वर्ग और तत्कालीन उभरते हुए मुस्लिम नेतृत्व ने शुरू से अंत तक बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा बंगाल विभाजन का पूर्ण समर्थन करते हुए स्वदेशी आंदोलन को अखिल भारतीय स्तर पर नेतृत्व प्रदान किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण (1932-34) तथा इसके दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा अपनाई गई दमनकारी नीतियों और राजनीतिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1931 में लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन की असफलता के बाद, महात्मा गांधी के भारत लौटने पर वायसराय लॉर्ड विलिंगटन ने कांग्रेस के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया और जनवरी 1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत होते ही गांधीजी सहित सभी प्रमुख नेताओं को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।
2. ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड द्वारा अगस्त 1932 में घोषित 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) के तहत दलितों (अछूतों) को भी मुसलमानों और सिखों की तरह पृथक निर्वाचन का अधिकार दे दिया गया, जिसके विरोध में महात्मा गांधी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू किया और इसके परिणामस्वरूप पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर हुए।
3. सविनय अवज्ञा आंदोलन के इस दूसरे चरण के दौरान बंगाल में महिलाओं ने अत्यंत साहसिक भूमिका निभाई, और कमिला की दो स्कूली छात्राओं—सुनीति चौधरी और शांति घोष—ने ब्रिटिश मजिस्ट्रेट स्टीवर्ट की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
4. कांग्रेस ने वर्ष 1934 में औपचारिक रूप से सविनय अवज्ञा आंदोलन को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा कर दी, क्योंकि जनता का उत्साह और मनोबल लगातार पुलिस दमन और गिरफ्तारियों के कारण क्षीण हो चुका था, तथा गांधीजी ने इस समय कांग्रेस की सक्रिय राजनीति से अलग होकर अपना ध्यान पूरी तरह रचनात्मक कार्यों पर केंद्रित कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विद्रोहियों के पास एक सुसंगत राजनीतिक दृष्टिकोण, आधुनिक हथियारों की कमी और केंद्रीय नेतृत्व का अभाव था, जिसके कारण संपूर्ण भारत में इसे एक समन्वित दिशा नहीं मिल सकी।
2. अधिकांश भारतीय शासकों, बड़े जमींदारों और संभ्रांत वर्गों ने या तो अंग्रेजों का सक्रिय समर्थन किया या तटस्थ बने रहे, क्योंकि उन्हें भय था कि विद्रोह की सफलता से सामंती व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।
3. विभिन्न क्षेत्रों के विद्रोहियों और उनके स्थानीय नेताओं ने आपसी सहयोग के स्थान पर अपनी क्षेत्रीय सीमाओं तक ही संघर्ष को सीमित रखा, जिससे अंग्रेजों को एक-एक कर विद्रोह को कुचलने का अवसर मिल गया।
4. विद्रोहियों के पास आधुनिक संचार साधनों, विशेषकर रेलवे और टेलीग्राम का पूरा नियंत्रण था, जिसका उपयोग उन्होंने ब्रिटिश सेना की गतिविधियों को बाधित करने के लिए किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में मंगल पांडे द्वारा घटित घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में डमडम और बैरकपुर के शस्त्रागारों में नई 'एनफील्ड राइफल' और उसमें प्रयुक्त होने वाले कारतूसों के संबंध में यह तथ्य सामने आया कि इन कारतूसों के आवरण में गाय और सूअर की चर्बी का लेप लगाया गया है, जिसे लोड करने से पहले सैनिकों को दांतों से काटना पड़ता था।
2. बैरकपुर छावनी की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग और ब्रिटिश उत्पीड़न के विरोध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों एडजुटेंट लेफ्टिनेंट बो और सार्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई।
3. मंगल पांडे की फाँसी के उपरांत बैरकपुर छावनी की 34वीं और 19वीं नेटिव इन्फैंट्री रेजिमेंटों को ब्रिटिश सरकार द्वारा तुरंत सम्मानित किया गया और भविष्य के असंतोष को रोकने के लिए सेना में एनफील्ड राइफलों के प्रयोग को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.