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जीन पियाजे
Asked एक महीने पहले · Viewed 3,177 times
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' की अवधि क्या है?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage) की अवधि लगभग 7 वर्ष से 11 वर्ष तक होती है। इस अवस्था में बच्चे वस्तुओं और घटनाओं के बारे में तार्किक रूप से सोचना शुरू कर देते हैं, बशर्ते वे मूर्त (प्रत्यक्ष) रूप से उनके सामने हों। इस चरण की मुख्य विशेषताओं में संरक्षण (Conservation), वर्गीकरण (Classification), और उत्क्रमणीयता (Reversibility) शामिल हैं। बच्चे इस उम्र में अमूर्त विचारों से बचते हैं और ठोस अनुभवों पर आधारित समस्याओं को सफलतापूर्वक हल करने की क्षमता विकसित कर लेते हैं, जो बाल्यावस्था के मध्य भाग से मेल खाता है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • विकल्प A (जन्म से 2 वर्ष): यह पियाजे की 'संवेदी-गामक अवस्था' (Sensorimotor Stage) की अवधि है।
  • विकल्प B (2 से 7 वर्ष): यह 'पूर्व संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) की अवधि है, जिसमें भाषा का विकास और प्रतीकात्मक सोच प्रमुख होती है।
  • विकल्प C (7 से 11 वर्ष): यह सही विकल्प है, जो 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' को दर्शाता है जहाँ तार्किक चिंतन का मूर्त आधार पर प्रारंभ होता है।
  • विकल्प D (11 से 15 वर्ष): यह 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) की अवधि है, जिसमें अमूर्त और वैज्ञानिक चिंतन का विकास होता है।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे स्विट्जरलैंड के एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने बाल विकास को चार चरणों में विभाजित किया है। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के विभिन्न आयामों को समझना अत्यंत आवश्यक है, जो शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, REET और BPSC TRE) में जीन पियाजे के चरणों, उनकी आयु सीमा और विशिष्ट संज्ञानात्मक क्षमताओं से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। शिक्षकों को यह समझना चाहिए कि मूर्त संक्रियात्मक अवस्था के दौरान बच्चे हाथों-हाथ गतिविधियों (Hands-on activities) और मूर्त अनुभवों के माध्यम से सर्वोत्तम सीखते हैं। इसलिए, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षण अधिगम सामग्री (TLM) का उपयोग इस अवस्था के बच्चों की संज्ञानात्मक आवश्यकताओं के अनुकूल होता है।

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→ जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'विकेंद्रण या डीसेंट्रेशन' (Decentration)—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु या परिस्थिति के केवल एक ही पहलू, आयाम या विशेषता पर अपना ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण/Centration) के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं या आयामों को एक साथ देखने, समझने और मानसिक रूप से समन्वित करने में सक्षम हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, तार्किक संरक्षण (Conservation) और संज्ञानात्मक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में प्रवेश करने वाले किशोरों में विकसित होने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी विचार' (Combinatorial Thought) की क्षमताओं का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की तात्विक एवं संज्ञानात्मक विशेषताओं को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास की किस अवस्था में बालक 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा समझ जाता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' की आयु अवधि क्या है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, मूर्त संक्रियात्मक अवस्था की अवधि क्या है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' की समयावधि क्या है? → जीन पियाजे کے संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'संरक्षण' (Conservation) का गुण किस अवस्था में प्रकट होता है? → जीन पियाजे के अनुसार संज्ञानात्मक विकास की प्रथम अवस्था कौन सी है?
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