बुद्धि लब्धि (IQ) का संप्रत्यय सबसे पहले किसने विकसित किया था?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बुद्धि लब्धि (IQ) का संप्रत्यय सबसे पहले जर्मन मनोवैज्ञानिक विलियम स्टर्न (William Stern) द्वारा वर्ष 1912 में विकसित किया गया था। हालांकि बुद्धि परीक्षण (Intelligence Test) का जनक अल्फ्रेड बिने को माना जाता है, जिन्होंने 1905 में पहला बुद्धि परीक्षण तैयार किया था, लेकिन मानसिक आयु को वास्तविक आयु से भाग देकर 100 से गुणा करने वाले 'बुद्धि लब्धि' के गणितीय सूत्र और संप्रत्यय को प्रतिपादित करने का श्रेय विलियम स्टर्न को जाता है। बाद में 1916 में एल.एम. टरमन (Lewis Terman) ने स्टैनफोर्ड-बिने स्केल में संशोधन करते हुए इस सूत्र को IQ = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) × 100 के रूप में पूरी तरह से स्थापित किया। इसलिए सैद्धांतिक रूप से 'IQ संप्रत्यय' का प्रणेता विलियम स्टर्न को ही माना जाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- अल्फ्रेड बिने (विकल्प A): इन्होंने साइमन के साथ मिलकर 1905 में दुनिया का पहला औपचारिक बुद्धि परीक्षण दिया और 'मानसिक आयु' (Mental Age) का संप्रत्यय प्रतिपादित किया।
- विलियम स्टर्न (विकल्प B): इन्होंने सर्वप्रथम 1912 में बुद्धि लब्धि (IQ) का संप्रत्यय दिया, जो कि सही उत्तर है।
- रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (विकल्प C): इन्होंने बुद्धि का 'त्रितंत्रीय सिद्धांत' (Triarchic Theory of Intelligence) प्रतिपादित किया जिसमें विश्लेषणात्मक, सृजनात्मक और व्यावहारिक बुद्धि शामिल है।
- हावर्ड गार्डनर (विकल्प D): इन्होंने 'बहुबुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) दिया जिसके अनुसार बुद्धि कोई एक इकाई नहीं बल्कि कई स्वतंत्र प्रकार की होती है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास और शिक्षाशास्त्र में बुद्धि के मापन और इतिहास से जुड़े प्रश्न विभिन्न शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं। विस्तृत अध्ययन के लिए देखें बुद्धि और उसका मापन।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक भर्ती परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, REET) में अक्सर छात्र अल्फ्रेड बिने और विलियम स्टर्न के बीच भ्रमित हो जाते हैं। याद रखें कि 'पहला बुद्धि परीक्षण' बनाने का श्रेय अल्फ्रेड बिने को जाता है, जबकि 'IQ का संप्रत्यय' (Concept of IQ) विलियम स्टर्न ने दिया था। इसके अलावा, L.M. Terman द्वारा 1916 में इसमें '× 100' जोड़ने का कार्य किया गया ताकि दशमलव से बचा जा सके। परीक्षा में प्रश्न की भाषा को ध्यान से पढ़ना अति आवश्यक है ताकि सही विकल्प का चयन किया जा सके।